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कूड़ा निस्तारण प्लांट के निर्माण में सुस्ती, सीएंडडीएस के अफसर नहीं दे रहे ध्यान
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रामपुुर। शहजादनगर में कूड़ा निस्तारण प्लांट का निर्माण बेहद धीमा चल रहा है। मार्च माह में शुरू हुआ यह काम अगस्त माह तक पूरा होना था। लेकिन सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) के अफसरों की सुस्ती के कारण अब तक सिर्फ 20 फीसदी ही काम हो सका है। इसकी वजह ठेकेदार की सुस्ती तो है ही, वहीं विभागीय अफसर भी कम दोषी नहीं हैं। उनकी अनदेखी ही प्लांट के निर्माण में देरी की वजह बनी हुई है। यहां तक कि नगर पालिका की तीन नोटिसों को भी अफसर पी गए। काम जस का तस ही चल रहा है।
प्रदेश सरकार की ओर से शहर को गंदगी से मुक्त कराने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कूड़ा निस्तारण प्लांट को मंजूरी दी थी। शहजादनगर में 25 एकड़ जमीन पर बनने वाले इस प्लांट को पीपीपी मॉडल के आधार पर मैसूर की कंपनी को दे दिया था, लेकिन कंपनी इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं कर सकी थी। इसके बाद यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में पड़ गया। लेकिन एक बार फिर नगर पालिका की ओर से प्रयास किए गए। प्रोजेक्ट की नए सिरे से करीब 17 करोड़ रुपये की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाकर शासन को भेजी गई। शासन ने 15.60 करोड़ रुपये की डीपीआर को मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया हुई। मार्च माह में सीएंडडीएस की ओर से काम शुरू कराया गया। अफसरों का दावा था कि अगस्त 2022 तक प्रोजेक्ट को पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन अब सिर्फ एक माह का समय ही बचा है, किंतु करीब 20 फीसदी ही काम हो सका है। इसके लिए ठेकेदार और सीएंडडीएस के अधिकारी समान रूप से जिम्मेदार हैं। उनकी तरफ से न तो प्रोजेक्ट की सही तरह से मॉनिटरिंग की जा रही है और न ही निर्माण कार्य समय से कराने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यहां तक कि नगर पालिका की ओर से तीन बार नोटिस जारी होने के बाद भी अफसरों ने काम में तेजी लाने के लिए कुछ नहीं किया। ऐसे में यह प्रोजेक्ट जितना लेट होगा, उतनी ही लोगों को दिक्कतें होंगी।
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प्रदेश सरकार की ओर से शहर को गंदगी से मुक्त कराने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कूड़ा निस्तारण प्लांट को मंजूरी दी थी। शहजादनगर में 25 एकड़ जमीन पर बनने वाले इस प्लांट को पीपीपी मॉडल के आधार पर मैसूर की कंपनी को दे दिया था, लेकिन कंपनी इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं कर सकी थी। इसके बाद यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में पड़ गया। लेकिन एक बार फिर नगर पालिका की ओर से प्रयास किए गए। प्रोजेक्ट की नए सिरे से करीब 17 करोड़ रुपये की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाकर शासन को भेजी गई। शासन ने 15.60 करोड़ रुपये की डीपीआर को मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया हुई। मार्च माह में सीएंडडीएस की ओर से काम शुरू कराया गया। अफसरों का दावा था कि अगस्त 2022 तक प्रोजेक्ट को पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन अब सिर्फ एक माह का समय ही बचा है, किंतु करीब 20 फीसदी ही काम हो सका है। इसके लिए ठेकेदार और सीएंडडीएस के अधिकारी समान रूप से जिम्मेदार हैं। उनकी तरफ से न तो प्रोजेक्ट की सही तरह से मॉनिटरिंग की जा रही है और न ही निर्माण कार्य समय से कराने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यहां तक कि नगर पालिका की ओर से तीन बार नोटिस जारी होने के बाद भी अफसरों ने काम में तेजी लाने के लिए कुछ नहीं किया। ऐसे में यह प्रोजेक्ट जितना लेट होगा, उतनी ही लोगों को दिक्कतें होंगी।
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