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नहाय-खाय संग सोमवार से मचेगी छठ पूजा की धूम
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नहाय-खाय के साथ छठ पर्व का आगाज
भगवान भाष्कर को समर्पित पर्व सोमवार से शुरू होकर चार दिनों तक चलेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। सूर्य उपासना का चार दिवसीय पर्व छठ पूजा सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो जाएगा। चार दिनों तक चलने वाली पूजा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में होती है। शहर में छठ पूजा की तैयारी शुरू हो गई है।
जिले में भी काफी संख्या में लोग छठ पर्व को मनाते हैं। आटा और गुड़ से ठेकुआ और साठी के चावल के लड्डू संग पूड़ी भी बनाई जाती है। बांस की टोकरी-दउरा में सामग्री रखकर घाट पर जाकर छठ पूजा की जाती है। पंडित मुन्ना हरि ने बताया कि सूर्य देव सभी ग्रहों के अधिपति कहे जाते हैं, कार्तिक माह के षष्ठी तिथि को सूर्य की उपासना करना खास लाभकारी होता है। छठ पर्व पर तांबे के पात्र में डूबते एवं उगते सूर्य को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। इसकी वैज्ञानिक महत्ता भी है, तांबे के पात्र एवं जल से टकराकर सूर्य की किरणें जब व्यक्ति के शरीर पर पड़ती हैं तो वह लाभकारी होता है।
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छठ पूजा के लिए शुरू हुई खरीदारी
रामपुर। छठ पूजा के लिए जहां ज्वालागर के कृष्णा मंदिर और रजा टैक्सटाइल कॉलोनी में छठ मैया केे स्थलों की सफाई का काम शुरु हो गया है। सूर्य देवता को अर्घ्य देने के लिए अस्थाई तालाबों और पोखरों की खुदाई भी की जाएगी। व्रत रहने वाली महिलाएं पूजा में लगने वाले कोसी, सूप, शहद, काला तिल, पान का पत्ता, अदरक, हल्दी, नीबू, सुपारी, गन्ना, सुथनी, अनार, अनानास, नारियल, बेर, संतरा, इमली और शरीफा की खरीदारी की।
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ऐसे होगा चार दिन का छठ पर्व
नहाय- खाय
8 नवंबर को नहाय- खाय किया की रस्म होगी। नहाय खाय के दिन पूरे घर की साफ- सफाई की जाती है और स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अगले दिन खरना से व्रत की शुरुआत होती है।
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खरना
9 नवंबर को खरना खाया जाएगा। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ वाली खीर का प्रसाद (खरना) बनाती हैं और फिर सूर्य देव की पूजा करने के बाद यह प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके बाद व्रत का पारणा छठ के समापन के बाद ही किया जाता है।
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डूबते सूरज को अर्घ्य
खरना के अगले दिन 10 नवंबर को सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
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उगते सूरज को अर्घ्य
खरना के अगले दिन छठ का समापन किया जाता है। लिहाजा 11 नवंबर को इस महापर्व का समापन किया जाएगा। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले ही नदी या तालाब के पानी में उतर जाती हैं और सूर्यदेव से प्रार्थना करती हैं। इसके बाद उगते सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पूजा का समापन कर व्रत का पारण किया जाता है।
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यह बोलीं महिलाएं:
वह पिछले चार साल से छठ माता का व्रत कर रही हैं। छठ मइया ने उसके परिवार को बहुत खुशी दी है। जब तक उनका शरीर साथ देगा तब तक वह व्रत धारण करती रहेंगी।
शांता
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विवाह के बाद से ही मैंने व्रत धारण करने शुरु किए थे। तीन साल से लगातार व्रत कर रही हैं। छठ मैया का व्रत रखने से सारे दुख दूर हो जाते हैं।
अन्नू
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पिछले 11 साल से छठ मैया के व्रत रख रहीं हूं। माता रानी की कृपा से परिवार खुशहाल है। 36 घंटे तक निर्जल व्रत रखने की छठ मैया ही शक्ति देती हैं। व्रत के दौरान कोई परेशानी नहीं होती।
शकुंतला
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छठ मैया के व्रत में कोई भी नई परंपरा नहीं पड़ी है। 41 साल से लगातार छठ मैया का व्रत रख रही हैं। भले भी लोग आधुनिक हो गए हैं लेकिन, छठ मैया के व्रत में कोई परंपरा नहीं बदली है।
