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बिना पढ़े बीकॉम की डिग्री हासिल करती छात्राएं
Rampur
Updated Fri, 05 Jul 2013 05:31 AM IST
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रामपुर। रामपुर भले ही उच्च शिक्षा की ओर अपने कदम बढ़ा रहा हो, लेकिन सरकारी डिग्री कालेज में पढ़ाई का बुरा हाल है। राजकीय महिला डिग्री कालेज में छात्राएं बिना पढ़ाई के ही बीकॉम की डिग्री हासिल कर रही हैं। इस बार भी कालेज में वह बिना पढ़े ही डिग्री हासिल करेंगी क्योंकि यहां पर अभी तक बीकाम संकाय में किसी शिक्षक की व्यवस्था नहीं है। इससे छात्राएं परेशान हैं।
रामपुर में छात्राओं के लिए मात्र एक ही सरकारी डिग्री कालेज है। राजकीय महिला डिग्री कालेज की बात की जाए तो इस कालेज की हालत काफी खराब है। यहां पर सरकार ने पांच साल पहले लड़कियों को कामर्स की पढ़ाई के लिए बीकॉम संकाय चालू कराया था। बीकॉम संकाय चालू होने के बाद यहां पर 160 सीटें दी गई। इन पर छात्राओं ने प्रवेश भी लिया। संकाय तो चालू कर दिया गया, लेकिन प्रोफेसर के पदों को क्रियान्वित नहीं किया गया। मसलन, यहां उच्च शिक्षा विभाग ने कोई प्रोफेसर ही तैनात नहीं किया। बाद में जब कालेज प्रशासन ने लिखा पढ़ी की तो वैकल्पिक तौर पर रजा डिग्री कालेज से प्रोफेसरों की व्यवस्था की गई, लेकिन यह व्यवस्था भी ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकी। पिछले दो साल से छात्राएं यहां बिना पढ़ाई के ही बीकॉम की डिग्री हासिल कर रही हैं। कालेज में प्रोफेसर न होने की वजह से छात्राओं को या तो ट्यूशन का सहारा लेना पड़ता है या फिर कोचिंग के जरिए पढ़ाई कर रही हैं। इस साल भी कुछ इसी तरह यहां पढ़ाई कराई जाएगी।
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रामपुर में छात्राओं के लिए मात्र एक ही सरकारी डिग्री कालेज है। राजकीय महिला डिग्री कालेज की बात की जाए तो इस कालेज की हालत काफी खराब है। यहां पर सरकार ने पांच साल पहले लड़कियों को कामर्स की पढ़ाई के लिए बीकॉम संकाय चालू कराया था। बीकॉम संकाय चालू होने के बाद यहां पर 160 सीटें दी गई। इन पर छात्राओं ने प्रवेश भी लिया। संकाय तो चालू कर दिया गया, लेकिन प्रोफेसर के पदों को क्रियान्वित नहीं किया गया। मसलन, यहां उच्च शिक्षा विभाग ने कोई प्रोफेसर ही तैनात नहीं किया। बाद में जब कालेज प्रशासन ने लिखा पढ़ी की तो वैकल्पिक तौर पर रजा डिग्री कालेज से प्रोफेसरों की व्यवस्था की गई, लेकिन यह व्यवस्था भी ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकी। पिछले दो साल से छात्राएं यहां बिना पढ़ाई के ही बीकॉम की डिग्री हासिल कर रही हैं। कालेज में प्रोफेसर न होने की वजह से छात्राओं को या तो ट्यूशन का सहारा लेना पड़ता है या फिर कोचिंग के जरिए पढ़ाई कर रही हैं। इस साल भी कुछ इसी तरह यहां पढ़ाई कराई जाएगी।
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