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Rampur News: टांडा में छह साल पहले आवंटित खोखे तोड़े, 35 परिवार हुए बेरोजगार

Sun, 28 Jul 2024 12:01 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर Updated Sun, 28 Jul 2024 12:01 AM IST
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In Tanda, kiosks allotted six years ago were demolished, 35 families rendered unemployed.
टांडा (रामपुर)। जिला प्रशासन के आदेश पर नगर पालिका और एसडीएम द्वारा शनिवार को चलाए अभियान के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने छह साल पहले रखे गए 35 खोखों को तोड़कर हटा दिया गया। पालिका ने ही इन खोखों को आवंटित किया था, ऐसे में 35 परिवार बेरोजगार हो गए। दुकानदार अधिकारियों से खोखे को बचाने की गुहार लगाते रहे। वहीं एसडीएम ने नगर पालिका को शहर के सभी अतिक्रमण करने वालों को नोटिस देने और निर्देशों का पालन न करने वालों पर कार्रवाई की बात कही।
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नगर पालिका द्वारा वर्ष 2018 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने 35 खोखों को आवंटन किया गया था। सभी खोखे वालों से जमानत राशि भी वसूल की गई थी। जिसके बाद से लोग खोखों में विभिन्न प्रकार के कार्य करते थे, लेकिन प्रशासन के आदेश के बाद एक अगस्त को नगर पालिका द्वारा खोखा स्वामियों को नोटिस देकर एक सप्ताह के भीतर खोखा हटाने और अपनी जमानत राशि लेने को कहा। नोटिस मिलते ही दुकानदारों में हड़कंप मच गया और उन्होंने पालिकाध्यक्ष साहिबा सरफराज और अधिशासी अधिकारी पुनीत कुमार से खोखे न हटवाने की गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन का आदेश होने के चलते उन्होंने असमर्थता जताई। जिस पर सभी दुकानदार एकत्र होकर अधिकारियों से भी मिले, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शनिवार को एसडीएम अनुराग सिंह, अधिशासी अधिकारी पुनीत कुमार और कोतवाली प्रभारी ओमकार सिंह पूरे दल बल के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और उन्होंने खोखे हटवाने शुरू कर दिए। पहले तो दुकानदारों ने खोखे हटाने का विरोध किया, लेकिन पुलिस द्वारा विरोध करने वालों को कोतवाली ले जाने लगे। जिसके बाद अन्य लोग अधिकारियों के हाथ जोड़ने लगे और इसके स्थान कर दूसरी जगह देने की बात कही। जिस पर ईओ ने कहा कि वो लोग स्टेडियम के पास अपनी दुकान लगा सकते हैं, लेकिन सभी ने इससे इन्कार कर दिया। जिसके बाद प्रशासन के आदेश होने चलते सभी 35 खोखों को ध्वस्त कर दिया गया। खोखे टूट जाने से 200 से अधिक लोगों के सामने रोजगार की समस्या खड़ी हो गई है।
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बोले दुकानदार --
सालों से मैं यहां दुकान लगाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था, लेकिन अब जब दुकान ही नहीं रही तो कैसे अपने परिवार को पालेंगे। इसके अलावा उनका कोई दूसरा कारोबार नहीं था। - महमूद, पीड़ित दुकानदार
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नगर पालिका ने ही दुकान दिलाई थी और उसकी जमानत राशि भी जमा कराई थी। अब नगर पालिका ही हटा रही है। अगर हटाना ही था तो खोखे का आवंटन ही नहीं करना चाहिए था। - मकसूद, पीड़ित दुकानदार

एक पैर से दिव्यांग हूं, परिवार का भरण पोषण इसी दुकान से करता हूं। लेकिन प्रशासन ने दूसरी जगह दिए बिना हमारा रोजगार छीन लिया। अब अपने परिवार का कैसे भरण पोषण करें, ये बताने वाला कोई नहीं है। - मोहम्मद यूनुस, दिव्यांग दुकानदार


हम इस दुकान से अपना परिवार चला रहे थे। अब प्रशासन ने हमारी रोज़ी रोटी ही छीन ली। हम अपना परिवार कैसे पाले। अतिक्रमण के नाम पर प्रशासन द्वारा उत्पीड़न किया जा रहा है। - शंकर पाल, दुकानदार
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