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वसूली के खेल में उलझे कर्जमाफी के प्रमाण पत्र
Updated Thu, 12 Oct 2017 01:35 AM IST
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वसूली के खेल में उलझे कर्जमाफी के प्रमाण पत्र
रामपुर। योगी सरकार ने कर्ज माफ तो कर दिया गया,लेकिन सरकारी तंत्र ने किसानों को ऐसा उलझाया कि उनके हाथ प्रमाण पत्र हाथ नहीं आ रहे हैं। किसान लेखपालों से लेकर तहसील और फिर बैंकों के ही चक्कर लगा रहे हैं,लेकिन किसानों के हाथ में प्रमाण पत्र नहीं आ रहे हैं,जिसकी वजह से किसान परेशान हैं,लेकिन अफसर उनकी सुध नहीं ले रहे हैं।
योगी सरकार ने प्रदेश के किसानों का एक लाख रुपये तक का ऋण माफ किया है। इसके तहत रामपुर में 1.12 लाख किसानों का कर्ज माफ होना है। इसके तहत पहले चरण में 19 हजार जबकि दूसरे चरण में 16 हजार किसानों का ऋण माफ हुआ है। किसानों का ऋण तो माफ कर दिया गया है,लेकिन अब किसान प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे हैं। प्रमाण पत्र के लिए किसान कभी लेखपालों के पास जा रहे हैं तो कभी बैंकों के पास तो कभी तहसील तक का रास्ता नाप रहे हैं,लेकिन हकीकत यह है कि उनके हाथ प्रमाण पत्र नहीं आ रहे हैं,जिसकी वजह से दिक्कत हो रही है। किसान प्रमाण पत्र के लिए लेखपाल के पास जाते हैं तो लेखपाल बैंक पर टाल देते हैं और जब बैंक के पास जाते हैं बैंक के अफसर तहसील वालों पर टाल देते हैं। कुल मिलाकर यहां काफी दिक्कत है। इसको लेकर किसानों में गुस्सा भी है,लेकिन वह खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। किसानों की मानें तो लेखपाल और फिर बैंक वालों तक सुविधा शुल्क तक की मांग कर रहे हैं। फिलहाल उनके सामने बड़ी मुश्किल आन पड़ी है,लेकिन अफसर इसको लेकर खामोश बैठे हुए हैं।
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रामपुर। योगी सरकार ने कर्ज माफ तो कर दिया गया,लेकिन सरकारी तंत्र ने किसानों को ऐसा उलझाया कि उनके हाथ प्रमाण पत्र हाथ नहीं आ रहे हैं। किसान लेखपालों से लेकर तहसील और फिर बैंकों के ही चक्कर लगा रहे हैं,लेकिन किसानों के हाथ में प्रमाण पत्र नहीं आ रहे हैं,जिसकी वजह से किसान परेशान हैं,लेकिन अफसर उनकी सुध नहीं ले रहे हैं।
योगी सरकार ने प्रदेश के किसानों का एक लाख रुपये तक का ऋण माफ किया है। इसके तहत रामपुर में 1.12 लाख किसानों का कर्ज माफ होना है। इसके तहत पहले चरण में 19 हजार जबकि दूसरे चरण में 16 हजार किसानों का ऋण माफ हुआ है। किसानों का ऋण तो माफ कर दिया गया है,लेकिन अब किसान प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे हैं। प्रमाण पत्र के लिए किसान कभी लेखपालों के पास जा रहे हैं तो कभी बैंकों के पास तो कभी तहसील तक का रास्ता नाप रहे हैं,लेकिन हकीकत यह है कि उनके हाथ प्रमाण पत्र नहीं आ रहे हैं,जिसकी वजह से दिक्कत हो रही है। किसान प्रमाण पत्र के लिए लेखपाल के पास जाते हैं तो लेखपाल बैंक पर टाल देते हैं और जब बैंक के पास जाते हैं बैंक के अफसर तहसील वालों पर टाल देते हैं। कुल मिलाकर यहां काफी दिक्कत है। इसको लेकर किसानों में गुस्सा भी है,लेकिन वह खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। किसानों की मानें तो लेखपाल और फिर बैंक वालों तक सुविधा शुल्क तक की मांग कर रहे हैं। फिलहाल उनके सामने बड़ी मुश्किल आन पड़ी है,लेकिन अफसर इसको लेकर खामोश बैठे हुए हैं।
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