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महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रहा उपभोक्ता, पर नहीं ठीक हो सका बिजली का बिल
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रामपुर। एक बीपीएल कार्ड धारक जो ठेला लगाकर परिवार का पालन पोषण करता है, उसे अचानक पहले दस हजार रुपये और फिर 62,709 रुपये का बिजली बिल थमा दिया जाता है। उपभोक्ता बिल ठीक कराने के लिए महीनों बिजली दफ्तरों के चक्कर काटता रहता है, लेकिन उसका बिल ठीक नहीं हो पाता। बिजली विभाग के बाबुओं और अफसरों से गुहार लगाकर थक चुका उपभोक्ता अब जिलाधिकारी के पास पहुंचा है। उपभोक्ता ने डीएम से बिल ठीक कराने की गुहार लगाई है। डीएम ने बिल ठीक कराने का आश्वासन देते हुए उसे संबंधित विभाग में भेज दिया।
मामला नवाबगेट बिजलीघर क्षेत्र के मोहल्ला चाह शोर खारी कुंआ का है। मोहल्ले का रहने वाला कुलदीप पुत्र कुंवर बहादुर ठेके पर सामान बेचकर परिवार का पालन पोषण करता है। अप्रैल माह में उसका बिजली बिल 518.71 रुपये का आया था, जिसका लॉकडाउन होने की वजह से भुगतान नहीं हो सका। उसके बाद अचानक उसका बिल बढ़कर जुलाई माह 10,622 हो गया। अनलॉक होने पर वह बिजली विभाग गया, जहां उसे कर्मचारियों और बाबुओं ने धमकाकर भगा दिया। कई बार चक्कर लगाने के बाद दिसंबर माह में उससे चार हजार रुपये यह कहते हुए जमा करा लिए कि उसका बिल ठीक हो गया है। इसके बाद जनवरी में बिल ही नहीं आया। फरवरी में कर्मचारियों ने 62,709 रुपये का बिल थमा दिया। उसने फिर से बिजली अफसरों को अपनी व्यथा सुनाई, लेकिन उसका बिल ठीक नहीं हो सका। बिजली विभाग के बाबुओं और अधिकारियों से निराश होकर बुधवार को उसने जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह के पास पहुंचकर बिल ठीक कराने की मांग की। इसपर डीएम ने उसे आश्वासन देकर कार्रवाई के निर्देश दिए।
हमारे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। यदि किसी को गलत बिल मिल गया है, तो उसे तुरंत सही कर दिया जाता है। उपभोक्ता हमारे पास आए और अपनी बात बताए। उसका बिल अगर गलत होगा तो ठीक कर दिया जाएगा।
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- विनय कुमार, उपखंड अधिकारी तृतीय, रामपुर
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मामला नवाबगेट बिजलीघर क्षेत्र के मोहल्ला चाह शोर खारी कुंआ का है। मोहल्ले का रहने वाला कुलदीप पुत्र कुंवर बहादुर ठेके पर सामान बेचकर परिवार का पालन पोषण करता है। अप्रैल माह में उसका बिजली बिल 518.71 रुपये का आया था, जिसका लॉकडाउन होने की वजह से भुगतान नहीं हो सका। उसके बाद अचानक उसका बिल बढ़कर जुलाई माह 10,622 हो गया। अनलॉक होने पर वह बिजली विभाग गया, जहां उसे कर्मचारियों और बाबुओं ने धमकाकर भगा दिया। कई बार चक्कर लगाने के बाद दिसंबर माह में उससे चार हजार रुपये यह कहते हुए जमा करा लिए कि उसका बिल ठीक हो गया है। इसके बाद जनवरी में बिल ही नहीं आया। फरवरी में कर्मचारियों ने 62,709 रुपये का बिल थमा दिया। उसने फिर से बिजली अफसरों को अपनी व्यथा सुनाई, लेकिन उसका बिल ठीक नहीं हो सका। बिजली विभाग के बाबुओं और अधिकारियों से निराश होकर बुधवार को उसने जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह के पास पहुंचकर बिल ठीक कराने की मांग की। इसपर डीएम ने उसे आश्वासन देकर कार्रवाई के निर्देश दिए।
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हमारे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। यदि किसी को गलत बिल मिल गया है, तो उसे तुरंत सही कर दिया जाता है। उपभोक्ता हमारे पास आए और अपनी बात बताए। उसका बिल अगर गलत होगा तो ठीक कर दिया जाएगा।
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- विनय कुमार, उपखंड अधिकारी तृतीय, रामपुर