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जौहर ट्रस्ट की 70.005 हेक्टेयर जमीन पर प्रशासन ने लिया कब्जा
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रामपुर। जौहर ट्रस्ट द्वारा संचालित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 70.005 हेक्टेयर जमीन को राज्य सरकार में निहित करने के एडीएम कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट द्वारा बरकरार रखे जाने के बाद अब प्रशासन ने इस पर कब्जा ले लिया है। इसके लिए तहसीलदार टीम के साथ बृहस्पतिवार को यूनिवर्सिटी पहुंचे, जहां उन्होंने यूनिवर्सिटी में दो गवाहों की गवाही करवाई। अब प्रशासन रिपोर्ट शासन को भेजेगा। शासन से आगे जो भी निर्देश जिला प्रशासन को प्राप्त होंगे, उसी के अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाएगी।
सपा सांसद आजम खां की अध्यक्षता वाले जौहर ट्रस्ट को वर्ष 2005 में सरकार ने जौहर यूनिवर्सिटी के लिए 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी थी। भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के पूर्व क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने जमीन की खरीद के समय तय शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। डीएम के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही बताते हुए डीएम को रिपोर्ट सौंपी थी। इस पर डीएम कोर्ट में इस मामले को वाद के तौर पर दर्ज किया गया, जिसकी सुनवाई एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट में चल रही थी। 16 जनवरी 2021 को एडीएम (प्रशासन) जगदंबा प्रसाद गुप्ता की कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसमें जौहर यूनिवर्सिटी की 12.5 एकड़ जमीन को छोड़कर 70.005 हेक्टेयर जमीन को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया गया था। साथ ही कोर्ट ने जमीन पर कब्जा लेने के लिए एसडीएम सदर को आदेशित किया था, जिसके बाद एसडीएम सदर ने अपने अभिलेखों में जमीन राज्य सरकार में निहित कर दी थी।
जौहर ट्रस्ट की ओर से एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट से आए 16 जनवरी 2021 के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर सुनवाई चल रही थी। छह सितंबर को हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुना दिया। जिसमें जौहर ट्रस्ट की याचिका को खारिज दिया गया था और हाईकोर्ट ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) की कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। लिहाजा, हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजस्व विभाग की ओर से दखलनामे की कार्यवाही शुरू कर दी गई। इसके तहत बृहस्पतिवार को तहसीलदार सदर प्रमोद कुमार टीम के साथ जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचे। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी यूनिवर्सिटी प्रबंधन को दिखाई और दखलनामे पर वाइस चांसलर से हस्ताक्षर करने को कहा, लेकिन वाइस चांसलर ने हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि हम तो नौकर हैं। ऐसे में हम हस्ताक्षर कैसे कर सकते हैं। लिहाजा, तहसीलदार ने यूनिवर्सिटी में ही दो लोगों से गवाही कराकर दखलनामे की कार्यवाही पूर्ण की। प्रशासन के अनुसार अभिलेखों में अब ट्रस्ट की जमीन पर प्रशासन का कब्जा हो गया है। वहीं टीम के जौहर विवि से निकलने के बाद कुछ छात्रों ने विवि गेट पर आकर प्रदर्शन भी किया।
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लिया जायजा, किस जमीन पर कौन सी इमारत बनी
रामपुर। दखल लेने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी पहुंची राजस्व विभाग की टीम ने यह भी जायजा लिया कि किस जमीन पर कौन सी इमारत बनी है। अब ये सभी इमारतें प्रशासन के कब्जे में आ गई हैं।
कोट
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जौहर ट्रस्ट की 70.005 हेक्टेयर जमीन पर दखल लेने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी गए थे। दखलनामे पर दो लोगों की गवाही कराई और उनके हस्ताक्षर ले लिए। इसके साथ ही दखलनामे की कार्यवाही पूरी हो चुकी है। -प्रमोद कुमार, तहसीलदार सदर, रामपुर।
कोट
