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धोखाधड़ी के आरोप में किट्प्लाई के डायरेक्टर के खिलाफ रिपोर्ट
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रामपुर। धोखाधड़ी करने एवं जमीन को खुर्दबुर्द करने के आरोप में किटप्लाई के डायरेक्टर फंस गए हैं। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जेपी गुप्ता के आदेश के बाद लेखपाल ने उनके खिलाफ सिविल लाइंस कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। आरोप है कि किटप्लाई ने अधिकार न होने के बाद भी जून 2003 में दूसरी कंपनी को दो लाख रुपये प्रतिमाह किराए पर जमीन दे दी थी, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई है।
मामला सिविल लाइंस थानाक्षेत्र स्थित अजीतपुर का है। यहां काफी जमीन सरकार की है, जिसके बाद शासन ने 1965 में यह जमीन न्यू बोर्ड मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दे दी थी। लीज डीड के पृष्ठ संख्या पांच पर अंकित शर्त संख्या दो डी के अनुसार कंपनी को किसी अन्य कंपनी को जमीन लीज पर देने का अधिकार नहीं है। किन्तु, इसके बाद न्यू बोर्ड मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने शर्तों का उल्लंघन करते हुए किट्प्लाई कंपनी को लीज स्थानांतरित कर दी। ऐसे में शासन ने 22 अप्रैल 2003 को लीज डीड को निरस्त कर दिया था। हालांकि, 22 मई 2003 को किटप्लाई की ओर से शासन को एक प्रत्यावेदन दिया गया था, जिस पर कोई निर्णय न होने पर किट्प्लाई हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की शरण में चली गई। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कंपनी के प्रत्यावेदन के निस्तारण तक लीज डीडी निरस्तीकरण को लंबित रखने का आदेश दे दिया था।
आरोप है कि इसके बाद किटप्लाई कंपनी ने सरकार की शर्तों को दरकिनार करते हुए 10 जून 2003 को गनपति प्लाई बोर्ड्स प्राइवेट लिमिटेड को दो लाख रुपये प्रतिमाह किराए पर लीज कर दी। अधिकारियों के मुताबिक किटप्लाई लीज करने का कोई अधिकार नहीं रखती थी। इस संबंध में एडीएम के आदेश के बाद लेखपाल सत्येन्द्र प्रकाश शर्मा ने सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी, जिसके बाद पुलिस ने किटप्लाई कंपनी के डायरेक्टर सुशील कुमार शर्मा निवासी एचए-153 सेक्टर 111 साल्ट लेक, कोलकाता दक्षिण पूर्वी प्रभाग, पश्चिम बंगाल के खिलाफ धोखाधड़ी करने एवं सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा दो एवं तीन के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर दुर्गा सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
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मामला सिविल लाइंस थानाक्षेत्र स्थित अजीतपुर का है। यहां काफी जमीन सरकार की है, जिसके बाद शासन ने 1965 में यह जमीन न्यू बोर्ड मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दे दी थी। लीज डीड के पृष्ठ संख्या पांच पर अंकित शर्त संख्या दो डी के अनुसार कंपनी को किसी अन्य कंपनी को जमीन लीज पर देने का अधिकार नहीं है। किन्तु, इसके बाद न्यू बोर्ड मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने शर्तों का उल्लंघन करते हुए किट्प्लाई कंपनी को लीज स्थानांतरित कर दी। ऐसे में शासन ने 22 अप्रैल 2003 को लीज डीड को निरस्त कर दिया था। हालांकि, 22 मई 2003 को किटप्लाई की ओर से शासन को एक प्रत्यावेदन दिया गया था, जिस पर कोई निर्णय न होने पर किट्प्लाई हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की शरण में चली गई। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कंपनी के प्रत्यावेदन के निस्तारण तक लीज डीडी निरस्तीकरण को लंबित रखने का आदेश दे दिया था।
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आरोप है कि इसके बाद किटप्लाई कंपनी ने सरकार की शर्तों को दरकिनार करते हुए 10 जून 2003 को गनपति प्लाई बोर्ड्स प्राइवेट लिमिटेड को दो लाख रुपये प्रतिमाह किराए पर लीज कर दी। अधिकारियों के मुताबिक किटप्लाई लीज करने का कोई अधिकार नहीं रखती थी। इस संबंध में एडीएम के आदेश के बाद लेखपाल सत्येन्द्र प्रकाश शर्मा ने सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी, जिसके बाद पुलिस ने किटप्लाई कंपनी के डायरेक्टर सुशील कुमार शर्मा निवासी एचए-153 सेक्टर 111 साल्ट लेक, कोलकाता दक्षिण पूर्वी प्रभाग, पश्चिम बंगाल के खिलाफ धोखाधड़ी करने एवं सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा दो एवं तीन के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर दुर्गा सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
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