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अनुसंधान का बड़ा केंद्र बन सकती है रजा लाइब्रेरी : अर्जुन राम मेघवाल
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रामपुर। केंद्रीय संस्कृति और संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि रजा लाइब्रेरी की स्थापत्य कला बेजोड़ है और यहां जो संग्रह है, वह भी अपने आप में बेजोड़ है। यह राष्ट्रीय धरोहर है और अनुसंधान का भी एक बड़ा केंद्र बन सकता है। भावी पीढ़ी भारतीय संस्कृति को रामपुर रजा लाइब्रेरी से पढ़ सकती है। समझ और अनुभव कर सकती है कि भारतीय संस्कृति कितनी महान रही है।
केंद्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रामपुर रजा लाइब्रेरी का भ्रमण किया गया। उन्होंने लाइब्रेरी में संरक्षित वाल्मीकि रामायण, हजरत अली द्वारा लिखित 7वीं सदी की कुरान शरीफ, कलीला-दिमना, जामेउत तवारीख जैसी दुर्लभ पांडुलिपियों, रागमाला एलबम एवं भव्य दरबार हॉल में प्रदर्शित कलाकृतियों का अवलोकन किया और उनकी काफी सराहना की। इसके अतिरिक्त लाइब्रेरी के विभिन्न अनुभागों और संरक्षण प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान यहां बहुत से नवाचार किए जा सकते हैं। रागमाला एलबम को देखते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत ही दुर्लभ कला है। संगीत नाटक अकेडमी में इस विषय पर बहुत से सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि रामपुर रजा लाइब्रेरी और संगीत नाटक एकेडमी मिलकर यहां की रागमाला एलबम को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करें। रामपुर रजा लाइब्रेरी अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है और इसके विस्तार के लिए भारत सरकार निरंतर प्रयासरत है और यहां के विकास के लिए किसी भी तरह की वित्तीय कमी नहीं होने देगी।
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इस अवसर पर पूर्व निदेशक रामपुर रजा लाइब्रेरी एवं मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, लाइब्रेरी एवं सूचना अधिकारी डॉ. अबुसाद इस्लाही ने रागमाला एलबम के दुर्लभ चित्र की प्रतिलिपि, रामपुर रजा लाइब्रेरी द्वारा प्रकाशित एवं हिंदी में अनुवादित वाल्मीकि रामायण, राजभाषा पत्रिका प्रेमचंद विशेषांक, राजभाषा पत्रिका गांधी विशेषांक, रामपुर रजा लाइब्रेरी न्यूजलेटर आदि केंद्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री को भेंटस्वरूप प्रदान कीं। इसके बाद उन्होंने गांधी समाधि, शहीद स्मारक का भी भ्रमण किया।
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केंद्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रामपुर रजा लाइब्रेरी का भ्रमण किया गया। उन्होंने लाइब्रेरी में संरक्षित वाल्मीकि रामायण, हजरत अली द्वारा लिखित 7वीं सदी की कुरान शरीफ, कलीला-दिमना, जामेउत तवारीख जैसी दुर्लभ पांडुलिपियों, रागमाला एलबम एवं भव्य दरबार हॉल में प्रदर्शित कलाकृतियों का अवलोकन किया और उनकी काफी सराहना की। इसके अतिरिक्त लाइब्रेरी के विभिन्न अनुभागों और संरक्षण प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया।
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उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान यहां बहुत से नवाचार किए जा सकते हैं। रागमाला एलबम को देखते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत ही दुर्लभ कला है। संगीत नाटक अकेडमी में इस विषय पर बहुत से सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि रामपुर रजा लाइब्रेरी और संगीत नाटक एकेडमी मिलकर यहां की रागमाला एलबम को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करें। रामपुर रजा लाइब्रेरी अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है और इसके विस्तार के लिए भारत सरकार निरंतर प्रयासरत है और यहां के विकास के लिए किसी भी तरह की वित्तीय कमी नहीं होने देगी।
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इस अवसर पर पूर्व निदेशक रामपुर रजा लाइब्रेरी एवं मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, लाइब्रेरी एवं सूचना अधिकारी डॉ. अबुसाद इस्लाही ने रागमाला एलबम के दुर्लभ चित्र की प्रतिलिपि, रामपुर रजा लाइब्रेरी द्वारा प्रकाशित एवं हिंदी में अनुवादित वाल्मीकि रामायण, राजभाषा पत्रिका प्रेमचंद विशेषांक, राजभाषा पत्रिका गांधी विशेषांक, रामपुर रजा लाइब्रेरी न्यूजलेटर आदि केंद्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री को भेंटस्वरूप प्रदान कीं। इसके बाद उन्होंने गांधी समाधि, शहीद स्मारक का भी भ्रमण किया।