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बिजली बिलों का 60 करोड़ दबाकर आठ हजार बकाएदार हो गए गायब
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रामपुर। शहर में विद्युत निगम का आठ हजार उपभोक्ताओं पर करीब 60 करोड़ से ज्यादा बकाया है। विद्युत निगम के पास इन बकायेदारों का रिकॉर्ड भी नहीं है। थक हारकर विद्युत निगम ने ऐेसे बकायेदारों की बिलिंग रोक दी है। विद्युत निगम ने कहा कि बकायेदारों से वसूली के लिए तहसील को आरसी भेजी जाएगी।
शहर में करीब आठ हजार घरेलूू और कामर्शियल कनेक्शन ऐसे हैं, जो मौके पर नहीं हैं। तमाम लोगों के कनेक्शन कट चुके हैं। कुछ कनेक्शन ऐसे हैं, जिनका नाम और पता ही फर्जी है। अरसे से ऐसे बकायेदार विद्युत निगम के लिए जी का जंजाल बने हुए हैं। ऐसे बकायेदार जिनका कोई ठिकाना और अता-पता नहीं है, इन कनेक्शनों को विद्युत निगम ने सिस्टम में हटाने का निर्णय लिया है। शहर में 73 हजार बिजली उपभोक्ता हैं, जिसमें 62 हजार घरेलू और 11 हजार कामर्शियल कनेक्शन हैं।
अरसे पहले जब कनेक्शन ऑनलाइन नहीं होते थे, उस समय लोग फर्जी आईडी और फोटो लगाकर कनेक्शन ले लेते थे। लापता बकायेदारों में अधिकांश मामले ऐसे हैं, जिसमें फोटो किसी की और नाम किसी का है। कनेक्शन कहीं और लगा था तो पता कहीं और का था। वर्ष 2012 में अभियान चलाकर ऐसे करीब आठ हजार मामले ट्रेस किए गए थे। इन मामलों को ट्रेस करने के बाद ऐसे कनेक्शनों की जांच भी कराई गई। लेकिन, ऐसे कनेक्शनों का पता नहीं चला, जिनकी बिलिंग उसी समय बंद कर दी गई थी। लेकिन ऐसे कनेक्शन को सिस्टम से डिलीट नहीं किया गया है। नतीजतन अभी तक कनेक्शनों के बिल दर्शाए जा रहे हैं।
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ऐसे में करीब आठ हजार बकायेदार कनेक्शन धारकों को ढूंढने के पिछले तीन माह से अभियान चलाया गया। लेकिन, ऐसा कोई भी कनेक्शन ट्रेस नहीं हो पाया। अब ऐसे कनेक्शनों को सिस्टम से डिलीट करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे लापता कनेक्शन धारकों को ढूंढने के लिए तहसील को आरसी भेजने का निर्णय लिया गया है।
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शहर में करीब आठ हजार घरेलूू और कामर्शियल कनेक्शन ऐसे हैं, जो मौके पर नहीं हैं। तमाम लोगों के कनेक्शन कट चुके हैं। कुछ कनेक्शन ऐसे हैं, जिनका नाम और पता ही फर्जी है। अरसे से ऐसे बकायेदार विद्युत निगम के लिए जी का जंजाल बने हुए हैं। ऐसे बकायेदार जिनका कोई ठिकाना और अता-पता नहीं है, इन कनेक्शनों को विद्युत निगम ने सिस्टम में हटाने का निर्णय लिया है। शहर में 73 हजार बिजली उपभोक्ता हैं, जिसमें 62 हजार घरेलू और 11 हजार कामर्शियल कनेक्शन हैं।
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अरसे पहले जब कनेक्शन ऑनलाइन नहीं होते थे, उस समय लोग फर्जी आईडी और फोटो लगाकर कनेक्शन ले लेते थे। लापता बकायेदारों में अधिकांश मामले ऐसे हैं, जिसमें फोटो किसी की और नाम किसी का है। कनेक्शन कहीं और लगा था तो पता कहीं और का था। वर्ष 2012 में अभियान चलाकर ऐसे करीब आठ हजार मामले ट्रेस किए गए थे। इन मामलों को ट्रेस करने के बाद ऐसे कनेक्शनों की जांच भी कराई गई। लेकिन, ऐसे कनेक्शनों का पता नहीं चला, जिनकी बिलिंग उसी समय बंद कर दी गई थी। लेकिन ऐसे कनेक्शन को सिस्टम से डिलीट नहीं किया गया है। नतीजतन अभी तक कनेक्शनों के बिल दर्शाए जा रहे हैं।
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ऐसे में करीब आठ हजार बकायेदार कनेक्शन धारकों को ढूंढने के पिछले तीन माह से अभियान चलाया गया। लेकिन, ऐसा कोई भी कनेक्शन ट्रेस नहीं हो पाया। अब ऐसे कनेक्शनों को सिस्टम से डिलीट करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे लापता कनेक्शन धारकों को ढूंढने के लिए तहसील को आरसी भेजने का निर्णय लिया गया है।