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Rampur News: जौहर यूनिवर्सिटी मामले में दाखिल नहीं हो सके अभिलेखीय साक्ष्य, अब 25 को सुनवाई

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 01:55 AM IST
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Archival evidence could not be filed in the Jauhar University case, hearing now on 25th
रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका के अंगीकरण पर बृहस्पतिवार को भी फैसला नहीं हो सका। कोर्ट की ओर से मांगे गए मूल प्रतियों में अभिलेखीय साक्ष्य यूनिवर्सिटी पक्ष की ओर से दाखिल नहीं किए जा सके। इसके लिए और समय की मांग की गई। इस पर आरडीए अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह की कोर्ट ने सुनवाई के लिए अगली तिथि 25 अगस्त तय कर दी।
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मंंडलायुक्त कोर्ट में 15 जुलाई को जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों को अवैध मानते हुए जारी किए ध्वस्तीकरण के आदेश को यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट की ओर से दी गई चुनौती की याचिका के अंगीकरण पर सुनवाई चल रही है। इसमें बृहस्पतिवार को कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर जो दावे यूनिवर्सिटी और आरडीए की ओर से किए गए थे, उनके अभिलेखीय साक्ष्य मूल प्रतियों में प्रस्तुत करने का आदेश दिया था।
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ट्रस्ट व यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता मोहम्मद जुनैद एजाज के अनुसार जौहर विश्वविद्यालय मामले में तीन अगस्त को आयुक्त न्यायालय ने विश्वविद्यालय से 2012 से पहले बने भवनों का विवरण मांगा था। इसके जवाब में उन्होंने न्यायालय को आवेदन पत्र देकर बताया था कि विश्वविद्यालय पर लेबर सेल्स के मामले में चली कार्यवाही में डीएम रामपुर ने पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता से भवनों की जांच कराई थी।
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इसमें विश्वविद्यालय ने यह बताया था कि 2009 से पहले 14 भवन बन चुके थे। पीडब्ल्यूडी रामपुर ने गूगल अर्थ एप्लीकेशन से उसकी पुष्टि भी की थी। भवनों का अन्य रिकार्ड भी शासन व पीडब्ल्यूडी और लेबर विभाग के पास है। इसलिए उस रिकार्ड को वहां से ही तलब किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय ने 2009-12 व वर्ष 2012 के बाद बने भवनों का रिकार्ड देने के लिए और समय दिए जाने की मांग की थी।

साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर कोर्ट तल्ख
बृहस्पतिवार को मूल प्रतियों में अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कोर्ट तल्ख भी दिखी। कोर्ट ने यूनिवर्सिटी पक्ष को समय देते हुए सुनवाई की अगली तिथि 25 अगस्त तय कर दी है।
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