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आसरा आवासों के चयन में भी हुई थी गड़बड़ी
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
Updated Sat, 25 Feb 2017 01:33 AM IST
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अासरा अावास (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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आसरा आवासों के निर्माण में ही मानकों की अनदेखी की जा रही है। लाभार्थियों के आवास में भी गड़बड़ी की गई थी। अधिकारियों की जांच में नालापार में 237 और टांडा में 299 लाभार्थी अपात्र मिले थे। कर्मचारियों ने अभिलेखों में बिल्डिंग वालों को भी गरीब दर्शाकर आवासों का हकदार बना दिया था।
आसरा आवास योजना गरीब और बेघर लोगों के लिए है। यह योजना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में है। लेकिन, सरकारी अमला योजना पर पलीता लगा रहा है। पहले लाभार्थियों के चयन में गड़बड़ी की गई और अब आवासों के निर्माण में धांधली की जा रही है।
2015-16 में शहर के मुहल्ला नालापार में 268 और टांडा में 497 आवास बनवाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, लाभार्थियों के चयन में मानकों की अनदेखी की गई। तत्कालीन डीएम ने नालापार और टांडा की जांच कराई तो संबंधित अधिकारियों की करतूत सामने आ गई। टांडा में 497 में 299 लाभार्थी अपात्र मिले थे।
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जबकि शहर के मोहल्ला नालापार में 237 लाभार्थी अपात्र पाए गए थे। अधिकतर लाभार्थी ऊंची -ऊंची बिल्डिंग और पक्के मकानों में रह रहे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति भी काफी अच्छी है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने पैसे के लालच में उन्हें गरीब दर्शाकर आसरा आवास का हकदार बना दिया था। हालांकि बाद में अपात्रों का चयन निरस्त कर दिया गया था।
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आसरा आवास योजना गरीब और बेघर लोगों के लिए है। यह योजना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में है। लेकिन, सरकारी अमला योजना पर पलीता लगा रहा है। पहले लाभार्थियों के चयन में गड़बड़ी की गई और अब आवासों के निर्माण में धांधली की जा रही है।
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2015-16 में शहर के मुहल्ला नालापार में 268 और टांडा में 497 आवास बनवाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, लाभार्थियों के चयन में मानकों की अनदेखी की गई। तत्कालीन डीएम ने नालापार और टांडा की जांच कराई तो संबंधित अधिकारियों की करतूत सामने आ गई। टांडा में 497 में 299 लाभार्थी अपात्र मिले थे।
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जबकि शहर के मोहल्ला नालापार में 237 लाभार्थी अपात्र पाए गए थे। अधिकतर लाभार्थी ऊंची -ऊंची बिल्डिंग और पक्के मकानों में रह रहे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति भी काफी अच्छी है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने पैसे के लालच में उन्हें गरीब दर्शाकर आसरा आवास का हकदार बना दिया था। हालांकि बाद में अपात्रों का चयन निरस्त कर दिया गया था।