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मिली क्लीन चिट, बहाल होगी शिक्षिका
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Sat, 19 Sep 2015 11:58 PM IST
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पाकिस्तानी होने के आरोप से घिरी शिक्षिका के प्रति बेसिक शिक्षा विभाग ने भी सहानुभूति जताई है। उस शिक्षिका को अब जल्द ही बहाल करने की तैयारी की जा रही है। क्योंकि उक्त शिक्षिका के पाक नागरिक होने का कोई भी सुबूत नहीं मिला है।
फिलहाल दो सदस्यीय टीम ने शिक्षिका को क्लीन चिट देते हुए बहाल करने की सिफारिश कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद बीएसए ने उक्त शिक्षिका को जवाब के साथ तलब किया है। सैदनगर क्षेत्र के कुम्हरिया में सहायक अध्यापिका के तौर पर तैनात शिक्षिका फरजाना उर्फ माहिरा अख्तर पर पाकिस्तानी नागरिक होने का ठप्पा लगा था।
ये मामला शासन स्तर पर लंबित है। प्रमुख सचिव गृह की देखरेख में इस मामले की सुनवाई चल रही है। दरअसल माहिरा यूं तो मूल रूप से रामपुर की ही रहने वाली हैं, लेकिन उनका निकाह पाकिस्तान में हुआ था। करीब दो साल पाकिस्तान में रहने के बाद उनका पति से विवाद हुआ और तलाक के बाद वापस रामपुर आ गईं।
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बताया जाता है कि भारत वापस पाकिस्तान के पासपोर्ट पर आई थी। तय अवधि में जब वह वापस पाकिस्तान नहीं लौटी तो खुफिया विभाग में भी खलबली मच गई थी। सालों बाद यह मामला कुछ समय पहले उस वक्त सुर्खियों में आया जब गृहमंत्रालय के आदेश पर प्रमुख सचिव ने मामले की सुनवाई शुरू की।
तब भी माहिरा की ओर से अपना पक्ष रखा गया था। इस बीच शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षिका पद पर तैनात माहिरा को तथ्य छुपाकर नौकरी करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया था। बीएसए ने इस मामले की दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी।
इसमें स्वार के खंड शिक्षाधिकारी सद्दीक अहमद एवं चमरौवा के खंड शिक्षाधिकारी पुष्पेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से जांच की। करीब दो माह तक चली पड़ताल के दौरान शिक्षिका को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया, जिसमें पाकिस्तानी होने का कोई सुबूत सामने नहीं आया। शिक्षिका का कहना था कि उसके पास पाकिस्तान की नागरिकता नहीं है।
वो भारतीय है और उसका जन्म यहां हुआ है, उसकी पढ़ाई-लिखाई यहां पर हुई है। निकाह के बाद वह पाकिस्तान गई जरूर, लेकिन दो साल बाद ही वह वापस आ गई। इसके बाद उसने यहां दूसरा निकाह कर लिया। यहीं पर उसने उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद ट्रेनिंग की और फिर नौकरी की शुरुआत।
जांच कमेटी के सदस्य शिक्षिका के इस बयान से सहमत नजर आ रहे हैं। खंड शिक्षाधिकारी सद्दीक अहमद ने बताया कि शिक्षिका ने जो भी तथ्य उनके सामने रखे हैं उससे कहीं भी यह साफ नहीं होता कि वो पाकिस्तानी नागरिक है। उसने किसी भी तरह का कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया है। कमेटी ने शिक्षिका को बहाल करने की सिफारिश की है। बताया जाता है कि बीएसए ने इस मामले में शिक्षिका को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है।
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फिलहाल दो सदस्यीय टीम ने शिक्षिका को क्लीन चिट देते हुए बहाल करने की सिफारिश कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद बीएसए ने उक्त शिक्षिका को जवाब के साथ तलब किया है। सैदनगर क्षेत्र के कुम्हरिया में सहायक अध्यापिका के तौर पर तैनात शिक्षिका फरजाना उर्फ माहिरा अख्तर पर पाकिस्तानी नागरिक होने का ठप्पा लगा था।
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ये मामला शासन स्तर पर लंबित है। प्रमुख सचिव गृह की देखरेख में इस मामले की सुनवाई चल रही है। दरअसल माहिरा यूं तो मूल रूप से रामपुर की ही रहने वाली हैं, लेकिन उनका निकाह पाकिस्तान में हुआ था। करीब दो साल पाकिस्तान में रहने के बाद उनका पति से विवाद हुआ और तलाक के बाद वापस रामपुर आ गईं।
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बताया जाता है कि भारत वापस पाकिस्तान के पासपोर्ट पर आई थी। तय अवधि में जब वह वापस पाकिस्तान नहीं लौटी तो खुफिया विभाग में भी खलबली मच गई थी। सालों बाद यह मामला कुछ समय पहले उस वक्त सुर्खियों में आया जब गृहमंत्रालय के आदेश पर प्रमुख सचिव ने मामले की सुनवाई शुरू की।
तब भी माहिरा की ओर से अपना पक्ष रखा गया था। इस बीच शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षिका पद पर तैनात माहिरा को तथ्य छुपाकर नौकरी करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया था। बीएसए ने इस मामले की दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी।
इसमें स्वार के खंड शिक्षाधिकारी सद्दीक अहमद एवं चमरौवा के खंड शिक्षाधिकारी पुष्पेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से जांच की। करीब दो माह तक चली पड़ताल के दौरान शिक्षिका को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया, जिसमें पाकिस्तानी होने का कोई सुबूत सामने नहीं आया। शिक्षिका का कहना था कि उसके पास पाकिस्तान की नागरिकता नहीं है।
वो भारतीय है और उसका जन्म यहां हुआ है, उसकी पढ़ाई-लिखाई यहां पर हुई है। निकाह के बाद वह पाकिस्तान गई जरूर, लेकिन दो साल बाद ही वह वापस आ गई। इसके बाद उसने यहां दूसरा निकाह कर लिया। यहीं पर उसने उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद ट्रेनिंग की और फिर नौकरी की शुरुआत।
जांच कमेटी के सदस्य शिक्षिका के इस बयान से सहमत नजर आ रहे हैं। खंड शिक्षाधिकारी सद्दीक अहमद ने बताया कि शिक्षिका ने जो भी तथ्य उनके सामने रखे हैं उससे कहीं भी यह साफ नहीं होता कि वो पाकिस्तानी नागरिक है। उसने किसी भी तरह का कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया है। कमेटी ने शिक्षिका को बहाल करने की सिफारिश की है। बताया जाता है कि बीएसए ने इस मामले में शिक्षिका को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है।