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Rampur News: ट्रेजरी में जाती रही हाजिरी और खातों से निकलती रही सैलरी
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रामपुर। फर्जी एक्सरे टेक्नीशियन अर्पित सिंह के मामले में हैरानी की बात यह है कि लंबे समय तक ट्रेजरी में हाजिरी जाती रही और सैलरी निकलती रही। किसी भी अधिकारी को भनक तक नहीं लगी। 31 तारीख तक अर्पित ने अपने रजिस्टर पर हाजिरी लगाई थी लेकिन रातोंरात किसी की सूचना के बाद से वह भाग गया। अब तक पकड़ से बाहर है।
लंबे समय से एक नाम से छह जगहों से सैलरी लेने वाला अर्पित सिंह सभी की आंखों में धूल झोंकता रहा। रोजाना जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में आकर हाजिरी लगाता और इसी हाजिरी के हिसाब से उसकी सैलरी बन जाती। ट्रेजरी से अर्पित नाम से खातों में पैसा भी जाता रहा, लेकिन किसी भी तरह से यह पकड़ में नहीं आ सका।
अब तक की नौकरी में करीब 55 लाख रुपये कमा चुका था तो रिकवरी के लिए भी जल्द कोशिशें की जाएगी। अभी लखनऊ में भी उसके पेनकार्ड आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज चेक किए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के साथ ही निदेशालय स्तर से यह भी शक हो रहा है कि इतनी बड़ी प्लानिंग करने वाला अर्पित का नाम असली में अर्पित है या यह भी नकली है।
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अभी पुलिस कई इलाकों में उसकी तलाश कर रही है। इधर, अधिकारी भी तेजी के साथ उसके आधार और अन्य कागज चेक करने में लगी हुई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद से पुलिस तेजी से उसकी तलाश में लगी हुई है। सीएमओ दीपा सिंह का कहना है कि सभी दस्तावेज को महानिदेशक का कार्यालय भेज दिया गया है।
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परिवार के फोन बंद, घर पर ताले
सीएमओ डॉ. दीपा ने बताया कि मामला सामने आने के बाद जब टीम ने उसको फोन किया था तो उसका फोन बंद आया। इसके बाद टीम घर पर गई तो वहां पर भी ताले लगे थे। न तो परिवार के सदस्य ने फोन उठाया और न ही अर्पित ने उठाया।
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लंबे समय से एक नाम से छह जगहों से सैलरी लेने वाला अर्पित सिंह सभी की आंखों में धूल झोंकता रहा। रोजाना जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में आकर हाजिरी लगाता और इसी हाजिरी के हिसाब से उसकी सैलरी बन जाती। ट्रेजरी से अर्पित नाम से खातों में पैसा भी जाता रहा, लेकिन किसी भी तरह से यह पकड़ में नहीं आ सका।
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अब तक की नौकरी में करीब 55 लाख रुपये कमा चुका था तो रिकवरी के लिए भी जल्द कोशिशें की जाएगी। अभी लखनऊ में भी उसके पेनकार्ड आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज चेक किए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के साथ ही निदेशालय स्तर से यह भी शक हो रहा है कि इतनी बड़ी प्लानिंग करने वाला अर्पित का नाम असली में अर्पित है या यह भी नकली है।
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अभी पुलिस कई इलाकों में उसकी तलाश कर रही है। इधर, अधिकारी भी तेजी के साथ उसके आधार और अन्य कागज चेक करने में लगी हुई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद से पुलिस तेजी से उसकी तलाश में लगी हुई है। सीएमओ दीपा सिंह का कहना है कि सभी दस्तावेज को महानिदेशक का कार्यालय भेज दिया गया है।
परिवार के फोन बंद, घर पर ताले
सीएमओ डॉ. दीपा ने बताया कि मामला सामने आने के बाद जब टीम ने उसको फोन किया था तो उसका फोन बंद आया। इसके बाद टीम घर पर गई तो वहां पर भी ताले लगे थे। न तो परिवार के सदस्य ने फोन उठाया और न ही अर्पित ने उठाया।