{"_id":"f2effdb4b579c9870058e0fc718b5c6c","slug":"hajrat-hafij-shah-dargah-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार्ज संभालने पहुंचे मुतवल्ली को पुलिस ने रोका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार्ज संभालने पहुंचे मुतवल्ली को पुलिस ने रोका
अमर उजाला ब्यूरो/रामपुर
Updated Sun, 17 Jan 2016 11:19 PM IST
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हजरत हाफिज शाह जमालुल्लाह रहमतुल्ला अलैह की दरगाह के मुतवल्ली का मामला फिर गरमा गया है। रविवार को कारी अली अहमद खां जमाली समर्थकों के साथ मुतवल्ली का चार्ज संभालने दरगाह पहुंचे। पुलिस ने उन्हें रोक लिया। सज्जादानशीं की हिमायत में भी अकीदतमंदों की भीड़ जुट गई।
नोकझोंक के बाद पुलिस ने किसी तरह मामले को शांत कराया। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने 20 नवंबर 2013 को नवाब काजिम अली खां को वक्फ संख्या 13 मजार हाफिज शाह जमालुल्लाह के मुतवल्ली पद से हटाकर उनसे स्थान पर बजोड़ी टोला निवासी कारी अली अहमद खां जमाली को मुतवल्ली नियुक्त कर दिया था।
दरगाह के सज्जादानशीं फरहत अहमद खां जमाली इसके विरोध में आ गए। कई दिन तक ये मामला सुर्खियों में रहा। कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। मुतवल्ली कारी अहमद खां ने कुछ दिन पहले प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर 17 जनवरी को मुतवल्ली का चार्ज संभालने की इत्तला दी था।
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कारी अली अहमद खां जमाली रविवार को कुछ लोगों के साथ मुतवल्ली का चार्ज संभालने दरगाह पहुंचे। ये मामला संवेदनशील है, इसलिए पुलिस पहले से ही दरगाह पर पहुंच गई थी। जैसे ही कारी अली अहमद दरगाह के गेट पर पहुंचे पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पुलिस से उनकी काफी तकरार हुई।
पुलिस का कहना था कि जब तक डीएम के आदेश नहीं मिलेंगे किसी किसी भी तरह की दखलंदाजी नहीं करने दी जाएगी। इतने में सज्जादानशीं फरहत अहमद खां जमाली की हिमायत में अकीदतमंद भी दरगाह पहुंच गए। उन्होंने मुतवल्ली का विरोध किया। सज्जादानशीं भी दरगाह पहुंच गए।
मामला बिगड़ने लगा तो पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा बुझाकर शांत किया। दरगाह के गेट पर पुलिस तैनात कर दी गई है। दरगाह के सज्जादानशी फरहत अहमद खां जमाली ने कहा कि दरगाह के वो पुश्तैनी सज्जादानशीं हैं। करीब 200 साल से उनके खानदान के लोग ही सज्जादानशीं का ओहदा संभालते आ रहे हैं।
वक्फ बोर्ड ने गलत तरीके से अली अहमद को मुतवल्ली बनाया है। करीब 10 साल पहले अली अहमद दरगाह के खादिम थे। बाद में उन्हें निकाल दिया गया था। दरगाह के निजाम में किसी बाहरी शख्स को दखलंदाजी नहीं करने दी जाएगी। दरगाह के मुतबल्ली कारी अली अहमद वक्फ बोर्ड ने उन्हें हाफिज साहब की दरगाह का मुतवल्ली बनाया है।
वो दो साल से ओहदे पर चार्ज संभालने की जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन पुलिस वक्फ बोर्ड के आदेशों पर अमल नहीं करा रही है। वो इस मामले में सोमवार को डीएम से मिलेंगे। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आरपी सिंह ने कहा कि हाफिज साहब की दरगाह पर मुतवल्ली पद को लेकर क्या घटनाक्रम हुआ इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैं शहर के बाहर था। वापस लौटने पर पूरे प्रकरण की जानकारी ली जाएगी। नियम के मुताबिक ही कार्रवाई की जाएगी।
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नोकझोंक के बाद पुलिस ने किसी तरह मामले को शांत कराया। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने 20 नवंबर 2013 को नवाब काजिम अली खां को वक्फ संख्या 13 मजार हाफिज शाह जमालुल्लाह के मुतवल्ली पद से हटाकर उनसे स्थान पर बजोड़ी टोला निवासी कारी अली अहमद खां जमाली को मुतवल्ली नियुक्त कर दिया था।
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दरगाह के सज्जादानशीं फरहत अहमद खां जमाली इसके विरोध में आ गए। कई दिन तक ये मामला सुर्खियों में रहा। कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। मुतवल्ली कारी अहमद खां ने कुछ दिन पहले प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर 17 जनवरी को मुतवल्ली का चार्ज संभालने की इत्तला दी था।
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कारी अली अहमद खां जमाली रविवार को कुछ लोगों के साथ मुतवल्ली का चार्ज संभालने दरगाह पहुंचे। ये मामला संवेदनशील है, इसलिए पुलिस पहले से ही दरगाह पर पहुंच गई थी। जैसे ही कारी अली अहमद दरगाह के गेट पर पहुंचे पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पुलिस से उनकी काफी तकरार हुई।
पुलिस का कहना था कि जब तक डीएम के आदेश नहीं मिलेंगे किसी किसी भी तरह की दखलंदाजी नहीं करने दी जाएगी। इतने में सज्जादानशीं फरहत अहमद खां जमाली की हिमायत में अकीदतमंद भी दरगाह पहुंच गए। उन्होंने मुतवल्ली का विरोध किया। सज्जादानशीं भी दरगाह पहुंच गए।
मामला बिगड़ने लगा तो पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा बुझाकर शांत किया। दरगाह के गेट पर पुलिस तैनात कर दी गई है। दरगाह के सज्जादानशी फरहत अहमद खां जमाली ने कहा कि दरगाह के वो पुश्तैनी सज्जादानशीं हैं। करीब 200 साल से उनके खानदान के लोग ही सज्जादानशीं का ओहदा संभालते आ रहे हैं।
वक्फ बोर्ड ने गलत तरीके से अली अहमद को मुतवल्ली बनाया है। करीब 10 साल पहले अली अहमद दरगाह के खादिम थे। बाद में उन्हें निकाल दिया गया था। दरगाह के निजाम में किसी बाहरी शख्स को दखलंदाजी नहीं करने दी जाएगी। दरगाह के मुतबल्ली कारी अली अहमद वक्फ बोर्ड ने उन्हें हाफिज साहब की दरगाह का मुतवल्ली बनाया है।
वो दो साल से ओहदे पर चार्ज संभालने की जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन पुलिस वक्फ बोर्ड के आदेशों पर अमल नहीं करा रही है। वो इस मामले में सोमवार को डीएम से मिलेंगे। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आरपी सिंह ने कहा कि हाफिज साहब की दरगाह पर मुतवल्ली पद को लेकर क्या घटनाक्रम हुआ इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैं शहर के बाहर था। वापस लौटने पर पूरे प्रकरण की जानकारी ली जाएगी। नियम के मुताबिक ही कार्रवाई की जाएगी।