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उफान पर गंगा नदी, 50 बीघे धान की फसल डूबी
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बढ़ा गंगा का जलस्तर।
- फोटो : RAIBARAILY
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डलमऊ (रायबरेली)। गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु की तरफ बढ़ने से कटरी क्षेत्र के लोगों में हड़कंप मच गया है। पानी बढ़ने के कारण नदी किनारे रोपी गई करीब 50 बीघा धान की फसल डूब गई है।
क्षेत्रीय लोगों की मानें तो जिस तरह नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे कयास लगाए जा रहे हैं कि सोमवार तक जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार करके खतरे के निशान बिंदु की तरफ बढ़ जाएगा। एक तरफ पानी में बढ़ोतरी हो रही है, वहीं तहसील प्रशासन की ओर से बाढ़ से निपटने की व्यवस्थाएं कागजों तक सीमित हैं। इससे लोगों में गहरी नाराजगी है।
बारिश के बाद गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी शुरू हुई। वैसे तो नदी का पानी कई दिन से बढ़ रहा था, लेकिन दो दिन से तेजी से पानी में बढ़ोतरी हुई। यही वजह है कि पानी चेतावनी बिंदु की तरफ बढ़ने को बेताब है।
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केंद्रीय जल आयोग डलमऊ कार्यालय के मुताबिक गंगा नदी का चेतावनी बिंदु 98.360 मीटर है। इसके सापेक्ष रविवार को जलस्तर 97.840 मीटर नापा गया। दो घंटे में एक सेमी. की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है।
इससे कटरी क्षेत्र के अंबहा, बबुरा, जमालन नहर मोहद्दीनपुर, जहांगीराबाद, पूरे रेवती सिंह, चकमलिक भीटी गांवों के लोगों में दहशत और भय का माहौल है। खास बात ये है कि कटरी क्षेत्र में किसानों की धान की फसल डूब गई है।
इससे अब फसल सड़ने का खतरा मंडरा रहा है। जिस तरह पानी में बढ़ोतरी हो रही है, उससे कहा जा रहा है कि और भी फसल किसानों की पानी में डूब जाएगी। इससे किसानों को और नुकसान उठाना पड़ेगा।
जंगली जीव-जंतुओं के काटने का खतरा
ग्रामीण सार्जन यादव, रामकिशन, रामाधार, जय किशन ने बताया कि गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से गांवों में दहशत का माहौल है। खासकर जंगली जीव-जंतुओं के काटने का खतरा बढ़ गया है। नदी किनारे बोई गई फसलें जलमग्न हो गई हैं।
खासकर धान की फसल डूब गई है। हर बार नदी में बाढ़ आने पर फसलें डूब जाती हैं, लेकिन उसका मुआवजा तक नहीं मिलता है। फसलें डूबने से हम लोगों को नुकसान हुआ है। अच्छे फसल उत्पादन की उम्मीद को झटका लगा है।
चेतावनी बिंदु पार करने के बाद भी बाढ़ जैसे हालात होंगे। हालांकि गंगा नदी का जलस्तर अभी भी चेतावनी बिंदु से काफी दूर है। हालांकि सतर्कता बरती जा रही है। लेखपालों के सतर्क कर दिया गया है। नदी किनारे अवैध तरीके से बोई गई फसल डूबी है। बाढ़ आने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया जाएगा।
प्रतीत त्रिपाठी, तहसीलदार, डलमऊ
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क्षेत्रीय लोगों की मानें तो जिस तरह नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे कयास लगाए जा रहे हैं कि सोमवार तक जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार करके खतरे के निशान बिंदु की तरफ बढ़ जाएगा। एक तरफ पानी में बढ़ोतरी हो रही है, वहीं तहसील प्रशासन की ओर से बाढ़ से निपटने की व्यवस्थाएं कागजों तक सीमित हैं। इससे लोगों में गहरी नाराजगी है।
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बारिश के बाद गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी शुरू हुई। वैसे तो नदी का पानी कई दिन से बढ़ रहा था, लेकिन दो दिन से तेजी से पानी में बढ़ोतरी हुई। यही वजह है कि पानी चेतावनी बिंदु की तरफ बढ़ने को बेताब है।
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केंद्रीय जल आयोग डलमऊ कार्यालय के मुताबिक गंगा नदी का चेतावनी बिंदु 98.360 मीटर है। इसके सापेक्ष रविवार को जलस्तर 97.840 मीटर नापा गया। दो घंटे में एक सेमी. की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है।
इससे कटरी क्षेत्र के अंबहा, बबुरा, जमालन नहर मोहद्दीनपुर, जहांगीराबाद, पूरे रेवती सिंह, चकमलिक भीटी गांवों के लोगों में दहशत और भय का माहौल है। खास बात ये है कि कटरी क्षेत्र में किसानों की धान की फसल डूब गई है।
इससे अब फसल सड़ने का खतरा मंडरा रहा है। जिस तरह पानी में बढ़ोतरी हो रही है, उससे कहा जा रहा है कि और भी फसल किसानों की पानी में डूब जाएगी। इससे किसानों को और नुकसान उठाना पड़ेगा।
जंगली जीव-जंतुओं के काटने का खतरा
ग्रामीण सार्जन यादव, रामकिशन, रामाधार, जय किशन ने बताया कि गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से गांवों में दहशत का माहौल है। खासकर जंगली जीव-जंतुओं के काटने का खतरा बढ़ गया है। नदी किनारे बोई गई फसलें जलमग्न हो गई हैं।
खासकर धान की फसल डूब गई है। हर बार नदी में बाढ़ आने पर फसलें डूब जाती हैं, लेकिन उसका मुआवजा तक नहीं मिलता है। फसलें डूबने से हम लोगों को नुकसान हुआ है। अच्छे फसल उत्पादन की उम्मीद को झटका लगा है।
चेतावनी बिंदु पार करने के बाद भी बाढ़ जैसे हालात होंगे। हालांकि गंगा नदी का जलस्तर अभी भी चेतावनी बिंदु से काफी दूर है। हालांकि सतर्कता बरती जा रही है। लेखपालों के सतर्क कर दिया गया है। नदी किनारे अवैध तरीके से बोई गई फसल डूबी है। बाढ़ आने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया जाएगा।
प्रतीत त्रिपाठी, तहसीलदार, डलमऊ