{"_id":"59a2efd54f1c1b1c0b8b45db","slug":"91503850453-rampur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेब के दाम गिरे, ढुलाई भी रूकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेब के दाम गिरे, ढुलाई भी रूकी
Updated Sun, 27 Aug 2017 09:44 PM IST
विज्ञापन
कुमारसैन (रामपुर बुशहर)।
हिमाचल के ऊपरी क्षेत्रों में सेब सीजन चरम पर है बागवान दिन-रात मेहनत कर फसल मंडियों तक पहुंचा रहे थे। लेकिन डेरा प्रमुख की भड़की आग से सेब की ढुलाई व्यवस्था गड़बड़ा गई है। सेबों को पकने पर ज्यादा दिनों तक पेड़ों पर नहीं रखा जा सकता। इससे सेब के खराब होने का खतरा रहता है। लदानी सेब खरीदने से कतरा रहे हैं। इससे सेब के दाम में भारी गिरावट आई है। गत सप्ताह जो सेब 1500 से 2000 के बीच बिक रहा था, वह अब 1000 से 1500 तक रुपये प्रति पेटी तक पहुंच गया है। हालात जल्द नहीं सुधरे तो सेब के रेट और नीचे जा सकते हैं।
स्थानीय मंडियों में सेब काफी मात्रा मेें आ रहा है। पंजाब और हरियाणा में स्थिति ठीक नहीं होने के कारण बाहरी राज्यों के लिए सेब ढुलाई पर असर पड़ा है। नारकंडा के आढ़ती लाल चंद डोगरा और मनीष मखैक के अनुसार लोडिंग न होने से उनके गोदाम भरे गए हैं। बगीचों में सेब तुड़ान ज्यादा दिनों तक नहीं रोका जा सकता। सरकार को जल्द ही स्थिति सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। शिलारू में एससीओ ट्रेडर के आढ़ती रोशन लाल श्याम ने बताया कि लदानियों ने जो गाड़ियां भेजी हैं, वो तय समय में नहीं पहुंच रही है। खाली गाड़ियां भी बाहरी राज्यों में फंसी हुई है, जिससे यहां पर लदानियों को भी बड़े वाहन नहीं मिल रहे। जेएमडी ट्रेडर एकांतबाड़ी के आढ़ती दलीप कैंथला ने बताया कि पंचकूला कांड के बाद परिवहन व्यवस्था गड़बड़ाने से लदानी सेब खरीदने से कतरा रहे हैं। इससे सेब के दाम में गिरावट आई है। बागवान कहते हैं कि पहले बाढ़ ने परेशानी बढ़ाई। अब बाकी कसर पंचकूला कांड ने पूरी कर दी है। अगर जल्द हालात नहीं सुधरे तो पूरे साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। पंचायत समिति नारकंडा की अध्यक्ष मीरा शर्मा, प्रधान परिषद नारकंडा के अध्यक्ष अमर सिंह नलवा, नगर पंचायत ब्राह्मण सभा अध्यक्ष पंडित शशिपाल डोगरा, नारकंडा की अध्यक्ष कमलेश, कैंथला खंड के प्रधानों, बीडीसी सदस्यों और स्थानीय बागवानों ने केंद्र सरकार से मांग उठाई है कि जल्द स्थिति को सुधारा जाए। सेब ढुलाई के लिए परिवहन व्यवस्था सुचारू की जाए ताकि सेब के कारोबार पर इसका बुरा असर न पड़े।
विज्ञापन
हिमाचल के ऊपरी क्षेत्रों में सेब सीजन चरम पर है बागवान दिन-रात मेहनत कर फसल मंडियों तक पहुंचा रहे थे। लेकिन डेरा प्रमुख की भड़की आग से सेब की ढुलाई व्यवस्था गड़बड़ा गई है। सेबों को पकने पर ज्यादा दिनों तक पेड़ों पर नहीं रखा जा सकता। इससे सेब के खराब होने का खतरा रहता है। लदानी सेब खरीदने से कतरा रहे हैं। इससे सेब के दाम में भारी गिरावट आई है। गत सप्ताह जो सेब 1500 से 2000 के बीच बिक रहा था, वह अब 1000 से 1500 तक रुपये प्रति पेटी तक पहुंच गया है। हालात जल्द नहीं सुधरे तो सेब के रेट और नीचे जा सकते हैं।
स्थानीय मंडियों में सेब काफी मात्रा मेें आ रहा है। पंजाब और हरियाणा में स्थिति ठीक नहीं होने के कारण बाहरी राज्यों के लिए सेब ढुलाई पर असर पड़ा है। नारकंडा के आढ़ती लाल चंद डोगरा और मनीष मखैक के अनुसार लोडिंग न होने से उनके गोदाम भरे गए हैं। बगीचों में सेब तुड़ान ज्यादा दिनों तक नहीं रोका जा सकता। सरकार को जल्द ही स्थिति सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। शिलारू में एससीओ ट्रेडर के आढ़ती रोशन लाल श्याम ने बताया कि लदानियों ने जो गाड़ियां भेजी हैं, वो तय समय में नहीं पहुंच रही है। खाली गाड़ियां भी बाहरी राज्यों में फंसी हुई है, जिससे यहां पर लदानियों को भी बड़े वाहन नहीं मिल रहे। जेएमडी ट्रेडर एकांतबाड़ी के आढ़ती दलीप कैंथला ने बताया कि पंचकूला कांड के बाद परिवहन व्यवस्था गड़बड़ाने से लदानी सेब खरीदने से कतरा रहे हैं। इससे सेब के दाम में गिरावट आई है। बागवान कहते हैं कि पहले बाढ़ ने परेशानी बढ़ाई। अब बाकी कसर पंचकूला कांड ने पूरी कर दी है। अगर जल्द हालात नहीं सुधरे तो पूरे साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। पंचायत समिति नारकंडा की अध्यक्ष मीरा शर्मा, प्रधान परिषद नारकंडा के अध्यक्ष अमर सिंह नलवा, नगर पंचायत ब्राह्मण सभा अध्यक्ष पंडित शशिपाल डोगरा, नारकंडा की अध्यक्ष कमलेश, कैंथला खंड के प्रधानों, बीडीसी सदस्यों और स्थानीय बागवानों ने केंद्र सरकार से मांग उठाई है कि जल्द स्थिति को सुधारा जाए। सेब ढुलाई के लिए परिवहन व्यवस्था सुचारू की जाए ताकि सेब के कारोबार पर इसका बुरा असर न पड़े।
विज्ञापन