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पूर्व पालिकाध्यक्ष और आजम के मीडिया प्रभारी का कोर्ट में सरेंडर, मिली जमानत
Updated Tue, 14 Aug 2018 01:13 AM IST
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रामपुर। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का पुतला फूंकने के मामले में पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर अहमद खां और आजम खां के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू ने गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद सोमवार को अदालत में समर्पण कर दिया। इसके बाद अदालत में उनकी जमानत याचिका दायर की गई, जिसे मंजूरी मिल गई।
मामला 2008 का है। बसपा सरकार में सपाइयों ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का पुतला फूंका था,जिसकी रिपोर्ट शहर कोतवाली पुलिस ने पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर अहमद खां, पूर्व मंत्री आजम खां के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू समेत सात लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद मामले की तफ्तीश की और चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। इस मामले में सपा सरकार आने के बाद सपाइयों पर दर्ज मामलों को वापस लेने के आदेश दिए गए थे,जिसके बाद 2015 में आरोपियों के अधिवक्ता की ओर से शासनादेश की प्रति अदालत में जमा की। इसके बाद भी यह मामला चलता रहा। दस अगस्त को कोर्ट की ओर से पूर्व पालिकाध्यक्ष और आजम खां के मीडिया प्रभारी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया। गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद सोमवार को दोनों ने अपने अधिवक्ता आरिफ खां के माध्यम से कोर्ट में सरेंडर किया। कोर्ट में सरेंडर के बाद दोनों को हिरासत में ले लिया गया,इसके बाद उनके अधिवक्ता की ओर से जमानत के लिए याचिका दायर की गई। जमानत याचिका का अभियोजन पक्ष की ओर से विरोध किया गया,जबकि पूर्व पालिकाध्यक्ष के अधिवक्ता ने जमानत पर अपना तर्क दिया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने सोमवार की शाम को दोनों को बीस-बीस हजार रुपये के पर्सनल बांड पर जमानत पर रिहा करने के आदेश कर दिए। अधिवक्ता आरिफ खां ने बताया कि कोर्ट ने जमानत याचिका पर पहले फैसला सुरक्षित कर लिया था,लेकिन बाद में शाम को कोर्ट ने दोनों को जमानत पर रिहा करने के आदेश कर दिए।
पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है: आजम
रामपुर। मायावती का पुतला फूंकने के मामले में कोर्ट में सरेंडर करनेे वाले अजहर खां और फसाहत अली खां को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने की कोशिश की सूचना पर पूर्व मंत्री आजम खां भी अपने समर्थकों के साथ कोर्ट परिसर पहुंच गए। उन्होंने पुलिस पर राजनीतिक दबाव में कार्य करने का आरोप लगाया। कहा कि जब कोई कोर्ट में कस्टडी में है तो उसे पुलिस गिरफ्तार करने की कोशिश कैसे कर सकती है। वैसे भी यह राजनीतिक मामला है। यह तो अदालत की अवमानना है, इस अदालत को संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने पुलिस कहा कि रामपुर की पुलिस ने आज जो भी कुछ किया वह बहुत निंदनीय है। आजम खां ने कहा कि हम कोशिश करेंगे कि रामपुर का माहौल खराब न होने पाए।
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पुलिस हमें फर्जी मुठभेड़ में मरवा सकती है: शानू
रामपुर। आजम खां के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू ने कहा है कि पुलिस उनको और अजहर खां को किसी फर्जी मुकदमे में फंसा सकती है। उन्होंने ऐसी आशंका व्यक्त की कि पुलिस उनको और अजहर खां को फर्जी मुठभेड़ के नाम पर मार भी सकती है। कोर्ट से जमानत मिलने के बाद शानू ने कहा कि पुलिस रविवार को ही उनको गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी। पुलिस कर्मी ऊपर से दबाव होने का हवाला देकर गिरफ्तार करने की बात कह रहे थे। उन्होंने कहा कि जब वह अदालत में सरेंडर कर चुके थे, इसके बाद भी पुलिस ने उनको गिरफ्तार करने की कोशिश की।
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मामला 2008 का है। बसपा सरकार में सपाइयों ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का पुतला फूंका था,जिसकी रिपोर्ट शहर कोतवाली पुलिस ने पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर अहमद खां, पूर्व मंत्री आजम खां के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू समेत सात लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद मामले की तफ्तीश की और चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। इस मामले में सपा सरकार आने के बाद सपाइयों पर दर्ज मामलों को वापस लेने के आदेश दिए गए थे,जिसके बाद 2015 में आरोपियों के अधिवक्ता की ओर से शासनादेश की प्रति अदालत में जमा की। इसके बाद भी यह मामला चलता रहा। दस अगस्त को कोर्ट की ओर से पूर्व पालिकाध्यक्ष और आजम खां के मीडिया प्रभारी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया। गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद सोमवार को दोनों ने अपने अधिवक्ता आरिफ खां के माध्यम से कोर्ट में सरेंडर किया। कोर्ट में सरेंडर के बाद दोनों को हिरासत में ले लिया गया,इसके बाद उनके अधिवक्ता की ओर से जमानत के लिए याचिका दायर की गई। जमानत याचिका का अभियोजन पक्ष की ओर से विरोध किया गया,जबकि पूर्व पालिकाध्यक्ष के अधिवक्ता ने जमानत पर अपना तर्क दिया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने सोमवार की शाम को दोनों को बीस-बीस हजार रुपये के पर्सनल बांड पर जमानत पर रिहा करने के आदेश कर दिए। अधिवक्ता आरिफ खां ने बताया कि कोर्ट ने जमानत याचिका पर पहले फैसला सुरक्षित कर लिया था,लेकिन बाद में शाम को कोर्ट ने दोनों को जमानत पर रिहा करने के आदेश कर दिए।
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पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है: आजम
रामपुर। मायावती का पुतला फूंकने के मामले में कोर्ट में सरेंडर करनेे वाले अजहर खां और फसाहत अली खां को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने की कोशिश की सूचना पर पूर्व मंत्री आजम खां भी अपने समर्थकों के साथ कोर्ट परिसर पहुंच गए। उन्होंने पुलिस पर राजनीतिक दबाव में कार्य करने का आरोप लगाया। कहा कि जब कोई कोर्ट में कस्टडी में है तो उसे पुलिस गिरफ्तार करने की कोशिश कैसे कर सकती है। वैसे भी यह राजनीतिक मामला है। यह तो अदालत की अवमानना है, इस अदालत को संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने पुलिस कहा कि रामपुर की पुलिस ने आज जो भी कुछ किया वह बहुत निंदनीय है। आजम खां ने कहा कि हम कोशिश करेंगे कि रामपुर का माहौल खराब न होने पाए।
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पुलिस हमें फर्जी मुठभेड़ में मरवा सकती है: शानू
रामपुर। आजम खां के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू ने कहा है कि पुलिस उनको और अजहर खां को किसी फर्जी मुकदमे में फंसा सकती है। उन्होंने ऐसी आशंका व्यक्त की कि पुलिस उनको और अजहर खां को फर्जी मुठभेड़ के नाम पर मार भी सकती है। कोर्ट से जमानत मिलने के बाद शानू ने कहा कि पुलिस रविवार को ही उनको गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी। पुलिस कर्मी ऊपर से दबाव होने का हवाला देकर गिरफ्तार करने की बात कह रहे थे। उन्होंने कहा कि जब वह अदालत में सरेंडर कर चुके थे, इसके बाद भी पुलिस ने उनको गिरफ्तार करने की कोशिश की।