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ऐतिहासिक धरोहरों की हिफाजत के लिए संसद में कानून बनाए सरकार:आजम
Updated Wed, 18 Oct 2017 11:51 PM IST
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ऐतिहासिक धरोहरों की हिफाजत के लिए संसद में कानून बनाए सरकार:आजम
रामपुर। पूर्व मंत्री आजम खां ने कहा कि ताजमहल को गिराने की साजिश रची जा रही है। देश में वैसा ही माहौल बनाया जा रहा है, जैसा बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए बनाया गया था। ऐसे में ताजमहल को डायनामाइट से उड़ाया जाना लगभग तय है। यदि सरकार वास्तव में ताजमहल को बचाना चाहती है तो ऐतिहासिक धरोहरों की हिफाजत के लिए संसद में कानून बनाए।
बुधवार को आजम खां ने अपने आवास पर पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने ताजमहल को लेकर कहा कि देश का माहौल सही नहीं है। हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के स्टे, एकता परिषद के प्रस्ताव और उस वक्त के मुख्यमंत्री का हाईकोर्ट में हलफनामा होने के बावजूद छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को डायनामाइट से उड़ा दिया गया। अब ताजमहल को लेकर लीपापोती हो रही है। क्योंकि, पूरी दुनिया का दबाव है और यह दुनिया का सातवां अजूबा है, इसलिए बचा हुआ है। लेकिन, ताजमहल को भी डायनामाइट से उड़ाया जाना लगभग तय है। क्योंकि, पीएन ओक ने अपनी किताब में जो कुछ लिखा है, भारत की फासिस्ट ताकतों और आरएसएस ने उस पर अमल किया है। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि ताजमहल पहले शिवजी का मंदिर था। जब मंदिर के नाम पर बाबरी मस्जिद को गिराया जा सकता है, तो फिर कोई इबादतगाह या तारीखी जगह नहीं बच सकती। अगर वाकई प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री संजीदा हैं, जो कि नहीं हैं। क्योंकि, ये लोग जो कराना चाहते हैं, उसे अलग से कहते हैं। फिर उसकी निंदा करते हैं। अब चाहें गोहत्या, अयोध्या, दंगे फसाद का मामला हो। आज पूरी ताकत आरएसएस, भाजपा के पास है। गुलामी की याद दिलाने वालों में सिर्फ मुगल ही नहीं, बल्कि अंग्रेज भी थे। मुगलों और अंग्रेजों की तमाम यादें, उनके नाम की प्रतिमाएं हटा दी जाती हों, सड़कों और इमारतों के नाम बदल दिए जाते हों, तो फिर दिल्ली का लालकिला, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन क्यों नहीं गिरना चाहिए? हम अपना संसद भवन बनाएंगे। सबकुछ अपना बनाएंगे। अपनी सभ्यता के अनुसार बनाएंगे। क्यों सात समंदर पार के और एक हजार घोड़ों पर बैठे मुगलों की सभ्यता रखी जाए? यदि कहीं भी कानून की कोई बात है तो संसद में कानून पास होना चाहिए कि जितनी भी राष्ट्रीय, ऐतिहासिक धरोहरें हैं, सरकार उनकी हिफाजत करेगी। ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में अनाप शनाप बातें करने वालों की जगह खुला आसमान नहीं, बल्कि जेल होनी चाहिए, सरकार को ऐसे लोगों के लिए अलग से कानून बनाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तब तो हम समझेंगे के बादशाह और छोटे बादशाह की बात में दम है। अन्यथा दिखावा है और ताजमहल को गिराने की साजिश है। ये उसी तरह टूट जाना है, जिस तरह छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। ये सारी बातें 2019 के चुनाव के मद्देनजर की जा रही हैं।
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रामपुर। पूर्व मंत्री आजम खां ने कहा कि ताजमहल को गिराने की साजिश रची जा रही है। देश में वैसा ही माहौल बनाया जा रहा है, जैसा बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए बनाया गया था। ऐसे में ताजमहल को डायनामाइट से उड़ाया जाना लगभग तय है। यदि सरकार वास्तव में ताजमहल को बचाना चाहती है तो ऐतिहासिक धरोहरों की हिफाजत के लिए संसद में कानून बनाए।
बुधवार को आजम खां ने अपने आवास पर पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने ताजमहल को लेकर कहा कि देश का माहौल सही नहीं है। हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के स्टे, एकता परिषद के प्रस्ताव और उस वक्त के मुख्यमंत्री का हाईकोर्ट में हलफनामा होने के बावजूद छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को डायनामाइट से उड़ा दिया गया। अब ताजमहल को लेकर लीपापोती हो रही है। क्योंकि, पूरी दुनिया का दबाव है और यह दुनिया का सातवां अजूबा है, इसलिए बचा हुआ है। लेकिन, ताजमहल को भी डायनामाइट से उड़ाया जाना लगभग तय है। क्योंकि, पीएन ओक ने अपनी किताब में जो कुछ लिखा है, भारत की फासिस्ट ताकतों और आरएसएस ने उस पर अमल किया है। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि ताजमहल पहले शिवजी का मंदिर था। जब मंदिर के नाम पर बाबरी मस्जिद को गिराया जा सकता है, तो फिर कोई इबादतगाह या तारीखी जगह नहीं बच सकती। अगर वाकई प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री संजीदा हैं, जो कि नहीं हैं। क्योंकि, ये लोग जो कराना चाहते हैं, उसे अलग से कहते हैं। फिर उसकी निंदा करते हैं। अब चाहें गोहत्या, अयोध्या, दंगे फसाद का मामला हो। आज पूरी ताकत आरएसएस, भाजपा के पास है। गुलामी की याद दिलाने वालों में सिर्फ मुगल ही नहीं, बल्कि अंग्रेज भी थे। मुगलों और अंग्रेजों की तमाम यादें, उनके नाम की प्रतिमाएं हटा दी जाती हों, सड़कों और इमारतों के नाम बदल दिए जाते हों, तो फिर दिल्ली का लालकिला, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन क्यों नहीं गिरना चाहिए? हम अपना संसद भवन बनाएंगे। सबकुछ अपना बनाएंगे। अपनी सभ्यता के अनुसार बनाएंगे। क्यों सात समंदर पार के और एक हजार घोड़ों पर बैठे मुगलों की सभ्यता रखी जाए? यदि कहीं भी कानून की कोई बात है तो संसद में कानून पास होना चाहिए कि जितनी भी राष्ट्रीय, ऐतिहासिक धरोहरें हैं, सरकार उनकी हिफाजत करेगी। ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में अनाप शनाप बातें करने वालों की जगह खुला आसमान नहीं, बल्कि जेल होनी चाहिए, सरकार को ऐसे लोगों के लिए अलग से कानून बनाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तब तो हम समझेंगे के बादशाह और छोटे बादशाह की बात में दम है। अन्यथा दिखावा है और ताजमहल को गिराने की साजिश है। ये उसी तरह टूट जाना है, जिस तरह छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। ये सारी बातें 2019 के चुनाव के मद्देनजर की जा रही हैं।
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