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पूर्व चेयरमैन और ईओ पर चार्जशीट दाखिल
Rampur
Updated Wed, 23 Oct 2013 05:43 AM IST
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रामपुर। बसपा सरकार में नगर पालिका में हुई 22 ड्राइवरों की भरती के मामले में जेल में बंद पूर्व पालिकाध्यक्ष सरदार जावेद खां की मुश्किल कम होती नजर नहीं आ रही हैं। पुलिस ने इस मामले की तफ्तीश करते हुए मामले की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। पुलिस ने पूर्व चेयरमैन के साथ ही तत्कालीन ईओ नबी जान कु रैशी समेत कई और को आरोपी बनाया गया है।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी शंहशाह वली ने बसपा सरकार में हुए चालक भरती घोटाले में शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले की तफ्तीश शुरू की। मामले की तफ्तीश सीओ सिटी आले हसन को सौंपी गई। मामले की तफ्तीश शुरू होते ही पुलिस ने पूर्व पालिकाध्यक्ष पर शिकंजा कस दिया था,जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की भी शरण ली थी। अब इस मामले की तफ्तीश पुलिस ने पूरी कर ली है। सीओ सिटी आले हसन ने बताया कि मामले की तफ्तीश पूरी हो गई है,जिसमें पूर्व पालिकाध्यक्ष सरदार जावेद खां के खिलाफ पर्याप्त सुबूत मिले हैं। तफ्तीश में तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार राय की जांच रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही उनके बयान भी लिए गए हैं। सीओ सिटी के मुताबिक मामले की तफ्तीश पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल कोर्ट में दाखिल कर दी गई है। जो आरोपी बाहर हैं उनकी जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।
क्या है मामला
बहुजन समाज पार्टी क ी सरकार में वर्ष 2009 में नगर पालिका रामपुर में 22 चालकों की भरती में घपले का मामला सामने आया था। सभासदों की शिकायत के आधार पर इस मामले की जांच तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट राजेश राय ने की और उन्होंने अपनी जांच में 22 चालकों की भरती में धांधली की पुषिट पाई थी,जिसके बाद मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। शासन ने इस रिपोर्ट के आधार पर ही सरदार जावेद खां के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारी भी सीज कर दिए थे। बसपा सरकार जाने के बाद सपा सरकार आते ही इस मामले की रिपोर्ट अधिशासी अधिकारी शंहशाह वली ने तत्कालीन पालिकाध्यक्ष सरदार जावेद खां और ईओ नबीजान कुरैशी समेत कई लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी।
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आंख बंद कर की गई थी चालकों की भरती
रामपुर। बसपा सरकार में 22 चालकों की भरती आंख बंद कर की गई थी। पुलिस की तफ्तीश में इसका उल्लेख किया गया है। पुलिस की तफ्तीश के मुताबिक 22 चालकों के लिए 144 आवेदक आए थे,जिसमें जांच में पाया गया कि 144 अभ्यर्थियों के आवेदन लिए गए थे। जबकि मात्र 34 अभ्यर्थियों के ही हस्ताक्षर मिले है। इसके बावजूद 134 अभ्यर्थियों को अंक दिए गए। राशिद नाम के व्यक्ति को नियुक्त किया गया, जबकि अभ्यर्थियों की सूची में इनका नाम ही नहीं है। यही नहीं इन 22 चालकों से की ड्राइविंग टेस्ट भी नहीं लिया गया था। मामला पूरी तरह से अवैध पाया गया है।
इनके खिलाफ दर्ज हुई चार्जशीट
पूर्व ईओ नबीजान कुरैशी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी एके सक्सेना, कर अधीक्षक गणेश प्रसाद, सेवानिृत्त कर अधीक्षक असद उल्ला, सहायक लेखाधिकारी अरविंद सक्सेना, लेखाधिकारी कमल कुमार शर्मा।
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नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी शंहशाह वली ने बसपा सरकार में हुए चालक भरती घोटाले में शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले की तफ्तीश शुरू की। मामले की तफ्तीश सीओ सिटी आले हसन को सौंपी गई। मामले की तफ्तीश शुरू होते ही पुलिस ने पूर्व पालिकाध्यक्ष पर शिकंजा कस दिया था,जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की भी शरण ली थी। अब इस मामले की तफ्तीश पुलिस ने पूरी कर ली है। सीओ सिटी आले हसन ने बताया कि मामले की तफ्तीश पूरी हो गई है,जिसमें पूर्व पालिकाध्यक्ष सरदार जावेद खां के खिलाफ पर्याप्त सुबूत मिले हैं। तफ्तीश में तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार राय की जांच रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही उनके बयान भी लिए गए हैं। सीओ सिटी के मुताबिक मामले की तफ्तीश पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल कोर्ट में दाखिल कर दी गई है। जो आरोपी बाहर हैं उनकी जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।
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क्या है मामला
बहुजन समाज पार्टी क ी सरकार में वर्ष 2009 में नगर पालिका रामपुर में 22 चालकों की भरती में घपले का मामला सामने आया था। सभासदों की शिकायत के आधार पर इस मामले की जांच तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट राजेश राय ने की और उन्होंने अपनी जांच में 22 चालकों की भरती में धांधली की पुषिट पाई थी,जिसके बाद मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। शासन ने इस रिपोर्ट के आधार पर ही सरदार जावेद खां के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारी भी सीज कर दिए थे। बसपा सरकार जाने के बाद सपा सरकार आते ही इस मामले की रिपोर्ट अधिशासी अधिकारी शंहशाह वली ने तत्कालीन पालिकाध्यक्ष सरदार जावेद खां और ईओ नबीजान कुरैशी समेत कई लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी।
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आंख बंद कर की गई थी चालकों की भरती
रामपुर। बसपा सरकार में 22 चालकों की भरती आंख बंद कर की गई थी। पुलिस की तफ्तीश में इसका उल्लेख किया गया है। पुलिस की तफ्तीश के मुताबिक 22 चालकों के लिए 144 आवेदक आए थे,जिसमें जांच में पाया गया कि 144 अभ्यर्थियों के आवेदन लिए गए थे। जबकि मात्र 34 अभ्यर्थियों के ही हस्ताक्षर मिले है। इसके बावजूद 134 अभ्यर्थियों को अंक दिए गए। राशिद नाम के व्यक्ति को नियुक्त किया गया, जबकि अभ्यर्थियों की सूची में इनका नाम ही नहीं है। यही नहीं इन 22 चालकों से की ड्राइविंग टेस्ट भी नहीं लिया गया था। मामला पूरी तरह से अवैध पाया गया है।
इनके खिलाफ दर्ज हुई चार्जशीट
पूर्व ईओ नबीजान कुरैशी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी एके सक्सेना, कर अधीक्षक गणेश प्रसाद, सेवानिृत्त कर अधीक्षक असद उल्ला, सहायक लेखाधिकारी अरविंद सक्सेना, लेखाधिकारी कमल कुमार शर्मा।