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Rampur News: मुलायम गद्दों पर महंगाई ने पसारे पांव, 25 फीसदी बढ़े दाम
Wed, 29 Apr 2026 12:38 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Wed, 29 Apr 2026 12:38 AM IST
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रामपुर। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंचने लगा है। सोने-चांदी, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के बाद अब गद्दों और फोम के बाजार में भी महंगाई ने दस्तक दे दी है। घरों में आरामदायक नींद देने वाले मुलायम गद्दे अब पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगे हो गए हैं। कारोबारियों के अनुसार गद्दों की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत और फोम के दामों में 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके चलते बाजार में बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई है और कारोबार लगभग आधा रह गया है।
कारोबारियों का कहना है कि गद्दा उद्योग मुख्य रूप से पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल पर निर्भर है। इनमें सबसे प्रमुख है पॉलीयूरेथन फोम, जिसकी कमी और महंगाई ने पूरे उद्योग की लागत बढ़ा दी है। इसके अलावा फैब्रिक, धातु, स्प्रिंग, पॉलिस्टर और एडहेसिव जैसे अन्य कच्चे माल के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
नौ हजार रुपये का गद्दा पहुंचा 12 हजार तक
गद्दा विक्रेताओं के अनुसार जो सामान्य डबल बेड गद्दा पहले करीब नौ हजार रुपये में उपलब्ध था, उसकी कीमत अब 11 हजार से 12 हजार रुपये तक पहुंच गई है। वहीं ब्रांडेड कंपनियों के गद्दों की शुरुआती कीमतें, जो पहले 12-13 हजार रुपये थीं, अब बढ़कर 14-15 हजार रुपये हो गई हैं। प्रीमियम श्रेणी के गद्दों में इससे भी अधिक वृद्धि दर्ज की जा रही है।
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पॉलीयूरेथन फोम की कमी बनी बड़ी वजह
व्यापारियों के मुताबिक, गद्दा उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले पॉलीयूरेथन फोम की आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह फोम पेट्रोकेमिकल उत्पादों से तैयार होता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों तथा आपूर्ति संकट का असर सीधे इस पर पड़ता है। लखनऊ के कारोबारी शिवाकांत त्रिपाठी बताते हैं कि फोम के दामों में अचानक उछाल ने पूरे बाजार को प्रभावित किया है।
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सहालग सीजन में भी फीकी रही बिक्री
आमतौर पर विवाह सीजन यानी सहालग के दौरान गद्दा, फर्नीचर और घरेलू सामानों की मांग बढ़ जाती है। लोग नए घरों और शादियों के लिए गद्दे, सोफा और अन्य फर्निशिंग सामग्री खरीदते हैं। व्यापारियों को उम्मीद थी कि इस बार भी सहालग सीजन में कारोबार को सहारा मिलेगा, लेकिन महंगाई ने यह उम्मीद तोड़ दी।
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बोले कारोबारी
इस बार सहालग के बावजूद बाजार में रौनक नहीं आई। ग्राहकों की संख्या कम रही और जो लोग आए, उन्होंने भी सीमित बजट में खरीदारी की। खासकर खुला फोम और फर्नीचर सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले फोम की कीमतें अधिक बढ़ने से मांग प्रभावित हुई है। -सचिन खनेजा
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अनकवर्ड या खुले फोम पर सबसे अधिक असर पड़ा है। यह फोम फर्नीचर, सोफा, कुर्सियों, पैकिंग और अन्य घरेलू वस्तुओं में प्रयोग होता है। पहले इसकी कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर थीं लेकिन अब इसमें 35 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। -डिक्की आनंद
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खुला फोम विभिन्न डेंसिटी और गुणवत्ता में उपलब्ध होता है। इसका उपयोग ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार करवाते हैं। कीमतें बढ़ने के कारण छोटे फर्नीचर निर्माताओं और स्थानीय कारीगरों की लागत भी काफी बढ़ गई है। -विशाल मेहंदीरत्ता
