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ठिकाने बदल-बदल करते थे जाली नोट का कारोबार

Tue, 05 Nov 2019 12:42 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 05 Nov 2019 12:42 AM IST
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Used to change fake currency business
रायबरेली। जिले में जाली नोट का कारोबार का मामला पकड़ में आने के बाद पुलिस पूरे प्रकरण की तह तक जाकर पता लगाने में जुटी है कि यह धंधा कहां-कहां पर फैला था। अब तक की पुलिस की जांच में जो खुलासा हुआ है, वह चौंकाने वाला है। खाकी से बचने के लिए कारोबारी ठिकाने बदल-बदल यह कारोबार करते थे। यही वजह थी कि डेढ़ साल तक यह कारोबार करने में सफल हो गए और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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महराजगंज कोतवाली पुलिस ने रविवार को जाली नोट का कारोबार करने वाले रैकेट का खुलासा किया था। इसमें अमेठी जिले के फुरसतगंज थाना क्षेत्र के पडऱई मजरे मकदूमपुर गांव निवासी रामकृपाल, लखनऊ जिले के बंथरा थाना क्षेत्र के बंथरा कस्बा निवासी अनुराग सिंह चौहान और मिल एरिया थाना क्षेत्र के पूरे दूलम मजरे अमावां निवासी रियाज अहमद को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
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पुलिस की मानें तो रैकेट का मुख्य आरोपी रामकृपाल मास्टरमाइंड है। इसी का नतीजा है कि डेढ़ साल बाद वह और उसके साथी इस कारोबार के मामले में पकड़े गए। पुलिस से बचने के लिए कारोबारी किसी भी ठिकाने पर एक माह या फिर 15 दिन ही रुकते थे। मुख्य रूप से रायबरेली के अलावा उन्नाव, लखनऊ के साथ ही मध्य प्रदेश में रुककर जाली नोट छापने का कार्य करते थे।
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इसके बाद जाली नोटों को सप्लाई करके धन कमाते थे। हालांकि डेढ़ साल तक ही यह होशियारी कारोबारियों की चली और अंतत महराजगंज पुलिस ने तीनों को दबोच लिया। सीओ महराजगंज विनीत सिंह का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच चल रही है। जांच में पाया गया कि रायबरेली, उन्नाव, लखनऊ आदि स्थानों पर ठिकाना बनाकर यह कारोबारी जाली नोट छापने का कार्य करते थे। एक माह या फिर 15 दिन ही एक स्थान पर रुकते थे।
पुलिस यह पता लगा रही है कि इस रैकेट में और कितने लोग शामिल थे। पुलिस सूत्रों की मानें तो यह पता लगाने के लिए पुलिस जेल भेजे गए तीनों आरोपियों के फोन नंबरों की सीडीआर (कॉल डिटेल रिपोर्ट) निकालेगी। इससे पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि इन कारोबारियों के पास कितने लोगों के फोन आते थे और उनसे क्या बात होती थी।

कहीं ऐसा तो नहीं कि जाली नोट छापने के बाद उनकी सप्लाई के लिए एजेंटों को भी रखा गया था। यही नहीं पुलिस जेल भेजे गए कारोबारियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही है। पुलिस का प्रयास है कि जाली नोट का कारोबार को पूरी तरह से समाप्त किया जाए।
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