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खिली कलियां सजे तरुवर, सभी मिलकर करें स्वागत, मधुर मधुमास आया है------
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रामपुर। भारतीय काव्यधारा और पल्लव काव्यमंच ने वसंत पंचमी पर काव्य गोष्ठियां कर काव्य पाठ केे जरिए ऋतुराज वसंत का स्वागत किया। देर तक श्रोता वसंत की रचनाओं का आनंद उठाते रहे।
अखिल भारतीय काव्यधारा की और से वर्चुअल काव्य गोष्ठी हुई। जिसमें देश-प्रदेश के रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को प्रभावित किया। वरिष्ठ रचनाकार जितेंद्र कमल आनंद की अध्यक्षता में हुई कवि गोष्ठी की शुरुआत रामपुर से अनमोल रागिनी ने की। उन्होंने कहा-बासंती परिधान पहनकर झूम रही है धरती सारी। मौसम ने बदली है करवट होली की अब चढी़ खुमारी। मुरादाबाद से राजीव प्रखर ने कहा--फिर से गीत कोई अब सुनाओ कोकिला। आस जीने की जगा कर कूक जाओ कोकिला। उत्तराखंड से पुष्पा जोशी प्राकामय ने करता शिशिर प्रस्थान अब,ऋतुराज का शुभ आगमन काव्य रचना प्रस्तुत की।
अमरोहा से शशि त्यागी, लखनऊ से सुरेश कुमार राजवंशी, लखनऊ से सरस्वती प्रसाद यादव, नैनीताल से डॉ. गीता मिश्रा, खटीमा से राम रतन यादव, रामपुर से जितेंद्र कमल आनंद ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. गीता मिश्रा ने आभार व्यक्त किया। आयोजक शैलेंद्र सक्सेना रहे।
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दूसरी ओर पल्लव काव्य मंच की ओर से कवि शिव कुमार चंदन के आवास पर कवि राम सागर शर्मा की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी हुई। माँ शारदे के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन व पुष्प अर्पित कर सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कवि व ग़जलकार ओंकार सिंह विवेक ने कहा---धरती मां का कर दिया, मनमोहक शृंगार, हे ऋतुराज वसंत, बहुत-बहुत आभार। शिव कुमार चंदन ने कहा--शारदे निबार दे तू जग के विविध ताप, ज्ञान ज्योति को प्रकाश। प्रदीप राजपूत माहिर, राम सागर शर्मा और जितेंद्र कुमार नंदा और आशीष पांडे ने भी काव्य पाठ प्रस्तुत किए।
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अखिल भारतीय काव्यधारा की और से वर्चुअल काव्य गोष्ठी हुई। जिसमें देश-प्रदेश के रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को प्रभावित किया। वरिष्ठ रचनाकार जितेंद्र कमल आनंद की अध्यक्षता में हुई कवि गोष्ठी की शुरुआत रामपुर से अनमोल रागिनी ने की। उन्होंने कहा-बासंती परिधान पहनकर झूम रही है धरती सारी। मौसम ने बदली है करवट होली की अब चढी़ खुमारी। मुरादाबाद से राजीव प्रखर ने कहा--फिर से गीत कोई अब सुनाओ कोकिला। आस जीने की जगा कर कूक जाओ कोकिला। उत्तराखंड से पुष्पा जोशी प्राकामय ने करता शिशिर प्रस्थान अब,ऋतुराज का शुभ आगमन काव्य रचना प्रस्तुत की।
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अमरोहा से शशि त्यागी, लखनऊ से सुरेश कुमार राजवंशी, लखनऊ से सरस्वती प्रसाद यादव, नैनीताल से डॉ. गीता मिश्रा, खटीमा से राम रतन यादव, रामपुर से जितेंद्र कमल आनंद ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. गीता मिश्रा ने आभार व्यक्त किया। आयोजक शैलेंद्र सक्सेना रहे।
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दूसरी ओर पल्लव काव्य मंच की ओर से कवि शिव कुमार चंदन के आवास पर कवि राम सागर शर्मा की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी हुई। माँ शारदे के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन व पुष्प अर्पित कर सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कवि व ग़जलकार ओंकार सिंह विवेक ने कहा---धरती मां का कर दिया, मनमोहक शृंगार, हे ऋतुराज वसंत, बहुत-बहुत आभार। शिव कुमार चंदन ने कहा--शारदे निबार दे तू जग के विविध ताप, ज्ञान ज्योति को प्रकाश। प्रदीप राजपूत माहिर, राम सागर शर्मा और जितेंद्र कुमार नंदा और आशीष पांडे ने भी काव्य पाठ प्रस्तुत किए।