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कोर्ट के आदेश पर खुले चमन नर्सिंग होम के ताले
अमर उजाला ब्यूरो/रामपुर
Updated Sun, 17 Jan 2016 11:12 PM IST
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बिना लाइसेंस शहर के बीचों बीच चल रहे चमन नर्सिंग होम के ताले कोर्ट के आदेश पर खुल गए हैं। नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे सील कर दिया था। स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग होम संचालिका के खिलाफ मेडिकल एक्ट की धाराओं में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी।
दिसंबर 2015 में पुराना गंज में अवैध रूप से चल रहे नर्सिंग होम में जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। भोट थाना क्षेत्र के करीमपुर शर्की गांव निवासी हरिओम ने अपनी पत्नी जशोदा को प्रसव के लिए चमन नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। प्रसव के बाद जशोदा और नवजात की मौत हो गई थी। परिजनों ने हंगामा किया था।
मामला कैबिनेट मंत्री आजम खां तक पहुंचा तो स्वास्थ्य अधिकारी हरकत में आए। नर्सिंग होम पर छापा मारकर सील कर दिया था। गंज थाने में संचालिका के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से न तो कोई शिकायत की गई नहीं ही कानूनी कार्रवाई की गई। मामला कोर्ट में पहुंचा।
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कोर्ट ने नर्सिंग होम की सील खोलने के आदेश दे दिए हैं। सीएमओ डा. शंकर लाल सारस्वत ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर नर्सिंग होम के खिलाफ की गई सील करने की कार्रवाई को खत्म करना पड़ा और ताले खोलने पड़े।
सीएमओ का कहना है कि यदि प्रकरण में पीड़ित पक्ष की ओर से भी कानूनी कार्रवाई की गई होती तो शायद सील खोलने को लेकर कोर्ट के आदेश नहीं आते। कोर्ट के आदेश पर चमन नर्सिंग होम के ताले भले ही खोल दिए गए हों, लेकिन यहां पर दो बार जच्चा-बच्चा की मौत हो चुकी है।
साल 2014 के फरवरी माह में पटवाई थाना क्षेत्र के शकील की पत्नी साबरी को भी परिजनों ने प्रसव के लिए इसी नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। साबरी और नवजात की मौत हो गई थी। इसके बाद पिछले साल दिसंबर में भोट थाना क्षेत्र के करीमपुर शर्की गांव निवासी हरिओम की पत्नी जशोदा और नवजात की मौत हुई।
दोनों प्रकरणों में पीड़ितों की ओर से भी कानूनी कार्रवाई के लिए ठोस पैरवी न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई कार्रवाई से कोई शिकंजा नहीं कसा जा सका।
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दिसंबर 2015 में पुराना गंज में अवैध रूप से चल रहे नर्सिंग होम में जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। भोट थाना क्षेत्र के करीमपुर शर्की गांव निवासी हरिओम ने अपनी पत्नी जशोदा को प्रसव के लिए चमन नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। प्रसव के बाद जशोदा और नवजात की मौत हो गई थी। परिजनों ने हंगामा किया था।
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मामला कैबिनेट मंत्री आजम खां तक पहुंचा तो स्वास्थ्य अधिकारी हरकत में आए। नर्सिंग होम पर छापा मारकर सील कर दिया था। गंज थाने में संचालिका के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से न तो कोई शिकायत की गई नहीं ही कानूनी कार्रवाई की गई। मामला कोर्ट में पहुंचा।
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कोर्ट ने नर्सिंग होम की सील खोलने के आदेश दे दिए हैं। सीएमओ डा. शंकर लाल सारस्वत ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर नर्सिंग होम के खिलाफ की गई सील करने की कार्रवाई को खत्म करना पड़ा और ताले खोलने पड़े।
सीएमओ का कहना है कि यदि प्रकरण में पीड़ित पक्ष की ओर से भी कानूनी कार्रवाई की गई होती तो शायद सील खोलने को लेकर कोर्ट के आदेश नहीं आते। कोर्ट के आदेश पर चमन नर्सिंग होम के ताले भले ही खोल दिए गए हों, लेकिन यहां पर दो बार जच्चा-बच्चा की मौत हो चुकी है।
साल 2014 के फरवरी माह में पटवाई थाना क्षेत्र के शकील की पत्नी साबरी को भी परिजनों ने प्रसव के लिए इसी नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। साबरी और नवजात की मौत हो गई थी। इसके बाद पिछले साल दिसंबर में भोट थाना क्षेत्र के करीमपुर शर्की गांव निवासी हरिओम की पत्नी जशोदा और नवजात की मौत हुई।
दोनों प्रकरणों में पीड़ितों की ओर से भी कानूनी कार्रवाई के लिए ठोस पैरवी न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई कार्रवाई से कोई शिकंजा नहीं कसा जा सका।