जौहर ट्रस्ट की जमीन का दखलनामा हो गया है। तहसीलदार सदर ने दो लोगों की गवाही कराई है, जिसके बाद दखलनामे की कार्यवाही पूरी हो चुकी है। अब रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। जिसके बाद शासन के अग्रिम आदेशों के अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।
जगदंबा प्रसाद गुप्ता, अपर जिलाधिकारी प्रशासन
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सपा सांसद आजम खां की अध्यक्षता वाले जौहर ट्रस्ट को वर्ष 2005 में सरकार ने जौहर यूनिवर्सिटी के लिए 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी थी। भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के पूर्व क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने जमीन की खरीद के समय तय शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। डीएम के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही बताते हुए डीएम को रिपोर्ट सौंपी थी। इस पर डीएम कोर्ट में इस मामले को वाद के तौर पर दर्ज किया गया, जिसकी सुनवाई एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट में चल रही थी। 16 जनवरी 2021 को एडीएम (प्रशासन) जगदंबा प्रसाद गुप्ता की कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसमें जौहर यूनिवर्सिटी की 12.5 एकड़ जमीन को छोड़कर 70.005 हेक्टेयर जमीन को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया गया था। साथ ही कोर्ट ने जमीन पर कब्जा लेने के लिए एसडीएम सदर को आदेशित किया था, जिसके बाद एसडीएम सदर ने अपने अभिलेखों में जमीन राज्य सरकार में निहित कर दी थी।
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जौहर ट्रस्ट की ओर से एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट से आए 16 जनवरी 2021 के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर सुनवाई चल रही थी। छह सितंबर को हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुना दिया। जिसमें जौहर ट्रस्ट की याचिका को खारिज दिया गया था और हाईकोर्ट ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) की कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। लिहाजा, हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजस्व विभाग की ओर से दखलनामे की कार्यवाही शुरू कर दी गई। इसके तहत बृहस्पतिवार को तहसीलदार सदर प्रमोद कुमार टीम के साथ जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचे। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी यूनिवर्सिटी प्रबंधन को दिखाई और दखलनामे पर वाइस चांसलर से हस्ताक्षर करने को कहा, लेकिन वाइस चांसलर ने हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि हम तो नौकर हैं। ऐसे में हम हस्ताक्षर कैसे कर सकते हैं। लिहाजा, तहसीलदार ने यूनिवर्सिटी में ही दो लोगों से गवाही कराकर दखलनामे की कार्यवाही पूर्ण की। प्रशासन के अनुसार अभिलेखों में अब ट्रस्ट की जमीन पर प्रशासन का कब्जा हो गया है। वहीं टीम के जौहर विवि से निकलने के बाद कुछ छात्रों ने विवि गेट पर आकर प्रदर्शन भी किया।
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लिया जायजा, किस जमीन पर कौन सी इमारत बनी
रामपुर। दखल लेने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी पहुंची राजस्व विभाग की टीम ने यह भी जायजा लिया कि किस जमीन पर कौन सी इमारत बनी है। अब ये सभी इमारतें प्रशासन के कब्जे में आ गई हैं।
कोट
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जौहर ट्रस्ट की 70.005 हेक्टेयर जमीन पर दखल लेने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी गए थे। दखलनामे पर दो लोगों की गवाही कराई और उनके हस्ताक्षर ले लिए। इसके साथ ही दखलनामे की कार्यवाही पूरी हो चुकी है। -प्रमोद कुमार, तहसीलदार सदर, रामपुर।
कोट
जौहर ट्रस्ट की जमीन का दखलनामा हो गया है। तहसीलदार सदर ने दो लोगों की गवाही कराई है, जिसके बाद दखलनामे की कार्यवाही पूरी हो चुकी है। अब रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। जिसके बाद शासन के अग्रिम आदेशों के अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।
जगदंबा प्रसाद गुप्ता, अपर जिलाधिकारी प्रशासन