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आतंक का पर्याय बना तेंदुआ का जंगल में मिला शव

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 01 May 2022 11:24 PM IST
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Leopard's dead body, synonymous with terror, was found in the forest
आतंक का पर्याय बना तेंदुआ का शव जंगल में मिला
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दावा: लिवर-किडनी की खराबी और भूख से हुई मौत
स्वार (रामपुर)। क्षेत्र के कई गांवों में दहशत का पर्याय बने तेंदुआ क्षेत्र के आरसल-पारसल गांव के जंगल में मृत मिला। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। उसने शव कब्जे में लेकर डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे पीपली वन में दफना दिया।
शनिवार की देर शाम क्षेत्र के आरसल-पारसल गांव स्थित टांडा गोलू निवासी भगविंदर सिंह पुत्र शमशेर सिंह के खेत में ट्यूबवेल के नजदीक तेंदुए का शव पड़ा देखकर किसान सन्न रह गए। हालांकि, पहले तो वह डर गए, लेकिन बाद जब इस बात की तसल्ली हो गई कि वह मृत है, तब उनकी जान में जान आई। ग्रामीणों ने शव मिलने की सूचना वन विभाग को दे दी। कुछ ही देर में वन विभाग के रेंजर मुजाहिद हुसैन और कई दरोगा व वन गार्ड मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तेंदुए का शव कब्जे में लिया और पीपली वन स्थित सालारपुर कार्यालय ले गए। शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए कई चिकित्सकों का पैनल बनाया गया। तेंदुए के शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं पाए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तेंदुए की मौत लिवर और किडनी खराब होने से हुई है। उसकी अतड़ियों में भोजन नहीं पाया गया। वह बीते कुछ समय से पानी पीकर ही जीवित था। बाद में तेंदुए को संरक्षक एवं क्षेत्रीय निदेशक मुरादाबाद सूरज, प्रभागीय वन अधिकारी राजकुमार चांदना, क्षेत्रीय वन अधिकारी मुजाहिद हुसैन समेत एक दर्जन से अधिक वन कर्मियों की मौजूदगी में पीपली वन में दफन कर दिया गया।
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बीते दो माह से आतंक था तेंदुए का
स्वार। उत्तराखंड सीमा से सटे आरसल-पारसल समेत क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में बीते दो माह से तेंदुए का आतंक रहा। वह कई बार जंगल और आबादी के आसपास देखा गया। यही नहीं किसानों के कई पालतू कुत्तों को भी निवाला बना चुका था। हालांकि, क्षेत्रीय जनता की मांग पर वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए पिंजड़ा भी लगाया, लेकिन उसे पकड़ा नहीं जा सका। शनिवार को उसका शव जंगल में पड़ा मिला। माना जाता है कि वह बीमारी के चलते जीर्ण-शीर्ण हो गया था, जिसके चलते उसे कुछ समय से देेखा नहीं जा रहा था।
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