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बिना लाइसेंस के चल रही मीट फैक्ट्री प्रशासन ने सील की
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
Updated Tue, 28 Mar 2017 01:00 AM IST
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रामपुर में मीट फैक्ट्री जमजम में सील लगाते कर्मचारी
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बिना लाइसेंस के चल रही मीट फैक्ट्री को पुलिस व प्रशासनिक अफसरों ने मौका मुआयना करने के बाद सील कर दिया। अफसरों का दावा है कि फैक्ट्री के लाइसेंस की वैधता सितंबर 2016 में ही खत्म हो चुकी थी। इसके बाद से फैक्ट्री में काम हो रहा था। हालांकि फैक्ट्री के पार्टनर ने सील करने की कार्रवाई से इंकार किया है। कहा कि उनके पास सभी जरूरी कागजात हैं।
योगी सरकार आने के बाद गौकशी करने वालों की मुसीबत शुरू हो गई है। सरकार की सख्ती के बाद पुलिस जहां गौकशी करने वालों ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने भी शिकंजा कस दिया है। शासन ने अवैध बूचडखानों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के बाद प्रशासन भी एक्टिव हो गया है। प्रशासन ने सोमवार की शाम को पुलिस बल को साथ लेकर पहाड़ी गेट स्थित जमजम मीट फैक्ट्री पर छापा मार दिया।
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जमजम मीट फैक्ट्री पर नगर मजिस्ट्रेट ओमप्रकाश ने भारी पुलिस बल के संग छापेमारी की। अफसरों ने इस फैक्ट्री का लाइसेंस चेक किया तो वह एक्सपायर हो चुका था, जिसके बाद प्रशासन ने पुलिस की मदद से फैक्ट्री को सील कर दिया। इस फैक्ट्री को सील किए जाने से अवैध रूप पशुओं को काटने वालों में हड़कंप मच गया है।
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कहां काटे जा रहे पशु ः शाहबाद ः शाहबाद में पिछले दिनों में एसडीएम ने बूचड़ खानों पर छापेमारी की थी जिसमे एसडीएम को बूचड़खाने की एक दिवार टूटी पाई गई थी और गंदगी का अंबार मिला था । और आशंका जताई जा रही थी कि इस बूचड़खाने में तो काफी समय से वध नहीं हुए है । अगर इस बूचड़खानों में पाशु वध नहीं हुए है तो आखिर पशुओ का कटान कहां किया जा रहा था अपने आप में एक बड़ा सवाल है। नई सरकार बनते ही मीट पर विराम लगते ही सारी हकीकत सामने आ गई और दूध का दूध और पानी का पानी हो गया । इसके पीछे दलालों और अफसरों की मिलीभगत थी।