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.हादसे ने छीने हाथ , जज्बे से हर चुनौती को दी मात
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रामपुर। वसीम, उम्र करीब 11 साल, एक हादसे ने उसके दोनों हाथ छीन लिए। इतना ही नहीं यादाश्त और दिमागी रूप से भी कमजोर बना दिया। लेकिन, जैसे-जैसे समय के साथ उसका दिमाग हादसे से उबरा, उसने एक बार फिर अपने सपनों की उड़ान भरनी शुरू कर दी। शिक्षा से लेकर खेल के मैदान तक में अपनी दिव्यांगता को मात देकर बेहतर करने का जज्बा उसमें साफ देखा जा सकता है।
मंजिले उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है। सिर्फ पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इन पंक्तियों को चरितार्थ कर रहा है टांडा क्षेत्र के बैजना गांव निवासी हिदायत अली का बेटा वसीम। 30 मई 2109 को वसीम बिजली की एचटी लाइन की चपेट में आ गया। हादसे में वसीम ने अपने दोनों हाथ गंवा दिए और इस हादसे का उसके दिमाग पर भी गंभीर असर हुआ। करीब एक साल तक अलीगढ़ मेडिकल कालेज में उपचार और घर पर देखभाल के बाद वसीम का दिमाग हादसे से उबर सका लेकिन, अब भी उसके सामने हाथ गंवाने के बाद खड़ी हुईं चुनौतियों का पहाड़ था। लेकिन, वसीम और उसके परिजनों ने हार नहीं मानी। वसीम ने एक बार फिर स्कूल जाकर पढ़ाई करने की इच्छा जाहिर की। हादसे के वक्त वसीम कक्षा चार का छात्र था लेकिन, हादसे के कारण दिमाग पर हुए असर के कारण उसे दोबारा कक्षा एक से पढ़ाई शुरू करनी पड़ी। कक्षा एक में प्रवेश लिया तो कोरोना ने स्कूल बंद कर दिए। अब वसीम घाटमपुर कंपोजिट विद्यालय परिसर में स्थित प्राइमरी स्कूल में कक्षा दो का छात्र है।
स्कूलों ने प्रवेश देने से किया इंकार तो पैरों से लिखना सीख गया वसीम
रामपुर। हादसे के बाद दोनों हाथ गंवा चुके वसीम ने परिजनों से पढ़ाई की इच्छा तो जाहिर कर दी लेकिन, उसके प्रवेश के आड़े उसकी दिव्यांगता आने लगी। वसीम के पिता हिदायत अली ने बताया कि कई स्कूलों ने वसीम को प्रवेश देने से मना कर दिया, क्योंकि उनका कहना था कि वसीम किसी प्रकार होमवर्क व स्कूल वर्क करेगा।
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जिसके बाद वसीम ने पैरों से लिखने की कोशिश शुरू कर दी। वसीम के माता-पिता ने उसे रोजाना पैरों से लिखने का अभ्यास कराना शुरू कर दिया और कुछ ही समय में वसीम अपने पैरों से कलम पकड़कर अपने सपनों को पूरा करने के लिए सफलता का शुरुआती ककहरा लिखने लगा। इस दौरान कंपोजिट विद्यालय घाटमपुर के शिक्षकों ने वसीम के परिजनों से मुलाकात की और उसका प्रवेश उनके विद्यालय में कराने के लिए कहा। हिदायत अली बताते हैं कि कंपोजिट विद्यालय के शिक्षकों का वसीम के प्रवेश से लेकर उसकी पढ़ाई-लिखाई और खेलकूद में प्रतिभाग कराने में काफी सहयोग रहा है। अब वसीम न सिर्फ अपनी स्कूल के होमवर्क और क्लास वर्क को पैरों से कर लेता है तो वहीं मोबाइल पर गेम भी खेल लेता है।
दिव्यांगजन सशक्तिरण विभाग कर सकता है मदद
-जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी जीशान मलिक ने बताया कि वसीम को अगर किसी सहायक उपकरण की आवश्यकता है तो परिजन कार्यालय में संपर्क करें, वसीम को संबंधित सहायक उपकरण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से दिव्यांगता प्रतिशत का प्रमाण पत्र बनवाने पर सरकारी वाहनों में रियायती यात्रा से लेकर अन्य योजनाओं में भी लाभ मिल सकता है।
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मंजिले उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है। सिर्फ पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इन पंक्तियों को चरितार्थ कर रहा है टांडा क्षेत्र के बैजना गांव निवासी हिदायत अली का बेटा वसीम। 30 मई 2109 को वसीम बिजली की एचटी लाइन की चपेट में आ गया। हादसे में वसीम ने अपने दोनों हाथ गंवा दिए और इस हादसे का उसके दिमाग पर भी गंभीर असर हुआ। करीब एक साल तक अलीगढ़ मेडिकल कालेज में उपचार और घर पर देखभाल के बाद वसीम का दिमाग हादसे से उबर सका लेकिन, अब भी उसके सामने हाथ गंवाने के बाद खड़ी हुईं चुनौतियों का पहाड़ था। लेकिन, वसीम और उसके परिजनों ने हार नहीं मानी। वसीम ने एक बार फिर स्कूल जाकर पढ़ाई करने की इच्छा जाहिर की। हादसे के वक्त वसीम कक्षा चार का छात्र था लेकिन, हादसे के कारण दिमाग पर हुए असर के कारण उसे दोबारा कक्षा एक से पढ़ाई शुरू करनी पड़ी। कक्षा एक में प्रवेश लिया तो कोरोना ने स्कूल बंद कर दिए। अब वसीम घाटमपुर कंपोजिट विद्यालय परिसर में स्थित प्राइमरी स्कूल में कक्षा दो का छात्र है।
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स्कूलों ने प्रवेश देने से किया इंकार तो पैरों से लिखना सीख गया वसीम
रामपुर। हादसे के बाद दोनों हाथ गंवा चुके वसीम ने परिजनों से पढ़ाई की इच्छा तो जाहिर कर दी लेकिन, उसके प्रवेश के आड़े उसकी दिव्यांगता आने लगी। वसीम के पिता हिदायत अली ने बताया कि कई स्कूलों ने वसीम को प्रवेश देने से मना कर दिया, क्योंकि उनका कहना था कि वसीम किसी प्रकार होमवर्क व स्कूल वर्क करेगा।
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जिसके बाद वसीम ने पैरों से लिखने की कोशिश शुरू कर दी। वसीम के माता-पिता ने उसे रोजाना पैरों से लिखने का अभ्यास कराना शुरू कर दिया और कुछ ही समय में वसीम अपने पैरों से कलम पकड़कर अपने सपनों को पूरा करने के लिए सफलता का शुरुआती ककहरा लिखने लगा। इस दौरान कंपोजिट विद्यालय घाटमपुर के शिक्षकों ने वसीम के परिजनों से मुलाकात की और उसका प्रवेश उनके विद्यालय में कराने के लिए कहा। हिदायत अली बताते हैं कि कंपोजिट विद्यालय के शिक्षकों का वसीम के प्रवेश से लेकर उसकी पढ़ाई-लिखाई और खेलकूद में प्रतिभाग कराने में काफी सहयोग रहा है। अब वसीम न सिर्फ अपनी स्कूल के होमवर्क और क्लास वर्क को पैरों से कर लेता है तो वहीं मोबाइल पर गेम भी खेल लेता है।
दिव्यांगजन सशक्तिरण विभाग कर सकता है मदद
-जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी जीशान मलिक ने बताया कि वसीम को अगर किसी सहायक उपकरण की आवश्यकता है तो परिजन कार्यालय में संपर्क करें, वसीम को संबंधित सहायक उपकरण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से दिव्यांगता प्रतिशत का प्रमाण पत्र बनवाने पर सरकारी वाहनों में रियायती यात्रा से लेकर अन्य योजनाओं में भी लाभ मिल सकता है।