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जौहर ट्रस्ट की ओर से नहीं दिया गया साक्ष्य, अब वाद पर होगी बहस
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रामपुर। जौहर ट्रस्ट को 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की छूट देने के मामले से जुड़े वाद में ट्रस्ट की ओर से कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। ट्रस्ट के अधिवक्ता ने दो प्रार्थना पत्र दिए, जिनका सरकारी वकील ने विरोध किया। इसके बाद कोर्ट ने 18 नवंबर की तारीख बहस के लिए तय कर दी है।
सांसद आजम खां की अध्यक्षता वाले मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को सपा की सरकार में 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति कुछ शर्तों के अधीन दी गई थी। अनुमति के बाद ट्रस्ट ने लगभग 160 एकड़ जमीन की खरीद की थी। इस मामले में शिकायत हुई थी कि जमीन खरीद के दौरान निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया। डीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर पीपी तिवारी ने शिकायत की जांच की और आरोप सही पाए थे। इस रिपोर्ट के आधार पर डीएम की कोर्ट में वाद दर्ज किया गया था। डीएम कोर्ट से स्थानांतरित इस वाद की सुनवाई एडीएम (प्रशासन) जेपी गुप्ता की कोर्ट में चल रही है।
सोमवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान ट्रस्ट के अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र के माध्यम से कहा कि ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खां, सचिव डॉ. तजीन फात्मा और एक सदस्य झूठे मुकदमे में सीतापुर की जेल में बंद हैं। ट्रस्ट के उन सदस्यों पर भी झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए हैं, जो साक्ष्य उपलब्ध कराने की स्थिति में हैं। इसलिए एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की जाए, जो सीतापुर की जेल तक जाकर आजम खां, तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम के बयान दर्ज कर साक्ष्य के रूप में कोर्ट में प्रस्तुत करें। एक अन्य प्रार्थना पत्र में ट्रस्ट के अधिवक्ता ने कहा कि जिस शासनादेश के तहत जौहर ट्रस्ट को जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी, उसके बाबत जिला प्रशासन को अपनी रिपोर्ट भी देनी थी। यह रिपोर्ट डीएलआरसी (डिस्ट्रिक्ट लैंड रिकॉर्ड क्लर्क) से मंगाई जाए। ट्रस्ट के अधिवक्ता के दोनों प्रार्थना पत्रों का शासकीय अधिवक्ता ने विरोध किया। कहा कि ट्रस्ट को पक्ष रखने के लिए अंतिम अवसर दिया जा चुका है। अब इन आवेदन पत्रों पर विचार करने का कोई मतलब नहीं है।
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इसके बाद एडीएम प्रशासन की कोर्ट से इस मामले में बहस के लिए 18 नवंबर की तिथि निर्धारित कर दी गई।
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सांसद आजम खां की अध्यक्षता वाले मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को सपा की सरकार में 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति कुछ शर्तों के अधीन दी गई थी। अनुमति के बाद ट्रस्ट ने लगभग 160 एकड़ जमीन की खरीद की थी। इस मामले में शिकायत हुई थी कि जमीन खरीद के दौरान निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया। डीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर पीपी तिवारी ने शिकायत की जांच की और आरोप सही पाए थे। इस रिपोर्ट के आधार पर डीएम की कोर्ट में वाद दर्ज किया गया था। डीएम कोर्ट से स्थानांतरित इस वाद की सुनवाई एडीएम (प्रशासन) जेपी गुप्ता की कोर्ट में चल रही है।
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सोमवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान ट्रस्ट के अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र के माध्यम से कहा कि ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खां, सचिव डॉ. तजीन फात्मा और एक सदस्य झूठे मुकदमे में सीतापुर की जेल में बंद हैं। ट्रस्ट के उन सदस्यों पर भी झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए हैं, जो साक्ष्य उपलब्ध कराने की स्थिति में हैं। इसलिए एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की जाए, जो सीतापुर की जेल तक जाकर आजम खां, तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम के बयान दर्ज कर साक्ष्य के रूप में कोर्ट में प्रस्तुत करें। एक अन्य प्रार्थना पत्र में ट्रस्ट के अधिवक्ता ने कहा कि जिस शासनादेश के तहत जौहर ट्रस्ट को जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी, उसके बाबत जिला प्रशासन को अपनी रिपोर्ट भी देनी थी। यह रिपोर्ट डीएलआरसी (डिस्ट्रिक्ट लैंड रिकॉर्ड क्लर्क) से मंगाई जाए। ट्रस्ट के अधिवक्ता के दोनों प्रार्थना पत्रों का शासकीय अधिवक्ता ने विरोध किया। कहा कि ट्रस्ट को पक्ष रखने के लिए अंतिम अवसर दिया जा चुका है। अब इन आवेदन पत्रों पर विचार करने का कोई मतलब नहीं है।
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इसके बाद एडीएम प्रशासन की कोर्ट से इस मामले में बहस के लिए 18 नवंबर की तिथि निर्धारित कर दी गई।