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ग्राहक सस्ते विकल्पों की ओर
महंगाई के कारण ग्राहक अब महंगे ब्रांडेड गद्दों के बजाय स्थानीय और कम कीमत वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। कई ग्राहक पुराने गद्दों की मरम्मत करवा रहे हैं या केवल फोम बदलवाकर काम चला रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि अब ग्राहक पहले कीमत पूछते हैं, फिर तुलना करते हैं और अंत में खरीदारी टाल देते हैं। ईएमआई और ऑफर योजनाओं के बावजूद बिक्री में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा।
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कारोबारियों का कहना है कि गद्दा उद्योग मुख्य रूप से पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल पर निर्भर है। इनमें सबसे प्रमुख है पॉलीयूरेथन फोम, जिसकी कमी और महंगाई ने पूरे उद्योग की लागत बढ़ा दी है। इसके अलावा फैब्रिक, धातु, स्प्रिंग, पॉलिस्टर और एडहेसिव जैसे अन्य कच्चे माल के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
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नौ हजार रुपये का गद्दा पहुंचा 12 हजार तक
गद्दा विक्रेताओं के अनुसार जो सामान्य डबल बेड गद्दा पहले करीब नौ हजार रुपये में उपलब्ध था, उसकी कीमत अब 11 हजार से 12 हजार रुपये तक पहुंच गई है। वहीं ब्रांडेड कंपनियों के गद्दों की शुरुआती कीमतें, जो पहले 12-13 हजार रुपये थीं, अब बढ़कर 14-15 हजार रुपये हो गई हैं। प्रीमियम श्रेणी के गद्दों में इससे भी अधिक वृद्धि दर्ज की जा रही है।
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पॉलीयूरेथन फोम की कमी बनी बड़ी वजह
व्यापारियों के मुताबिक, गद्दा उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले पॉलीयूरेथन फोम की आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह फोम पेट्रोकेमिकल उत्पादों से तैयार होता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों तथा आपूर्ति संकट का असर सीधे इस पर पड़ता है। लखनऊ के कारोबारी शिवाकांत त्रिपाठी बताते हैं कि फोम के दामों में अचानक उछाल ने पूरे बाजार को प्रभावित किया है।
सहालग सीजन में भी फीकी रही बिक्री
आमतौर पर विवाह सीजन यानी सहालग के दौरान गद्दा, फर्नीचर और घरेलू सामानों की मांग बढ़ जाती है। लोग नए घरों और शादियों के लिए गद्दे, सोफा और अन्य फर्निशिंग सामग्री खरीदते हैं। व्यापारियों को उम्मीद थी कि इस बार भी सहालग सीजन में कारोबार को सहारा मिलेगा, लेकिन महंगाई ने यह उम्मीद तोड़ दी।
बोले कारोबारी
इस बार सहालग के बावजूद बाजार में रौनक नहीं आई। ग्राहकों की संख्या कम रही और जो लोग आए, उन्होंने भी सीमित बजट में खरीदारी की। खासकर खुला फोम और फर्नीचर सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले फोम की कीमतें अधिक बढ़ने से मांग प्रभावित हुई है। -सचिन खनेजा
अनकवर्ड या खुले फोम पर सबसे अधिक असर पड़ा है। यह फोम फर्नीचर, सोफा, कुर्सियों, पैकिंग और अन्य घरेलू वस्तुओं में प्रयोग होता है। पहले इसकी कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर थीं लेकिन अब इसमें 35 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। -डिक्की आनंद
खुला फोम विभिन्न डेंसिटी और गुणवत्ता में उपलब्ध होता है। इसका उपयोग ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार करवाते हैं। कीमतें बढ़ने के कारण छोटे फर्नीचर निर्माताओं और स्थानीय कारीगरों की लागत भी काफी बढ़ गई है। -विशाल मेहंदीरत्ता
ग्राहक सस्ते विकल्पों की ओर
महंगाई के कारण ग्राहक अब महंगे ब्रांडेड गद्दों के बजाय स्थानीय और कम कीमत वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। कई ग्राहक पुराने गद्दों की मरम्मत करवा रहे हैं या केवल फोम बदलवाकर काम चला रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि अब ग्राहक पहले कीमत पूछते हैं, फिर तुलना करते हैं और अंत में खरीदारी टाल देते हैं। ईएमआई और ऑफर योजनाओं के बावजूद बिक्री में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा।