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आईटीआई के छात्र की हत्या का खुलासा: पूर्व प्रधान ने अपने भतीजे के साथ मिलकर दिया था घटना को अंजाम
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मिलक। आईटीआई के छात्र ज्ञानेंद्र की हत्या पूर्व प्रधान ने अपने भतीजे से मिलकर की थी। पूर्व प्रधान ने अपने भतीजे से छात्र की दोस्ती को मोहरा बनाया था। उसने कोशिश की थी कि इस हत्याकांड में वर्तमान प्रधान के बेटे का नाम आ जाए, क्योंकि उसका ज्ञानेंद्र के साथ झगड़ा हुआ था। पुलिस की जांच में पूर्व प्रधान और उसे भतीजे के नाम पर सामने आने पर दोनों का नाम एफआईआर में शामिल कर गिरफ्तार कर लिया गया है। एसपी शगुन गौतम ने मिलक में मंगलवार को इस हत्याकांड का खुलासा किया।
कोतवाली क्षेत्र के ऐमी गांव में नौ जून की रात आईआईटी छात्र ज्ञानेंद्र कुमार की बरामदे में सोते हुए गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके पिता ने अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो कई लोग संदेह के घेरे में आए। एसपी शगुन गौतम का दावा है कि पूर्व प्रधान गुलजारी लाल गंगवार ने ही अपने भतीजे धर्मवीर के साथ मिलकर हत्या की थी। करीब 15-20 दिन पहले 92 हजार को लेकर ज्ञानेंद्र के पिता राजेश और पूर्व प्रधान गुलजारी लाल गंगवार से मोबाइल फोन पर तनातनी हो गई थी। घटना से चार दिन पहले पूर्व प्रधान को ज्ञानेंद्र ने अपने घर के सामने से होकर गुजरने पर रोककर अपमानित कर दिया था, जो पूर्व प्रधान को नागवार गुजरा था और वह खुन्नस मानने लगे थे। पुलिस ने माना कि पूर्व प्रधान के भतीजे धर्मवीर की ज्ञानेंद्र की दोस्ती थी और उसी को मोहरा बनाया। ज्ञानेंद्र नौ जून को अकेले बरामदे में चारपाई पर लेटकर मोबाइल देख रहा है। तब पूर्व प्रधान ने अपने भतीजे के साथ मिलकर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। पूर्व प्रधान को पता था कि मौजूदा ग्राम प्रधान सतीश नायक के बेटे का ज्ञानेंद्र के साथ आए दिन झगड़ा रहता है। इसलिए ज्ञानेंद्र की हत्या पर वह फंस सकता है। इसलिए उसका नाम भी उछाला गया था। पुलिस ने चाचा-भतीजे को गिरफ्तार किया है। टीम ने 315 बोर का तमंचा और खाली खोखे बरामद किए हैं। दोनों को रामपुर कोर्ट में पेश किए। जहां से बकौल पुलिस कोर्ट ने चाचा-भतीजे को जेल भेज दिया।
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कोतवाली क्षेत्र के ऐमी गांव में नौ जून की रात आईआईटी छात्र ज्ञानेंद्र कुमार की बरामदे में सोते हुए गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके पिता ने अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो कई लोग संदेह के घेरे में आए। एसपी शगुन गौतम का दावा है कि पूर्व प्रधान गुलजारी लाल गंगवार ने ही अपने भतीजे धर्मवीर के साथ मिलकर हत्या की थी। करीब 15-20 दिन पहले 92 हजार को लेकर ज्ञानेंद्र के पिता राजेश और पूर्व प्रधान गुलजारी लाल गंगवार से मोबाइल फोन पर तनातनी हो गई थी। घटना से चार दिन पहले पूर्व प्रधान को ज्ञानेंद्र ने अपने घर के सामने से होकर गुजरने पर रोककर अपमानित कर दिया था, जो पूर्व प्रधान को नागवार गुजरा था और वह खुन्नस मानने लगे थे। पुलिस ने माना कि पूर्व प्रधान के भतीजे धर्मवीर की ज्ञानेंद्र की दोस्ती थी और उसी को मोहरा बनाया। ज्ञानेंद्र नौ जून को अकेले बरामदे में चारपाई पर लेटकर मोबाइल देख रहा है। तब पूर्व प्रधान ने अपने भतीजे के साथ मिलकर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। पूर्व प्रधान को पता था कि मौजूदा ग्राम प्रधान सतीश नायक के बेटे का ज्ञानेंद्र के साथ आए दिन झगड़ा रहता है। इसलिए ज्ञानेंद्र की हत्या पर वह फंस सकता है। इसलिए उसका नाम भी उछाला गया था। पुलिस ने चाचा-भतीजे को गिरफ्तार किया है। टीम ने 315 बोर का तमंचा और खाली खोखे बरामद किए हैं। दोनों को रामपुर कोर्ट में पेश किए। जहां से बकौल पुलिस कोर्ट ने चाचा-भतीजे को जेल भेज दिया।
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