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‘इंद्रियों पर नियंत्रण करना ही उत्तम संयम धर्म’
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Wed, 23 Sep 2015 11:51 PM IST
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कल्याणकारी पर्यूषण महोत्सव के छठे दिन उत्तम संयम धर्म को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। महोत्सव में प्रात: काल में प्रक्षाल पूजन और अन्य पूजन के साथ शाम को सामूहिक आरती और शास्त्र प्रवचन हुआ। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
फूटा महल स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में छठे दिन प्रात: काल में प्रक्षाल एवं पूजन से शुरुआत की गई। इसमें श्रद्घालुओं ने भगवान का अभिषेक किया और शांतिधरा की गई। शांतिधारा वैभव जैन ने दी। कार्यक्रम में आगे दशलक्षण पूजा और अन्य पूजा कर तत्वार्थ सूत्र वाचन सुनीता जैन शास्त्री जी द्वारा किया गया।
इसके बाद शाम चार बजे से सुगंध दशमी में पूजन एवं धूपदशमी कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान सुगंध दशमी कथा सुनाकर इसके महत्व को बताया गया। रात में सामूहिक आरती, लकी ड्रॉ, शास्त्र प्रवचन, अतीत का स्मरण व प्रवचन आधारित प्रश्नोत्तर और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
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बुधवार को संचालन जोड़ी नितिन जैन व नेहा जैन रहे जबकि, दीप प्रज्ज्वलन जोड़ी जेके जैन व सरला जैन रहे। मंगलाचरण पावनी जैन द्वारा किया गया और भजन अंजना जैन द्वारा प्रस्तुत किए गए। इसके बाद अतिश्य क्षेत्र पर प्रियंका जैन ने विचार रखे। कार्यक्रम आयोजक डा. शीनू जैन और प्रायोजक ज्ञान शांति परमार्थ न्यास रहे।
इस दौरान अध्यक्ष अशोक कुमार जैन, संयोजक पर्यूषण महोत्सव विशाल जैन, अनुराग जैन, देवेंद्र कुमार जैन, आशीष जैन, नितेश खंडेलवाल, प्रमोद कुमार जैन, अक्षय जैन, श्रेयांश जैन, रमेश जैन, भारत भूषण जैन, शिखर चंद जैन, नरेंद्र कुमार जैन, पंडित होतीलाल जैन, अंजू जैन, चंद्र प्रभा जैन, प्रीति जैन खंडेलवाल, पंखुरी जैन रहे।
वहीं दूसरी ओर सिविल लाइंस स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पर्यूषण पर्व में भी प्रात: काल में शांतिधरा और प्रक्षाल आदि पूजन किए गए। शाम को आरती के साथ ही मथुरा चौरासी से आए पंडित शशांक शास्त्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि मनुष्य को संयम धर्म का पालन करना चाहिए।
इंद्रियों को नियंत्रण करने वाला व्यक्ति कभी क्रोध नहीं करता। इससे वह दस धर्मों को आसानी से जीवन में उतार सकता है। इसके बाद महिला समिति द्वारा हैप्पी पर्यूषण पर्व कार्यक्रम का आयोजन सरला जैन की अध्यक्षता में किया गया। धूपदशमी में दोपहर तीन बजे मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। इसमें शीतलनाथ भगवान की पूजा कर धूप आहुति दी गईं।
इस दौरान संजय जैन, डा. शालू जैन, साधना, डा. शीनू जैन, पूनम, सुधा, दिनेश जैन, वंदना, मोनिका, हरीश, सर्वेश, रमेश सेठी, जुगल किशोर, ज्ञानेंद्र कुमार, सुनील जैन, विजय दिवाकर, धमेंद्र सेठी, आदि रहे।
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फूटा महल स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में छठे दिन प्रात: काल में प्रक्षाल एवं पूजन से शुरुआत की गई। इसमें श्रद्घालुओं ने भगवान का अभिषेक किया और शांतिधरा की गई। शांतिधारा वैभव जैन ने दी। कार्यक्रम में आगे दशलक्षण पूजा और अन्य पूजा कर तत्वार्थ सूत्र वाचन सुनीता जैन शास्त्री जी द्वारा किया गया।
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इसके बाद शाम चार बजे से सुगंध दशमी में पूजन एवं धूपदशमी कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान सुगंध दशमी कथा सुनाकर इसके महत्व को बताया गया। रात में सामूहिक आरती, लकी ड्रॉ, शास्त्र प्रवचन, अतीत का स्मरण व प्रवचन आधारित प्रश्नोत्तर और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
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बुधवार को संचालन जोड़ी नितिन जैन व नेहा जैन रहे जबकि, दीप प्रज्ज्वलन जोड़ी जेके जैन व सरला जैन रहे। मंगलाचरण पावनी जैन द्वारा किया गया और भजन अंजना जैन द्वारा प्रस्तुत किए गए। इसके बाद अतिश्य क्षेत्र पर प्रियंका जैन ने विचार रखे। कार्यक्रम आयोजक डा. शीनू जैन और प्रायोजक ज्ञान शांति परमार्थ न्यास रहे।
इस दौरान अध्यक्ष अशोक कुमार जैन, संयोजक पर्यूषण महोत्सव विशाल जैन, अनुराग जैन, देवेंद्र कुमार जैन, आशीष जैन, नितेश खंडेलवाल, प्रमोद कुमार जैन, अक्षय जैन, श्रेयांश जैन, रमेश जैन, भारत भूषण जैन, शिखर चंद जैन, नरेंद्र कुमार जैन, पंडित होतीलाल जैन, अंजू जैन, चंद्र प्रभा जैन, प्रीति जैन खंडेलवाल, पंखुरी जैन रहे।
वहीं दूसरी ओर सिविल लाइंस स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पर्यूषण पर्व में भी प्रात: काल में शांतिधरा और प्रक्षाल आदि पूजन किए गए। शाम को आरती के साथ ही मथुरा चौरासी से आए पंडित शशांक शास्त्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि मनुष्य को संयम धर्म का पालन करना चाहिए।
इंद्रियों को नियंत्रण करने वाला व्यक्ति कभी क्रोध नहीं करता। इससे वह दस धर्मों को आसानी से जीवन में उतार सकता है। इसके बाद महिला समिति द्वारा हैप्पी पर्यूषण पर्व कार्यक्रम का आयोजन सरला जैन की अध्यक्षता में किया गया। धूपदशमी में दोपहर तीन बजे मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। इसमें शीतलनाथ भगवान की पूजा कर धूप आहुति दी गईं।
इस दौरान संजय जैन, डा. शालू जैन, साधना, डा. शीनू जैन, पूनम, सुधा, दिनेश जैन, वंदना, मोनिका, हरीश, सर्वेश, रमेश सेठी, जुगल किशोर, ज्ञानेंद्र कुमार, सुनील जैन, विजय दिवाकर, धमेंद्र सेठी, आदि रहे।