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सिस्टम की लापरवाही से फर्जी प्रवेश पत्र पर आधी से अधिक परीक्षा में शामिल हो गई हमनाम छात्रा
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रामपुर। शिक्षा माफिया के आगे सिस्टम बौना साबित हो गया। कई जगह चेकिंग के दावों के बावजूद एक छात्रा की जगह दूसरी छात्रा हाईस्कूल की परीक्षा देती रही। लेकिन, चेकिंग के नाम पर शायद सिर्फ औपचारिकता निभाई गई। जिसके चलते छात्रा की जगह दूसरी छात्रा ने आधे से अधिक परीक्षा दे दी।
सैफनी थाना क्षेत्र के छितौनी गांव स्थित अब्दुल वहीद मुस्लिम इंटर कालेज में शनिवार को पहली पाली में हाईस्कूल सामाजिक विज्ञान की परीक्षा में छात्रा की जगह दूसरी छात्रा को परीक्षा देते हुए पकड़ा गया था। अधिकारियों ने यह कार्रवाई लखनऊ कंट्रोल से मैसेज आने के बाद की गई थी जबकि, स्थानीय स्तर पर परीक्षार्थियों की चेकिंग और पहचान को सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा केंद्र में प्रवेश से लेकर तमाम स्तर पर जांच होती है। लेकिन, ये सब जांच शायद उतनी गंभीरता से नहीं की गईं या फिर जांच के नाम पर खानापूर्ति महज खानापूर्ति की गई।
क्योंकि यूपी बोर्ड की ओर से प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर गेट पर ही परीक्षार्थी की सघन तलाशी लेने के निर्देश हैं। प्रत्येक परीक्षार्थी का प्रवेशपत्र चेक करने के बाद ही उसे परीक्षा कक्ष के अंदर जाने की अनुमति है। परीक्षा कक्ष के अंदर भी कक्ष निरीक्षक उत्तर पुस्तिका पर हस्ताक्षर करता है। इससे पहले वह परीक्षार्थी का प्रवेशपत्र देखता है। परीक्षा के दौरान केंद्र व्यवस्थापक और बाह्य केंद्र व्यवस्थापक की तैनाती की गई है। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट भी तैनात है। साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक के निर्देशन में आधा दर्जन सचल दल भी बनाए गए हैं। सीसीटीवी कैमरों और वॉयस रिकार्डर से जिला और प्रदेश स्तर पर परीक्षा की ऑनलाइन निगरानी भी हो रही है। इसके बावजूद भी धुंधले फोटो वाले फर्जी प्रवेशपत्र से एक छात्रा अपनी नाम की छात्रा के नाम पर यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षा देती रही और किसी की पकड़ में नहीं आई। ये सिस्टम की नाकामी नहीं तो और क्या है, अगर लखनऊ कंट्रोल रूम शिकायत न होती तो शायद छात्रा दूसरी छात्रा के स्थान पर पूरी परीक्षा दे देती और रिजल्ट भी आ जाता लेकिन, इस खेल का पर्दाफाश नहीं हो पाता।
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सैफनी थाना क्षेत्र के छितौनी गांव स्थित अब्दुल वहीद मुस्लिम इंटर कालेज में शनिवार को पहली पाली में हाईस्कूल सामाजिक विज्ञान की परीक्षा में छात्रा की जगह दूसरी छात्रा को परीक्षा देते हुए पकड़ा गया था। अधिकारियों ने यह कार्रवाई लखनऊ कंट्रोल से मैसेज आने के बाद की गई थी जबकि, स्थानीय स्तर पर परीक्षार्थियों की चेकिंग और पहचान को सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा केंद्र में प्रवेश से लेकर तमाम स्तर पर जांच होती है। लेकिन, ये सब जांच शायद उतनी गंभीरता से नहीं की गईं या फिर जांच के नाम पर खानापूर्ति महज खानापूर्ति की गई।
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क्योंकि यूपी बोर्ड की ओर से प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर गेट पर ही परीक्षार्थी की सघन तलाशी लेने के निर्देश हैं। प्रत्येक परीक्षार्थी का प्रवेशपत्र चेक करने के बाद ही उसे परीक्षा कक्ष के अंदर जाने की अनुमति है। परीक्षा कक्ष के अंदर भी कक्ष निरीक्षक उत्तर पुस्तिका पर हस्ताक्षर करता है। इससे पहले वह परीक्षार्थी का प्रवेशपत्र देखता है। परीक्षा के दौरान केंद्र व्यवस्थापक और बाह्य केंद्र व्यवस्थापक की तैनाती की गई है। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट भी तैनात है। साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक के निर्देशन में आधा दर्जन सचल दल भी बनाए गए हैं। सीसीटीवी कैमरों और वॉयस रिकार्डर से जिला और प्रदेश स्तर पर परीक्षा की ऑनलाइन निगरानी भी हो रही है। इसके बावजूद भी धुंधले फोटो वाले फर्जी प्रवेशपत्र से एक छात्रा अपनी नाम की छात्रा के नाम पर यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षा देती रही और किसी की पकड़ में नहीं आई। ये सिस्टम की नाकामी नहीं तो और क्या है, अगर लखनऊ कंट्रोल रूम शिकायत न होती तो शायद छात्रा दूसरी छात्रा के स्थान पर पूरी परीक्षा दे देती और रिजल्ट भी आ जाता लेकिन, इस खेल का पर्दाफाश नहीं हो पाता।
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