{"_id":"59a076324f1c1b1e3b8b4a08","slug":"71503688242-rampur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"माता-पिता और गुरु के चरणों से सब सुलभ: विजय कौशल जी महाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माता-पिता और गुरु के चरणों से सब सुलभ: विजय कौशल जी महाराज
Updated Sat, 26 Aug 2017 12:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माता-पिता और गुरु के चरणों से सब सुलभ
रामपुर। श्रीराम कथा में कथा व्यास ने माता-पिता व गुरु के महत्व को समझाया। कथा व्यास ने कहा कि दुनिया के सब सुख और कष्टों का निवारण माता-पिता व गुरु के चरणों में ही है।
उत्सव पैलेस में चल रही श्रीराम कथा में कथा व्यास विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम स्वयं प्रात: उठकर माता-पिता व गुरु के चरणों में नमन करते थे। संसार में व्यवहार में परमार्थ और प्रभु का भजन एकांत में ही करना चाहिए। जो संसार को छोड़कर परमात्मा के लिए पागल होता है और अपना पूर्ण समर्पण करता है। उसके कष्ट निवारण के लिए प्रभु स्वयं दौड़े चले आते हैं। जिस प्रकार द्रौपदी और मीरा के संकट में भगवान श्रीकृष्ण और सबरी के उद्धार के लिए प्रभु श्रीराम स्वयं पहुंच गए थे। कथा व्यास ने कहा कि सुखी जीवन के लिए बाल्यकाल में सिर पर माता-पिता, युवा अवस्था में गुरु और बुढ़ापे में संतान का साया अपने ऊपर रखना चाहिए। कथा में किशोरी लाल, गोविंद, राजकुमार शौरी, श्याम गुप्ता, वीके जौहरी, रश्मि, सरिता, मधु, मिथलेश, रामदत्त शर्मा, रामबाबू, कपिल, अशोक सिंह, आदित्य शर्मा, अनिल राठोर, सतीश भाटिया, नरेंद्र मिश्रा, अनिल वशिष्ठ, सुभाष नंदा, मुनीश चंद्र शर्मा, राममुरारी लाल, निशा, प्रतिमा, राजीव, कृष्ण आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
रामपुर। श्रीराम कथा में कथा व्यास ने माता-पिता व गुरु के महत्व को समझाया। कथा व्यास ने कहा कि दुनिया के सब सुख और कष्टों का निवारण माता-पिता व गुरु के चरणों में ही है।
उत्सव पैलेस में चल रही श्रीराम कथा में कथा व्यास विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम स्वयं प्रात: उठकर माता-पिता व गुरु के चरणों में नमन करते थे। संसार में व्यवहार में परमार्थ और प्रभु का भजन एकांत में ही करना चाहिए। जो संसार को छोड़कर परमात्मा के लिए पागल होता है और अपना पूर्ण समर्पण करता है। उसके कष्ट निवारण के लिए प्रभु स्वयं दौड़े चले आते हैं। जिस प्रकार द्रौपदी और मीरा के संकट में भगवान श्रीकृष्ण और सबरी के उद्धार के लिए प्रभु श्रीराम स्वयं पहुंच गए थे। कथा व्यास ने कहा कि सुखी जीवन के लिए बाल्यकाल में सिर पर माता-पिता, युवा अवस्था में गुरु और बुढ़ापे में संतान का साया अपने ऊपर रखना चाहिए। कथा में किशोरी लाल, गोविंद, राजकुमार शौरी, श्याम गुप्ता, वीके जौहरी, रश्मि, सरिता, मधु, मिथलेश, रामदत्त शर्मा, रामबाबू, कपिल, अशोक सिंह, आदित्य शर्मा, अनिल राठोर, सतीश भाटिया, नरेंद्र मिश्रा, अनिल वशिष्ठ, सुभाष नंदा, मुनीश चंद्र शर्मा, राममुरारी लाल, निशा, प्रतिमा, राजीव, कृष्ण आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन