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अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सस्पेंड
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
Updated Wed, 19 Oct 2016 12:43 AM IST
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यतीमखाना प्रकरण में अवैध कब्जेदार तो खदेड़ ही दिए गए हैं एक अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को भी निलंबित कर दिया गया। पिछले दिनों अवैध कब्जेदारों और वक्फ प्रशासन के बीच समझौता कराने में अहम भूमिका निभाने वाले रामपुर में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात रहे आरपी सिंह को निलंबित कर दिया गया। कुछ समय पहले उनका तबादला लखनऊ कर दिया गया था।
यतीमखाने से अवैध अतिक्रमण हटाने की कवायद काफी समय से चल रही थी। विरोध को देखते हुए तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आरपी सिंह ने प्रशासन और कब्जेदारों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया। काफी जद्दोजहद के बाद वह समझौता कराने में कामयाब रहे।
लिहाजा 14 अगस्त को समझौते पर हस्ताक्षर भी हो गए थे। इस समझौते के मुताबिक 17 कब्जेदारों को कुछ जमीन किराए के रूप में आवंटित कर दी गई। आवंटित की गई जमीन पर इन लोगों ने अपना निर्माण भी करा लिया। इसके बाद दोनों के बीच समझौता हो गया और लोग बेफिक्री से रहने लगे, लेकिन यह समझौता कराना अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (सहायक सर्वे आयुक्त वक्फ) आरपी सिंह को महंगा पड़ा। पहले उनका तबादला लखनऊ कर दिया गया और अब शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया।
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इस समझौते पर सहायक सर्वे कमिश्नर आरपी सिंह, वरिष्ठ सहायक वक्फ राम सुमेर और जोनल वक्फ आफिसर मोहम्मद उमर खां भी शामिल थे। समझौते में कब्जेदारों को रकबे का आधा हिस्सा आवंटित किया गया था। यानी जिसके पास दो सौ गज जमीन कब्जे में थी उसे सौ गज आवंटित कर किराए पर दी गई थी। लेकिन नगर विकास मंत्री आजम खां ने इस समझौते को भी खत्म करा दिया।
इसके बाद जो आरपी सिंह नगर विकास मंत्री आजम खां के करीबी अफसरों में माने जाते थे, उन्हें भी आखिर यतीमखाना प्रकरण में निलंबित होना पड़ गया। हालांकि इस मुद्दे को लेकर अब जिले के अफसरों ने चुप्पी साध ली है। क्योंकि जो समझौता हुआ था उससे जिले के सभी जिम्मेदार अफसर भी मुतमइन थे। क्योंकि इसके लिखित दस्तावेज जारी हो चुके थे।
यतीमखाने से अवैध अतिक्रमण हटाने की कवायद काफी समय से चल रही थी। विरोध को देखते हुए तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आरपी सिंह ने प्रशासन और कब्जेदारों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया। काफी जद्दोजहद के बाद वह समझौता कराने में कामयाब रहे।
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लिहाजा 14 अगस्त को समझौते पर हस्ताक्षर भी हो गए थे। इस समझौते के मुताबिक 17 कब्जेदारों को कुछ जमीन किराए के रूप में आवंटित कर दी गई। आवंटित की गई जमीन पर इन लोगों ने अपना निर्माण भी करा लिया। इसके बाद दोनों के बीच समझौता हो गया और लोग बेफिक्री से रहने लगे, लेकिन यह समझौता कराना अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (सहायक सर्वे आयुक्त वक्फ) आरपी सिंह को महंगा पड़ा। पहले उनका तबादला लखनऊ कर दिया गया और अब शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया।
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इस समझौते पर सहायक सर्वे कमिश्नर आरपी सिंह, वरिष्ठ सहायक वक्फ राम सुमेर और जोनल वक्फ आफिसर मोहम्मद उमर खां भी शामिल थे। समझौते में कब्जेदारों को रकबे का आधा हिस्सा आवंटित किया गया था। यानी जिसके पास दो सौ गज जमीन कब्जे में थी उसे सौ गज आवंटित कर किराए पर दी गई थी। लेकिन नगर विकास मंत्री आजम खां ने इस समझौते को भी खत्म करा दिया।
इसके बाद जो आरपी सिंह नगर विकास मंत्री आजम खां के करीबी अफसरों में माने जाते थे, उन्हें भी आखिर यतीमखाना प्रकरण में निलंबित होना पड़ गया। हालांकि इस मुद्दे को लेकर अब जिले के अफसरों ने चुप्पी साध ली है। क्योंकि जो समझौता हुआ था उससे जिले के सभी जिम्मेदार अफसर भी मुतमइन थे। क्योंकि इसके लिखित दस्तावेज जारी हो चुके थे।