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जिले में 28 सितंबर तक किया जाएगा फाइलेरिया का सर्वे
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रामपुर। मलेरिया-डेंगू की रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्यों के बीच अब जिले में फाइलेरिया रोगियों को चिह्नित करने के लिए भी सर्वे शुरू हो गया है। सर्वे में भारत सरकार की ओर से एक प्रतिनिधि शामिल हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर साठ टीमें लगाई गई हैं। सर्वे का काम 28 सितंबर तक किया जाएगा।
जिले में कई साल पहले फाइलेरिया के केस सामने आए थे। इसी को आधार मानकर भारत सरकार ने एक बार फिर जिले में फाइलेरिया रोगियों की खोज के लिए सर्वे के निर्देश हैं। जिसमें भारत सरकार की ओर से दो प्रतिनिधि रामपुर पहुंचे और सीएमओ के साथ पूरी कार्ययोजना पर चर्चा की। इसके बाद एक प्रतिनिधि वापस चले गए हैं और एक प्रतिनिधि स्थानीय टीमों के साथ रुककर सर्वे करवा रहे हैं। सीएमओ डॉ. संजीव कुमार यादव ने बताया कि सर्वे के लिए तहसीलवार क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं, जहां पूर्व में फाइलेरिया के केस सामने आ चुके हैं। इन क्षेत्रों में साठ टीमें 28 सितंबर तक सर्वे करेंगी। टीम के पास रैपिड टेस्ट किट है, जिसके माध्यम से फाइलेरिया के लक्षणों की जांच की जाएगी। सीएमओ ने बताया कि अगर इस सर्वे में बीस से अधिक फाइलेरिया रोगी सामने आएंगे तो रामपुर को फाइलेरिया से प्रभावित मानते हुए उपचार व रोकथाम के कार्य किए जाएंगे। यदि बीस केस से कम सामने आते हैं तो रामपुर को फाइलेरिया से मुक्त मानकर उन रोगियों का उपचार किया जाएगा। सर्वे में स्वार, टांडा, बिलासपुर और सैदनगर क्षेत्र को एक यूनिट(इकाई) और शाहबाद, चमरौआ, रजपुरा व रामपुर नगर को दूसरी यूनिट (इकाई) में शामिल किया गया है। जिसमें प्रत्येक यूनिट में 1692 बच्चों के रक्त की जांच कर सर्वे कराया जाएगा। इसके लिए 78 गांवों का चयन किया गया है।
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जिले में कई साल पहले फाइलेरिया के केस सामने आए थे। इसी को आधार मानकर भारत सरकार ने एक बार फिर जिले में फाइलेरिया रोगियों की खोज के लिए सर्वे के निर्देश हैं। जिसमें भारत सरकार की ओर से दो प्रतिनिधि रामपुर पहुंचे और सीएमओ के साथ पूरी कार्ययोजना पर चर्चा की। इसके बाद एक प्रतिनिधि वापस चले गए हैं और एक प्रतिनिधि स्थानीय टीमों के साथ रुककर सर्वे करवा रहे हैं। सीएमओ डॉ. संजीव कुमार यादव ने बताया कि सर्वे के लिए तहसीलवार क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं, जहां पूर्व में फाइलेरिया के केस सामने आ चुके हैं। इन क्षेत्रों में साठ टीमें 28 सितंबर तक सर्वे करेंगी। टीम के पास रैपिड टेस्ट किट है, जिसके माध्यम से फाइलेरिया के लक्षणों की जांच की जाएगी। सीएमओ ने बताया कि अगर इस सर्वे में बीस से अधिक फाइलेरिया रोगी सामने आएंगे तो रामपुर को फाइलेरिया से प्रभावित मानते हुए उपचार व रोकथाम के कार्य किए जाएंगे। यदि बीस केस से कम सामने आते हैं तो रामपुर को फाइलेरिया से मुक्त मानकर उन रोगियों का उपचार किया जाएगा। सर्वे में स्वार, टांडा, बिलासपुर और सैदनगर क्षेत्र को एक यूनिट(इकाई) और शाहबाद, चमरौआ, रजपुरा व रामपुर नगर को दूसरी यूनिट (इकाई) में शामिल किया गया है। जिसमें प्रत्येक यूनिट में 1692 बच्चों के रक्त की जांच कर सर्वे कराया जाएगा। इसके लिए 78 गांवों का चयन किया गया है।
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