अब्दुल्ला आजम को झटका: कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरार, दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में 18 को निर्यण
दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में रामपुर के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला बरकरार रखते हुए उनका प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है। अब इस मामले में 18 अक्तूबर को कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है।
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सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में निचली अदालत के 11 अक्तूबर के फैसले को जिला जज की कोर्ट में चुनौती दी गई। जिला जज ने इस मामले को एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने पर्याप्त आधार न पाए जाने पर निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अब्दुल्ला आजम का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।
अब इस मामले में 18 अक्तूबर को ही कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में गंज थाने में सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां के बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के खिलाफ दो जन्म प्रमाणपत्र होने का मामला दर्ज कराया था, जिसमें सपा नेता आजम खां और उनकी पत्नी डाॅ. तजीन फात्मा को भी आरोपी बनाया गया था।
यह मामला एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है। 11 अक्तूबर को इस मुकदमे में अब्दुल्ला आजम के अधिवक्ताओं को बहस करनी थी, लेकिन उनके द्वारा कोर्ट में स्थगन प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अब्दुल्ला आजम को आदेश दिया था कि वह 16 अक्तूबर तक लिखित बहस दाखिल कर सकते हैं।
इसको लेकर सोमवार को सुनवाई हुई। सोमवार को अब्दुल्ला आजम की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मनु शर्मा व जुबैर अहमद की ने जिला जज की कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया ,जिसमें उन्होंने फैसले की तारीख को आगे बढ़ाने की मांग रखी। जिला जज सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने इस प्रार्थना पत्र को सुनवाई के लिए एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया, जिस पर देर शाम सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान अब्दुल्ला के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि निचली अदालत ने 11 अक्तूबर को जो आदेश पारित किया है वो सही नहीं है। उन्हें अपनी बहस रखने का अवसर दिया जाए, जिस पर अभियोजन की ओर से हाईकोर्ट के अपर महाधिवक्ता अनिल कुमार सिंह और एडीजीसी सीमा सिंह राणा ने तर्क दिया कि बचाव पक्ष जानबूझकर मुकदमे को लंबा खींचना चाह रहा है और ट्रायल में सहयोग नहीं कर रहा है।
एडीजीसी सीमा राणा ने बताया कि अब्दुल्ला आजम के अधिवक्ता की ओर दाखिल प्रार्थना पत्र को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। बताया कि अब इस मामले में कोर्ट 18 अक्तूबर को अपना फैसला सुना सकती है।
अब्दुल्ला के वकीलों ने दाखिल नहीं की लिखित बहस
दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के अधिवक्ताओं की ओर से एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट ट्रायल कोर्ट में लिखित बहस दाखिल की जानी थी, लेकिन अब्दुल्ला के अधिवक्ताओं की ओर से सोमवार को लिखित बहस दाखिल नहीं की गई।
आजम की अपील पर अब 25 को होगी सुनवाई
सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां की अपील पर सोमवार को कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से स्थगन प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। अब इस मामले की सुनवाई 25 अक्तूबर को होगी। एडीओ सहकारिता अनिल चौहान ने शहजादनगर थाने में आजम खां के खिलाफ लोकसभा चुनाव के दौरान 2019 में नफरती भाषण देने का मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। सुनवाई के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट मजिस्ट्रेट ट्रायल ने आजम खां को 15 जुलाई को नफरती भाषण देने के मामले में दोषी मानते हुए दो साल की सजा व ढाई हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की सुनाई थी।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ आजम खां ने सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की है, जिस पर सुनवाई चल रही है। सहायक शासकीय अधिवक्ता सीमा सिंह राणा ने बताया कि बचाव पक्ष की ओर से स्थगन प्रार्थना पत्र दाखिल किया, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। अब इस मामले की सुनवाई 25 अक्तूबर को होगी।