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नवरात्र आज से, सज गया माता रानी का दरबार, बाजार-मंदिर गुलजार

Tue, 28 Mar 2017 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर Updated Tue, 28 Mar 2017 12:57 AM IST
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रामपुर मंे ज्वाला नगर में नवरात्र पर सजा कृष्णा मंदिर। अमर उजाला

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चैत्र नवरात्र मंगलवार से शुरू हो रहे हैं। नवरात्र को लेकर जिले भर में मंदिरों से लेकर बाजार तक में भीड़ रही। शहर के प्रमुख मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया तो बाजारों में पूजन सामग्री से लेकर माता के श्रृंगार और फलाहार में प्रयोग होने वाली खाद्य सामग्रियों की जमकर बिक्री की गई। 

चैत्र नवरात्र की मंगलवार से शुरुआत होगी। अगले नौ दिनों तक मां भगवती के शक्ति, प्रेम, ज्ञान, सुख-समृद्धि समेत अन्य रूपों का पूजन-अर्चन किया जाएगा। मंदिरों से लेकर घरों तक में माता की भेंट, जगराते और कीर्तन होंगे। सोमवार को शहर के पुराना गंज स्थित माई का थान मंदिर, हरिहर मंदिर, श्री त्रिपुरेश्वरी शक्ति पीठ, सिविल लाइंस स्थित मां दुर्गा का प्राचीन मंदिर, मनोकामना मंदिर समेत सभी मंदिरों में मां का श्र्ृांगार कर मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया।
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नवरात्र व्रत के लिए आवश्यक पूजन सामग्री खरीदने के लिए भी बाजारों में भीड़ रही। हवन सामग्री, श्र्ृांगार सामग्री, माला, चुनरी, मां की अखंड ज्योत, मां की पोशाक, मूर्तियों, कूटू के आटे, चोया, कपूर, लौंग, नारियल आदि की भी जमकर खरीदारी हुई।कलश स्थापना में रखें विशेष ध्यान ः  नवरात्र पूजन की शुरुआत में पहले दिन कलश स्थापना की जाएगी। कलश स्थापना में शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें। कलश स्थापना से पहले नित्य कर्म और स्नान के बाद मां भगवती का ध्यान करें। इसके बाद पूजन स्थल पर एक पटली या अन्य पाट पर लाल व सफेद वस्त्र बिछाएं। इस पर अक्षत यानि चावल या रोली या हल्दी से अष्टदल कमल का निर्माण कर जल से भरा कलश स्थापित करें। जल में चंदन, पंच पल्लव, दूर्वा, पंचामृत, सुपारी, साबुत हल्दी, कुश डालें। कलश पर रोली से स्वास्तिक चिन्ह बनाकर गले में मौली लपेटंे।
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इसके बाद कलश में शतावरी, जड़ी, हलकुंड, कमल गट्टे, व चांदी का सिक्का रखें। दीप प्रज्ज्वलित कर ईष्ट देव का स्मरण करें। इसके बाद देवी मंत्र जाप कर कलश के सामने गेहूं व जौ को मिट्टी के पात्र में रौपें। पंडित राम भरोसे लाल शर्मा ने बताया कि कलश स्थापना के लिए ब्रहम मुहूर्त व प्रात: काल का समय सबसे अधिक शुभ है। नारियल स्थापित करने का नियम कलश नारियल खड़ा नहीं साधक को सदैव अपनी ओर रखना चाहिए।
 
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