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शिशु सदन का किया निरीक्षण, सैनिटाइजेशन के दिए निर्देश
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रामपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने वर्चुअल कांफ्रेंस के माध्यम से शिशु सदन का निरीक्षण किया। साथ ही मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के बारे में जानकारी दी।
बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रमेश कुशवाहा ने शिशु सदन में बच्चों के खेलने के स्थान, क्लासरूम, रहने के कमरों आदि का निरीक्षण किया, जिसके बाद उन्होंने प्रभारी रामवती को सैनिटाइजेशन की पूर्ण व्यवस्था के निर्देश दिए। शिशु सदन में इस समय करीब 39 बच्चे हैं।
इस दौरान रमेश कुशवाहा ने कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों को बाल सेवा योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोविड-19 में जो बच्चे अपने माता-पिता को खो चुके हैं, उनके जीवन को संवारने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना चलाई गई है, जिसका उद्देश्य परेशान बच्चों को तत्काल मदद और गलत हाथों में जाने से बचाना है। इस योजना के तहत अनाथ हुए बच्चों के भरण पोषण, शिक्षा, चिकित्सा आदि की व्यवस्थाओं का पूरा ख्याल शासन रखेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जिन बच्चों को लाभान्वित किया जाना है, उनकी श्रेणी तय कर दी गई है। योजना में 18 साल तक के ऐसे बच्चे शामिल किए जाएंगे, जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु कोविड-19 से हो गई है या फिर माता-पिता में से एक की मृत्यु एक मार्च से पहले हो गई थी। साथ ही वर्तमान में जीवित माता या पिता सहित परिवार की आय दो लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक न होने वालों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा जो बच्चे तरह अनाथ हो गए हों और बाल कल्याण समिति के आदेश से विभाग के तहत संचालित बाल्य देखभाल संस्थाओं में आवासित कराए गए हों, उनकी शिक्षा को लेकर भी निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिला बाल संरक्षण इकाई व बाल कल्याण समिति द्वारा चिन्हांकन के 15 दिन के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कराई जाएगी। निर्धारित प्रारूप पूर्ण रूप से भरकर ऑनलाइन तरीके से ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम विकास पंचायत अधिकारी, विकासखंड या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय पर जमा करना होगा। शहरी क्षेत्रों में लेखपाल, तहसील में जमा किए जा सकते है। माता-पिता की मृत्यु से दो वर्ष के भीतर आवेदन तथा अनुमोदन की तिथि से लाभ अनुमन्य होगा।
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बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रमेश कुशवाहा ने शिशु सदन में बच्चों के खेलने के स्थान, क्लासरूम, रहने के कमरों आदि का निरीक्षण किया, जिसके बाद उन्होंने प्रभारी रामवती को सैनिटाइजेशन की पूर्ण व्यवस्था के निर्देश दिए। शिशु सदन में इस समय करीब 39 बच्चे हैं।
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इस दौरान रमेश कुशवाहा ने कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों को बाल सेवा योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोविड-19 में जो बच्चे अपने माता-पिता को खो चुके हैं, उनके जीवन को संवारने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना चलाई गई है, जिसका उद्देश्य परेशान बच्चों को तत्काल मदद और गलत हाथों में जाने से बचाना है। इस योजना के तहत अनाथ हुए बच्चों के भरण पोषण, शिक्षा, चिकित्सा आदि की व्यवस्थाओं का पूरा ख्याल शासन रखेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जिन बच्चों को लाभान्वित किया जाना है, उनकी श्रेणी तय कर दी गई है। योजना में 18 साल तक के ऐसे बच्चे शामिल किए जाएंगे, जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु कोविड-19 से हो गई है या फिर माता-पिता में से एक की मृत्यु एक मार्च से पहले हो गई थी। साथ ही वर्तमान में जीवित माता या पिता सहित परिवार की आय दो लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक न होने वालों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा जो बच्चे तरह अनाथ हो गए हों और बाल कल्याण समिति के आदेश से विभाग के तहत संचालित बाल्य देखभाल संस्थाओं में आवासित कराए गए हों, उनकी शिक्षा को लेकर भी निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिला बाल संरक्षण इकाई व बाल कल्याण समिति द्वारा चिन्हांकन के 15 दिन के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कराई जाएगी। निर्धारित प्रारूप पूर्ण रूप से भरकर ऑनलाइन तरीके से ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम विकास पंचायत अधिकारी, विकासखंड या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय पर जमा करना होगा। शहरी क्षेत्रों में लेखपाल, तहसील में जमा किए जा सकते है। माता-पिता की मृत्यु से दो वर्ष के भीतर आवेदन तथा अनुमोदन की तिथि से लाभ अनुमन्य होगा।
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