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चलती बस के आगे आसमान से गिर रहे थे बम के शोले... लगा अब जिंदगी खत्म

Tue, 01 Mar 2022 10:56 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 10:56 PM IST
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Ukraine tragedy
रायबरेली। यूक्रेन के इवानो से रोमानिया बार्डर की दूरी करीब 200 किमी. है। 26 फरवरी को बार्डर तक जाने के लिए बस से निकले थे। रास्ते में जाम इस कदर था कि आगे बढ़ना मुश्किल था।
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आसमान से बसों के आगे बम के शोले गिर रहे थे। अगर जाम खुलने का इंतजार करते तो समय से बार्डर नहीं पहुंच पाते। इसलिए पैदल चलना ही मुनासिब समझा।
करीब 30 किमी. पैदल चलने के बाद रोमानिया बार्डर पहुंचे। लेकिन मुसीबतें यहां भी कम नहीं हुईं। रोमानिया बार्डर पर नौ घंटे तक इंतजार करने के बाद प्रवेश मिला।
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रोमानिया एयरपोर्ट पहुंचे तो वहां चार घंटे बाद फ्लाइट मिल गई। यूक्रेन से सकुशल अपने वतन लौटे नितिन कुमार ने वहां के मंजर बयां किए तो उनके आंसू छलक आए। सकुशल लौटने पर नितिन ने केंद्र सरकार का शुक्रिया अदा किया।
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नितिन सोमवार देर रात शहर के हनुमंतपुरम स्थित घर पहुंचा। पांच दिन से इंतजार कर रहे परिवारीजनों ने नितिन को देखा तो झट से उसे गले लगा लिया और राहत की सांस ली।
मंगलवार सुबह नितिन के रिश्तेदार और पड़ोसी भी हालचाल लेने पहुंचे। नितिन ने बताया कि 24 फरवरी को धमाका हुआ तो हालात बिगड़ने लगे और तनाव बढ़ गया।
हमले के बाद यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन क्लासेज शुरू कर दीं। वहां से निकलने और रोमानिया बार्डर जाने के लिए कहा गया, लेकिन कब निकलना है, यह यूनिवर्सिटी को तय करना था।
जैसे-तैसे दो दिन बीते और 26 फरवरी को इवानो से हम लोग बस से निकले, लेकिन 30 किमी. पहले ही बस से उतरना पड़ा और पैदल आगे बढ़े।
यूक्रेन में एमबीबीएस कर रहे नितिन बताते हैं कि रोमानिया बार्डर में प्रवेश मिलने के बाद एंबेसी पहुंचे, जहां उनके खाने-पीने की व्यवस्था की गई।
इसके बाद फ्लाइट से भारत पहुंचे, जहां यूपी भवन में खाने-पीने का इंतजाम कराया गया और कार से घर रवाना किया गया। नितिन ने बताया कि उनके साथ फ्लाइट में 240 लोग थे, लेकिन रायबरेली से वह अकेले थे। यूपी के कन्नौज, छिबरामऊ के भी कुछ लोग थे।
काफी जद्दोजहद और तनाव के बीच घर लौटने के बाद नितिन के चेहरे पर सुकून दिखा। परिवारीजनों के बीच नितिन के चेहरे पर खुशी झलकी। नितिन बताते हैं कि हमले के बाद से उनकी घरवालों से बात नहीं हो पा रही थी। नेटवर्क की समस्या थी। जहां कहीं भी वाईफाई कनेक्ट होता, घरवालों को झट से मैसेज कर देता था।
यहां लगते हैं एक से डेढ़ करोड़
डॉक्टर बनने के लिए पढ़ाई में आने वाले खर्च को देखते हुए नितिन ने यूक्रेन जाना सही समझा था। नितिन बताते हैं कि यहां पढ़ाई पर एक से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च आता है, जबकि यूक्रेन में 50 से 60 लाख रुपये में पढ़ाई पूरी हो जाती है। इसीलिए डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए सितंबर 2017 में यूक्रेन गया।
सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन 24 फरवरी को हुए धमाके के बाद से हालात खराब हो गए। घर लौटने के सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं था। नितिन ने बताया कि उनका कोर्स 2023 में पूरा होने वाला था।

आंखों में छलके खुशी के आंसू
यूक्रेन में हमले की खबरें सुनकर परिवारीजनों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही थीं। नितिन के घर लौटते ही उनके चेहरों पर सुकून नजर आया तो आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। नितिन बताते हैं कि उनके पिता डॉ. राम सेवक कुशीनगर में तैनात हैं। इस समय वहीं पर हैं। मां सरोज गृहणी हैं। दूसरे परिवारीजन भी घर आ चुके थे। रात में जब घर पहुंचा तो इंतजार में बैठे परिवारीजन खुशी से झूम उठे। मां ने कहा कि बेटा जल्दी लौट आए, यही प्रार्थना कर रही थी।
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