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Raebareli News: बसों में न महिला अटेंडेंट और न ही चालकों के डीएल वैध
Fri, 10 Apr 2026 01:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Fri, 10 Apr 2026 01:22 AM IST
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शहर स्थित सिविल लाइंस चौराहे पर बृहस्पतिवार को इस तरह टेंपो पर सवार होकर जाते बच्चे। -संवाद
रायबरेली। स्कूल संचालक वाहनों की स्टेयरिंग हर किसी चालक के हाथ में थमा दे रहे हैं। स्कूली बच्चों को ढोने वाले तमाम वाहनों के चालकों के डीएल वैध नहीं हैं। चालकों के चरित्र का सत्यापन भी पुलिस से नहीं कराया गया।
शासन ने पूर्व में ही आदेश दिए थे कि स्कूली बसों में प्रशिक्षित महिला अटेंडेंट या कंडक्टर रखे जाएं, लेकिन यह आदेश कागजों तक ही सिमटकर रह गया। परिवहन विभाग के अधिकारी के साथ ही पुलिस भी मानकों की जांच में ढील बरत रही है।
सरकार की मंशा है कि स्कूली वाहनों के सभी चालकों का पुलिस रिकॉर्ड साफ हो। बिना सत्यापन के किसी भी चालक को वाहन चलाने की अनुमति न दी जाए। इसके अलावा चालकों के ड्राइविंग अनुभव, लाइसेंस और स्वास्थ्य की भी जांच होनी चाहिए। बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और पुलिस सत्यापन के स्कूल वाहन चलाना बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
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स्कूल प्रबंधन और चालकों की लापरवाही बच्चों के जीवन को खतरे में डाल रही है। चालकों के पास कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए और उन्हें भारी वाहन चलाने का अनुभव भी होना चाहिए। बिना वैध लाइसेंस के वाहन चलाने पर पांच हजार रुपये जुर्माना और तीन महीने के कैद का प्रावधान है।
इसके बावजूद जिले में मानकों को ताक पर रखा गया है। छात्राओं की सुरक्षा के लिए किसी भी बस में महिला अटेंडेंट नहीं रखी गई है।
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सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें। वाहनों के चालकों के डीएल का सत्यापन किया जा रहा है। विद्यालय संचालकों को चालकों का पुलिस सत्यापन कराकर प्रमाणपत्र भी देने के निर्देश दिए गए हैं। शासन से तय मानकों को शत-प्रतिशत पूरा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
-उमेश कटियार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन, रायबरेली
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शासन ने पूर्व में ही आदेश दिए थे कि स्कूली बसों में प्रशिक्षित महिला अटेंडेंट या कंडक्टर रखे जाएं, लेकिन यह आदेश कागजों तक ही सिमटकर रह गया। परिवहन विभाग के अधिकारी के साथ ही पुलिस भी मानकों की जांच में ढील बरत रही है।
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सरकार की मंशा है कि स्कूली वाहनों के सभी चालकों का पुलिस रिकॉर्ड साफ हो। बिना सत्यापन के किसी भी चालक को वाहन चलाने की अनुमति न दी जाए। इसके अलावा चालकों के ड्राइविंग अनुभव, लाइसेंस और स्वास्थ्य की भी जांच होनी चाहिए। बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और पुलिस सत्यापन के स्कूल वाहन चलाना बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
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स्कूल प्रबंधन और चालकों की लापरवाही बच्चों के जीवन को खतरे में डाल रही है। चालकों के पास कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए और उन्हें भारी वाहन चलाने का अनुभव भी होना चाहिए। बिना वैध लाइसेंस के वाहन चलाने पर पांच हजार रुपये जुर्माना और तीन महीने के कैद का प्रावधान है।
इसके बावजूद जिले में मानकों को ताक पर रखा गया है। छात्राओं की सुरक्षा के लिए किसी भी बस में महिला अटेंडेंट नहीं रखी गई है।
सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें। वाहनों के चालकों के डीएल का सत्यापन किया जा रहा है। विद्यालय संचालकों को चालकों का पुलिस सत्यापन कराकर प्रमाणपत्र भी देने के निर्देश दिए गए हैं। शासन से तय मानकों को शत-प्रतिशत पूरा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
-उमेश कटियार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन, रायबरेली