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23 माह में एक हजार बार कोर्ट में पेश हुए अब्दुल्ला आजम
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रामपुर। सपा सांसद आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम 23 माह में दो बार रामपुर कोर्ट में पेश हुए, जबकि करीब एक हजार बार वो वीसी (वीडियो कांफ्रेंसिंग) के जरिए सीतापुर जेल से जुड़े। वहीं, कोरोना काल की वजह से उनके मुकदमों की सुनवाई की गति धीमी हो गई।
सपा सांसद आजम खां ने अपने पुत्र अब्दुल्ला आजम को वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में स्वार टांडा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में अब्दुल्ला आजम को 106443 वोट मिले थे, जो उनके पिता आजम खां को मिले वोटों से भी अधिक थे। आजम खां को शहर विधानसभा से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में 102100 मत प्राप्त हुए थे। परंतु, उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम का चुनाव शुरू से ही कम उम्र को लेकर विवादों में रहा। पहले तो उनके नामांकन पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई गई, लेकिन उनका पर्चा वैध माना गया।
चुनाव जीतने के बाद उनके प्रतिद्वंदी नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने उनके निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी। जिसमें हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 16 दिसंबर 2019 को स्वार टांडा विधानसभा का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अब्दुल्ला आजम अपने अधिवक्ता के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट गए, जहां मामला अभी तक लंबित है।
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वर्ष 2019 में जिले के विभिन्न थानों में उनके खिलाफ 45 मुकदमे दर्ज हुए, जिसमें से दो मुकदमों में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इस तरह 43 मामले न्यायालयों में विचाराधीन हैं। अब्दुल्ला आजम की सभी मामलों में जमानत मंजूर हो चुकी है। जबकि, उनके पिता आजम खां के खिलाफ रामपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे शत्रु संपत्ति के मामलों में जमानत मंजूर नहीं हुई है। उनकी मां व शहर विधायक डॉ. तजीन फात्मा की भी जमानत मंजूर हो चुकी है और वे इस समय जमानत पर बाहर हैं।
जेल जाने के बाद अब्दुल्ला आजम 29 फरवरी 2020 और एक मार्च 2020 को रामपुर कोर्ट में पेश हुए थे। जबकि, कोरोना संक्रमण के कारण न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो गई थी, जिसके बाद अप्रैल तक कोर्ट बंद रहे थे। उसके बाद कोर्ट मेें वर्चुअल मोड के जरिए सुनवाई होती रही।
इस दौरान अब्दुल्ला आजम खां लगभग एक हजार बार वीसी के जरिए सीतापुर जेल से जुड़े और उनकी सुनवाई होती रही। इस दौरान उनके मुकदमों में आरोप तय होने से लेकर गवाही की प्रक्रियाएं भी चलती रहीं। अब शनिवार को उनकी रिहाई के लिए विशेष संदेशवाहक के माध्यम से परवाना भेजा गया है, जिसके बाद संभावना है कि कभी भी उनकी रिहाई हो सकती है।
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सपा सांसद आजम खां ने अपने पुत्र अब्दुल्ला आजम को वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में स्वार टांडा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में अब्दुल्ला आजम को 106443 वोट मिले थे, जो उनके पिता आजम खां को मिले वोटों से भी अधिक थे। आजम खां को शहर विधानसभा से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में 102100 मत प्राप्त हुए थे। परंतु, उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम का चुनाव शुरू से ही कम उम्र को लेकर विवादों में रहा। पहले तो उनके नामांकन पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई गई, लेकिन उनका पर्चा वैध माना गया।
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चुनाव जीतने के बाद उनके प्रतिद्वंदी नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने उनके निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी। जिसमें हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 16 दिसंबर 2019 को स्वार टांडा विधानसभा का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अब्दुल्ला आजम अपने अधिवक्ता के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट गए, जहां मामला अभी तक लंबित है।
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वर्ष 2019 में जिले के विभिन्न थानों में उनके खिलाफ 45 मुकदमे दर्ज हुए, जिसमें से दो मुकदमों में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इस तरह 43 मामले न्यायालयों में विचाराधीन हैं। अब्दुल्ला आजम की सभी मामलों में जमानत मंजूर हो चुकी है। जबकि, उनके पिता आजम खां के खिलाफ रामपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे शत्रु संपत्ति के मामलों में जमानत मंजूर नहीं हुई है। उनकी मां व शहर विधायक डॉ. तजीन फात्मा की भी जमानत मंजूर हो चुकी है और वे इस समय जमानत पर बाहर हैं।
जेल जाने के बाद अब्दुल्ला आजम 29 फरवरी 2020 और एक मार्च 2020 को रामपुर कोर्ट में पेश हुए थे। जबकि, कोरोना संक्रमण के कारण न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो गई थी, जिसके बाद अप्रैल तक कोर्ट बंद रहे थे। उसके बाद कोर्ट मेें वर्चुअल मोड के जरिए सुनवाई होती रही।
इस दौरान अब्दुल्ला आजम खां लगभग एक हजार बार वीसी के जरिए सीतापुर जेल से जुड़े और उनकी सुनवाई होती रही। इस दौरान उनके मुकदमों में आरोप तय होने से लेकर गवाही की प्रक्रियाएं भी चलती रहीं। अब शनिवार को उनकी रिहाई के लिए विशेष संदेशवाहक के माध्यम से परवाना भेजा गया है, जिसके बाद संभावना है कि कभी भी उनकी रिहाई हो सकती है।