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Rampur News: पीपली वन में अवैध कटान और तस्करी की उच्च स्तरीय जांच की मांग

Mon, 02 Mar 2026 01:42 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर Updated Mon, 02 Mar 2026 01:42 AM IST
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Demand for high-level inquiry into illegal felling and smuggling in Peepli forest
स्वार। पीपली वन क्षेत्र में खैर के पेड़ों के कटान और तस्करी के मामले में अंतरराज्यीय गिरोह की सक्रियता सामने आ चुकी है, लेकिन वन कर्मियों की भूमिका पर उच्च अधिकारियों की कार्रवाई केवल रेंजर के निलंबन तक समेट दी गई है। पीपली वन में तस्करों के मददगार वनकर्मी और विभाग के कई बड़े अफसर फिलहाल बचते नजर आ रहे हैं। कार्रवाई की खानापूरी को लेकर वन एवं पर्यावरण प्रेमी संतुष्ट नहीं हैं। पीपली वन बचाओ एक्शन कमेटी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की एसआईटी गठित कर उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है।
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पीपली वन केंद्र संरक्षित वन है। लगभग पांच हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र अवैध कटान के चलते सिकुड़ता जा रहा है। तस्करों ने आर्यनगर और अंबरपुर बीट में डटकर कटान किया है, जिसके चलते यहां मैदान नजर आने लगा है।
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पंजाब से बरामद लगभग साढ़े चार सौ कुंतल खैर की लकड़ी इन्हीं बीटों से काटना बताई गई है। तस्करों को कथित तौर पर पैसा लेकर छोड़ने की तो तत्काल जांच हुई और रेंजर ठाकुर विजय सिंह का निलंबन हो गया, लेकिन कटान बीट के प्रभारियों के अलावा अन्य अधिकारियों की भूमिका की कोई जांच अभी नहीं हो पाई है।
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पीपली वन बचाओ एक्शन कमेटी के अध्यक्ष अहमद जान ने पीपलीवन क्षेत्र में अवैध लकड़ी कटान प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में कहा है कि जब पंजाब में छापा मारने गई टीम में करीब एक दर्जन अधिकारी एवं वनकर्मी शामिल थे, तब तस्करों को छोड़ने की जिम्मेदारी अकेले रेंजर की कैसे हुई? इतनी भारी तादाद में लकड़ी पीपली वन से काटकर पंजाब ले जाई गई, संबंधित बीट प्रभारियों के खिलाफ जांच कर तत्काल कार्रवाई भी नहीं की गई है।

एक्शन कमेटी के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से उच्च स्तरीय जांच के लिए एसआईटी का गठन करने पर जोर दिया ताकि दोषी बच न सकें और पीपली वन एवं पर्यावरण को बचाया जा सके। कहा कि स्थानीय अधिकारियों की जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
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