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कुपोषण से सुपोषण की ओर: सुपोषण के साथ दिया आजीविका का आधार
Updated Fri, 02 Nov 2018 03:12 AM IST
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रामपुर। बचपन को कुपोषण से उबारकर सुपोषण की राह पर लाने वाले छह बच्चों को प्रोत्साहित किया गया। बच्चों को स्वच्छता किट, सुपोषण किट के साथ ही आजीविका के लिए उपहार दिया गया। जिससे भविष्य में उन्हें कुपोषण का सामना न करना पड़े।
विकास भवन में जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह की अध्यक्षता में कुपोषण से सुपोषण की ओर अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें कुपोषण की चपेट में आकर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने वाले बच्चों में से प्रत्येक ब्लॉक से एक-एक ऐसे बच्चे को चिह्नित किया गया जो कि अब कुपोषण के शिकंजे से बाहर निकल गया है। जिलाधिकारी ने कार्यक्रम की शुरुआत की और पोषण के महत्व के साथ ही कुपोषण की घातकता के बारे में भी बताया। इसके बाद बच्चों को सुपोषण किट में दलिया, मूंगफली, चने और गुढ़ दिया गया साथ ही स्वच्छता किट में साबुन, नेल कटर, कंघा, सीसा, हेयर ऑयल, क्रीम आदि सामग्री दी गई।
इसके साथ ही इन बच्चों से पांच बच्चों के अभिभावकों को एक-एक बकरी और एक अभिभावक को सिलाई मशीन दी गई। जिससे वो आजीविका का आधार बना सकें और दोबारा उनका बच्चा कुपोषण की चपेट में न आए। कार्यक्रम में दी गई सामग्री के लिए धनराशि अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपने स्तर से जुटाई और पांच-पांच हजार रुपये का सहयोग दिया। इस अवसर पर सीडीओ शिवेंद्र कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश कुमार, सीएमओ डा. सुबोध कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद खालिद, सूचना अधिकारी सुमित भारती आदि मौजूद रहे।
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इन बच्चों को दी गई किट व उपहार-
-मिलक के करीमगंज गांव के अंतरिक्ष, शाहबाद के महूनागर गांव की प्रियंका, बिलासपुर के मंसूरपुर गांव से माहीनूर, स्वार के दूंदावाला गांव से आरिस, सैदनगर के रतनपुरा शुमाली गांव की सामिया और चमरौआ के पंजाबनगर गांव के निक्कू।
कुपोषण की जंग के लिए बनाए गए सुपोषण योद्धा
रामपुर। कुपोषण से सुपोषण कार्यक्रम के दौरान सभी विभागों के अधिकारियों व कर्मियों को सुपोषण योद्धा का बैज भी दिया गया। सभी को सुपोषण योद्धा बनाकर उन्हें उनके क्षेत्र में कुपोषण को समाप्त करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं कार्यक्रम के दौरान गुब्बारे फोड़कर दीवाली मनाई गई।
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विकास भवन में जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह की अध्यक्षता में कुपोषण से सुपोषण की ओर अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें कुपोषण की चपेट में आकर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने वाले बच्चों में से प्रत्येक ब्लॉक से एक-एक ऐसे बच्चे को चिह्नित किया गया जो कि अब कुपोषण के शिकंजे से बाहर निकल गया है। जिलाधिकारी ने कार्यक्रम की शुरुआत की और पोषण के महत्व के साथ ही कुपोषण की घातकता के बारे में भी बताया। इसके बाद बच्चों को सुपोषण किट में दलिया, मूंगफली, चने और गुढ़ दिया गया साथ ही स्वच्छता किट में साबुन, नेल कटर, कंघा, सीसा, हेयर ऑयल, क्रीम आदि सामग्री दी गई।
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इसके साथ ही इन बच्चों से पांच बच्चों के अभिभावकों को एक-एक बकरी और एक अभिभावक को सिलाई मशीन दी गई। जिससे वो आजीविका का आधार बना सकें और दोबारा उनका बच्चा कुपोषण की चपेट में न आए। कार्यक्रम में दी गई सामग्री के लिए धनराशि अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपने स्तर से जुटाई और पांच-पांच हजार रुपये का सहयोग दिया। इस अवसर पर सीडीओ शिवेंद्र कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश कुमार, सीएमओ डा. सुबोध कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद खालिद, सूचना अधिकारी सुमित भारती आदि मौजूद रहे।
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इन बच्चों को दी गई किट व उपहार-
-मिलक के करीमगंज गांव के अंतरिक्ष, शाहबाद के महूनागर गांव की प्रियंका, बिलासपुर के मंसूरपुर गांव से माहीनूर, स्वार के दूंदावाला गांव से आरिस, सैदनगर के रतनपुरा शुमाली गांव की सामिया और चमरौआ के पंजाबनगर गांव के निक्कू।
कुपोषण की जंग के लिए बनाए गए सुपोषण योद्धा
रामपुर। कुपोषण से सुपोषण कार्यक्रम के दौरान सभी विभागों के अधिकारियों व कर्मियों को सुपोषण योद्धा का बैज भी दिया गया। सभी को सुपोषण योद्धा बनाकर उन्हें उनके क्षेत्र में कुपोषण को समाप्त करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं कार्यक्रम के दौरान गुब्बारे फोड़कर दीवाली मनाई गई।