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किसानों पर नए कृषि कानूनों को थोपना चाहती है केंद्र सरकार: गौरव टिकैत

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 29 Oct 2021 12:30 AM IST
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Central government wants to impose new agricultural laws on farmers: Gaurav Tikait
मिलक। भाकियू युवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी गौरव टिकैत ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों की मांग को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा। लखीमपुर प्रकरण में भी उन्होंनेद निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
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नगर के पटेल नगर में गुरुवार को भाकियू युवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी गौरव टिकैत ने युवाओं में जोश भरा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को किसानों पर थोपना चाहती है। विपक्ष कमजोर होने के कारण संसद में बिल पास होने पर कानून बन गए, लेकिन संयुक्त मोर्चा उनको देश में लागू नहीं होने देगा। उन्होेंने कहा कि उनका आंदोलन तीनों कृषि कानून वापसी तक जारी रहेगा।सरकार से कई दौर की बात हुई, लेकिन वह कृषि कानूनों को लेकर संवेदनशील नहीं है, बल्कि उलझाना चाहती है।
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उन्होंने कहा कि सरकार कृषि को निजीकरण की ओर ले जाना चाहती है। उन्होंने कहा कि जब सरकार कानूनों में संशोधन करने को तैयार है, तब उन्हें रद्द करने से क्यों बच रही है। निजीकरण के कारण ही बीएसएनएल बदहाल हो गया। इसी तरह से कानून लागू होते ही मौजूदा मंडी व्यवस्था बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट कांग्रेस का था, लेकिन पहले विपक्ष मजूबत था। जिस कारण वह नए कानूनों को पास नहीं करा पाई।
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इससे पूर्व पत्रकार वार्ता में दिल्ली में लाल किले पर हुए बबाल के सवाल पर उन्हाेंने कहा कि वहां राष्ट्रीय ध्वज से कोई छेड़खानी नहीं हुई थी। वहां पर धार्मिक ध्वज फहराने पर कहा कि यह सब सरकार की जिम्मेदारी थी और वहां पर धार्मिक ध्वज फहराने वाला उनका कार्यकर्ता नहीं था।
लखीमपुर प्रकरण को लेकर कहा कि वह हिंसा नहीं थी, बल्कि किसानों की एक केंद्रीय मंत्री के इशारे पर हत्या करने की साजिश थी। दूसरे पक्ष के चार लोगों की मौत के सवाल पर कहा कि यह क्रिया पर प्रतिक्रिया थी। यह पता करने पर लखीमपुर हिंसा में चार अन्य की मौतों पर संवेदना जताने वाले संयुक्त मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव के निलंबन को लेकर उनका क्या नजरिया है तो कहा कि संयुक्त मोर्चे में 40 संगठन है। संयुक्त मोर्चे का वह निर्णय है।

गाजीपुर बॉर्डर पर एक व्यक्ति की निर्मम हत्या को लेकर उनका दावा था कि संयुक्त मोर्चा का हत्या में शामिल लोगों से कोई मतलब नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार पर सड़क पर आंदोलन के नाम पर तंबुओं के मुद्दे पर उन्होंने पुलिस पर ठीकरा फोड़ा और कहा कि उन्होंने यह बात पहले भी कही है कि रास्ते पर बैरिकेडिंग पुलिस ने की है।
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