मनोरमा देवी
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भगवान भाष्कर को समर्पित पर्व सोमवार से शुरू होकर चार दिनों तक चलेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। सूर्य उपासना का चार दिवसीय पर्व छठ पूजा सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो जाएगा। चार दिनों तक चलने वाली पूजा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में होती है। शहर में छठ पूजा की तैयारी शुरू हो गई है।
जिले में भी काफी संख्या में लोग छठ पर्व को मनाते हैं। आटा और गुड़ से ठेकुआ और साठी के चावल के लड्डू संग पूड़ी भी बनाई जाती है। बांस की टोकरी-दउरा में सामग्री रखकर घाट पर जाकर छठ पूजा की जाती है। पंडित मुन्ना हरि ने बताया कि सूर्य देव सभी ग्रहों के अधिपति कहे जाते हैं, कार्तिक माह के षष्ठी तिथि को सूर्य की उपासना करना खास लाभकारी होता है। छठ पर्व पर तांबे के पात्र में डूबते एवं उगते सूर्य को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। इसकी वैज्ञानिक महत्ता भी है, तांबे के पात्र एवं जल से टकराकर सूर्य की किरणें जब व्यक्ति के शरीर पर पड़ती हैं तो वह लाभकारी होता है।
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छठ पूजा के लिए शुरू हुई खरीदारी
रामपुर। छठ पूजा के लिए जहां ज्वालागर के कृष्णा मंदिर और रजा टैक्सटाइल कॉलोनी में छठ मैया केे स्थलों की सफाई का काम शुरु हो गया है। सूर्य देवता को अर्घ्य देने के लिए अस्थाई तालाबों और पोखरों की खुदाई भी की जाएगी। व्रत रहने वाली महिलाएं पूजा में लगने वाले कोसी, सूप, शहद, काला तिल, पान का पत्ता, अदरक, हल्दी, नीबू, सुपारी, गन्ना, सुथनी, अनार, अनानास, नारियल, बेर, संतरा, इमली और शरीफा की खरीदारी की।
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ऐसे होगा चार दिन का छठ पर्व
नहाय- खाय
8 नवंबर को नहाय- खाय किया की रस्म होगी। नहाय खाय के दिन पूरे घर की साफ- सफाई की जाती है और स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अगले दिन खरना से व्रत की शुरुआत होती है।
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खरना
9 नवंबर को खरना खाया जाएगा। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ वाली खीर का प्रसाद (खरना) बनाती हैं और फिर सूर्य देव की पूजा करने के बाद यह प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके बाद व्रत का पारणा छठ के समापन के बाद ही किया जाता है।
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डूबते सूरज को अर्घ्य
खरना के अगले दिन 10 नवंबर को सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
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उगते सूरज को अर्घ्य
खरना के अगले दिन छठ का समापन किया जाता है। लिहाजा 11 नवंबर को इस महापर्व का समापन किया जाएगा। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले ही नदी या तालाब के पानी में उतर जाती हैं और सूर्यदेव से प्रार्थना करती हैं। इसके बाद उगते सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पूजा का समापन कर व्रत का पारण किया जाता है।
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यह बोलीं महिलाएं:
वह पिछले चार साल से छठ माता का व्रत कर रही हैं। छठ मइया ने उसके परिवार को बहुत खुशी दी है। जब तक उनका शरीर साथ देगा तब तक वह व्रत धारण करती रहेंगी।
शांता
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विवाह के बाद से ही मैंने व्रत धारण करने शुरु किए थे। तीन साल से लगातार व्रत कर रही हैं। छठ मैया का व्रत रखने से सारे दुख दूर हो जाते हैं।
अन्नू
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पिछले 11 साल से छठ मैया के व्रत रख रहीं हूं। माता रानी की कृपा से परिवार खुशहाल है। 36 घंटे तक निर्जल व्रत रखने की छठ मैया ही शक्ति देती हैं। व्रत के दौरान कोई परेशानी नहीं होती।
शकुंतला
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छठ मैया के व्रत में कोई भी नई परंपरा नहीं पड़ी है। 41 साल से लगातार छठ मैया का व्रत रख रही हैं। भले भी लोग आधुनिक हो गए हैं लेकिन, छठ मैया के व्रत में कोई परंपरा नहीं बदली है।
मनोरमा देवी