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दरोगा और सिपाहियों के साथ मारपीट करने में सभी आरोपी बरी
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रामपुर। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में मई 2017 में पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट व लूट के एक मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपियों को बरी कर दिया है।
मामला सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र की अजीतपुर चौकी के मिलक चिकना गांव का है। 7 मई 2017 की रात सिविल लाइंस कोतवाली के दारोगा सुभाष चंद्र, सिपाही त्रिलोक सिंह, सुरजीत सिंह और नीरज गांव में ही हुए एक झगड़े की जांच के लिए गए थे। आरोप था कि आरोपितों के हाथ न आने पर पुलिस ने उनके एक रिश्तेदार को पकड़ लिया था। इस पर परिजनों ने विरोध किया। पुलिस ने सख्ती की तो गांव के लोग इकट्ठा हो गए और लाइसेंसी असलहे लेकर आ गए। आरोप था कि ग्रामीणों ने पुलिस को घेरकर मारपीट की और हिरासत में लिए गए युवक को छुड़ा लिया। इस दौरान आरोपियों ने सिपाही त्रिलोकी की रायफल छीनकर तोड़ दी और दूसरे सिपाही की रायफल की मैग्जीन जिसमें दस कारतूस थे वह भी छीन ली। ग्रामीणों की संख्या अधिक होने पर पुलिस कर्मियों को भागना पड़ा। लेकिन ग्रामीणों ने दारोगा को पकड़ लिया था। दारोगा ने वायरलैस से सूचना देना चाही तो ग्रामीणों ने वायरलैस छीनकर फेंक दिया था। भाग रहे पुलिस कर्मियों पर ग्रामीणों ने फायरिंग भी की थी। सिपाहियों ने थाने पहुंचकर घटना की जानकारी दी, जिस पर पुलिस फोर्स गांव पहुंची और दारोगा को ग्रामीणों कब्जे से छुड़ाया। दारोगा की तहरीर पर सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस ने 18 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर किया था। मुकदमे में 17 नामजद थे। इनमें राकेश, रघुवीर सिंह, जगत सिंह, अमर सिंह, रवि, भारत सिंह, मुनेश, ताहर, अमित, मुलायम, बृजेश, सोराज, संदीप, सुरेंद्र, मोहर सिंह, राजेंद्र सिंह और भोपाल सिंह शामिल थे। विवेचना में पुलिस ने जगत और बृजेश का नाम निकाल दिया था। बाकी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। एक आरोपित अमित के नाबालिग होने पर उसकी पत्रावली किशोर न्यायालय में चली गई। अन्य 14 के खिलाफ अदालत में मुकदमा चला। कोर्ट में पुलिस व अभियोजन पक्ष पुलिस द्वारा ग्रामीणों पर लगाए आरोप साबित नहीं हो सके। कोर्ट में पेश किए गए गवाह आरोपियों की शिनाख्त नहीं कर सके। जिस पर अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता प्रताप सिंह मौर्य ने बताया कि पेश किए गए गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर सके, जिस कारण आरोपियेें को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया है।
मामला सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र की अजीतपुर चौकी के मिलक चिकना गांव का है। 7 मई 2017 की रात सिविल लाइंस कोतवाली के दारोगा सुभाष चंद्र, सिपाही त्रिलोक सिंह, सुरजीत सिंह और नीरज गांव में ही हुए एक झगड़े की जांच के लिए गए थे। आरोप था कि आरोपितों के हाथ न आने पर पुलिस ने उनके एक रिश्तेदार को पकड़ लिया था। इस पर परिजनों ने विरोध किया। पुलिस ने सख्ती की तो गांव के लोग इकट्ठा हो गए और लाइसेंसी असलहे लेकर आ गए। आरोप था कि ग्रामीणों ने पुलिस को घेरकर मारपीट की और हिरासत में लिए गए युवक को छुड़ा लिया। इस दौरान आरोपियों ने सिपाही त्रिलोकी की रायफल छीनकर तोड़ दी और दूसरे सिपाही की रायफल की मैग्जीन जिसमें दस कारतूस थे वह भी छीन ली। ग्रामीणों की संख्या अधिक होने पर पुलिस कर्मियों को भागना पड़ा। लेकिन ग्रामीणों ने दारोगा को पकड़ लिया था। दारोगा ने वायरलैस से सूचना देना चाही तो ग्रामीणों ने वायरलैस छीनकर फेंक दिया था। भाग रहे पुलिस कर्मियों पर ग्रामीणों ने फायरिंग भी की थी। सिपाहियों ने थाने पहुंचकर घटना की जानकारी दी, जिस पर पुलिस फोर्स गांव पहुंची और दारोगा को ग्रामीणों कब्जे से छुड़ाया। दारोगा की तहरीर पर सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस ने 18 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर किया था। मुकदमे में 17 नामजद थे। इनमें राकेश, रघुवीर सिंह, जगत सिंह, अमर सिंह, रवि, भारत सिंह, मुनेश, ताहर, अमित, मुलायम, बृजेश, सोराज, संदीप, सुरेंद्र, मोहर सिंह, राजेंद्र सिंह और भोपाल सिंह शामिल थे। विवेचना में पुलिस ने जगत और बृजेश का नाम निकाल दिया था। बाकी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। एक आरोपित अमित के नाबालिग होने पर उसकी पत्रावली किशोर न्यायालय में चली गई। अन्य 14 के खिलाफ अदालत में मुकदमा चला। कोर्ट में पुलिस व अभियोजन पक्ष पुलिस द्वारा ग्रामीणों पर लगाए आरोप साबित नहीं हो सके। कोर्ट में पेश किए गए गवाह आरोपियों की शिनाख्त नहीं कर सके। जिस पर अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता प्रताप सिंह मौर्य ने बताया कि पेश किए गए गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर सके, जिस कारण आरोपियेें को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया है।
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