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सूरत से आई दो श्रमिक स्पेशल, उतरे 2354 यात्री

Sun, 10 May 2020 11:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 10 May 2020 11:48 PM IST
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Two workers special from Surat, 2354 passengers landed
रायबरेली। गुजरात प्रांत में रह रहे उत्तर प्रदेश के लोगों और प्रवासी मजदूरों को लेकर सूरत से चलीं दो ट्रेनें लखनऊ आनी थी, लेकिन उन्हें अचानक यहां भेज दिया गया। इससे आनन-फानन व्यवस्था की गई। दोनों ट्रेनों से आए 2354 लोगों को उनके गृह जनपद भेजने के लिए बसों का प्रबंध किया गया। डीएम शुभ्रा सक्सेना ने खुद मौके पर पहुंचकर रोडवेज बसों का जायजा लिया। रोडवेज के यातायात अधीक्षक अशोक त्रिपाठी ने बताया कि कि लगभग 100 बसों की डिमांड की गई थी, जिससे पांच बसें किदवाई नगर डिपो से भी मांगनी पड़ी। कुल 79 बसों से प्रवासी मजदूरों को उनके गृह जनपद भेजा गया।
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प्रशासनिक अफसरों के साथ पुलिस टीमें व्यवस्था में डटी रहीं। रोडवेज का पूरा अमला जहां बसों का प्रबंध करने में जुटा। पहली ट्रेन में 23 और दूसरी ट्रेन में 22 कोच लगे थे। इनसे आए यात्रियों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए उतारा गया। बाहर एंबुलेंस के साथ स्वास्थ्य टीम मुस्तैद रही। प्लेटफार्म से बाहर आने के लिए एक गेट खोला गया, जहां पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद यात्रियों को बाहर आने का मौका मिला और उन्हें निर्धारित बसों में बैठाया गया। अपर जिलाधिकारी प्रशासन राम अभिलाष ने बताया कि दोनों ट्रेनों से आए यात्रियों में 113 इसी जनपद के हैं। प्रदेश के लगभग हर जिले के यात्री ट्रेन से आए हैं, जिन्हें रोडवेज बसों से उनके गृह जनपद भेजा गया।
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सूरत से लखनऊ तक के लिए दो ट्रेनें चलीं, जिनका रूट डायवर्जन अचानक कर दिया गया। रेलवे के स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि सूरत से आने वाली दोनों श्रमिक स्पेशल ट्रेनें लखनऊ तक निर्धारित थीं, जिन्हें रायबरेली भेजा गया। पहली ट्रेन सुबह 9.23 बजे तो दूसरी दोपहर 1.30 बजे यहां पहुंची। जीआरपी थानाध्यक्ष रविंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि पहली ट्रेन से 1101 और दूसरी ट्रेन से 1253 यात्री उतरे। इस दौरान प्लेटफार्म पर सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा गया।
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सूरत से श्रमिक स्पेशल पर सवार होकर आए राहुल कुमार, हिमांशु यादव का कहना है कि तकलीफें बहुत हैं। बस घर पहुंच जाएं, फिर जो होगा, देखा जाएगा। बृजेश कुमार और विजय कुमार ने कहा कि आखिर कितने दिन इस तरह बिना कामकाज के परदेस में पड़े रहते। भूखों मरने की नौबत आ गई तो घर लौटने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा। रूपेश वर्मा और अनिल कुमार ने बताया कि सूरत में स्टेशन के बाहर लगे काउंटरों से 670 रुपये प्रिंट का टिकट दिया गया, लेकिन 800 से एक हजार रुपये तक वसूले गए। अफरातफरी इतनी रही कि टिकट लेकर ट्रेन पकड़ने चल दिए।
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