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बेटा तो छूट गया, पर अब कैसे धुलेगा परिवार और गांव पर लगा दाग

Thu, 16 Sep 2021 09:47 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Sep 2021 09:47 PM IST
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The son was left but now how will the family and village be washed away
मूलचंद्र के दरवाजे पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : RAIBARAILY
ऊंचाहार (रायबरेली)। संदिग्ध आतंकियों से तार जुड़े होने के आरोप में पकड़े गए अकोढ़िया गांव निवासी मूलचंद व जमील को एटीएस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया है। बताते हैं कि एटीएस को दोनों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले हैं।
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दोनों युवकों की सकुशल घर वापसी की उम्मीद से उनके घरों में जश्न हैं। गांव के लोगों की मानें तो परिवार के लिए ये दो दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं थे। लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी भी है कि परिवार और गांव पर लगा बदनामी का ये धब्बा आखिर कैसे मिटेगा।
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गांव के बच्चों को आतंकी बताकर परिवार व गांव की छवि पूरे देश में धूमिल कर दी गई। उनका कहना है कि हम तो पहले ही कह रहे थे कि हमारे गांव के लोग ऐसा नहीं कर सकते, लेकिन एटीएस के अधिकारी उनकी बात मानने को तैयार नहीं थे।
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ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र के अकोढ़िया गांव निवासी मूलचंद्र व जमील शेख को एटीएस ने हिरासत में लिया था। एटीएस ने दोनों के आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने की बात कही थी। बकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दोनों को आतंकी लिखा गया।
बताते हैं कि पड़ताल के बाद एटीएस को दोनों के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं मिले। बुधवार देर रात एटीएस ने पहले जमील शेख को और फिर उसके एक घंटे बाद मूलचंद्र को छोड़ दिया।
दोनों युवकों के छोड़ें जाने की खबर जब गांव पहुंची तो लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने कहा कि एटीएस ने जांच के बाद निर्दोषों को जेल नहीं भेजा। इसके लिए धन्यवाद है, लेकिन जिस तरह बिना पुख्ता पड़ताल के दोनों पर आरोप लगाया वह ठीक नहीं है। एटीएस के इस कृत्य से गांव की छवि खराब हुई।
मूलचंद्र के घरवालों को उसके छूटने की खबर नहीं मिली है। उसकी पत्नी सुधा व बेटा कहीं गए हुए थे। बेटी खुशी दरवाजे पर खेल रही थी। उसको पिता के छूटने की जानकारी नहीं थी, लेकिन उसने जैसे ही पिता के छूटने की खबर सुनी तो वह उछल गई और बच्चों से बोली के मेरे पापा छूट गए।
ग्राम प्रधान शिवमूरत तिवारी ने बताया कि हमें दोनों के छूटने की जानकारी नहीं है। जमील के छूटने की खबर समाचार पत्र में पढ़ी थी। हम पहले ही दोनों के निर्दोष होने की बात कह रहे थे, लेकिन आरोप बड़े मामले में होने की वजह से चुप थे, लेकिन प्रशासन को बिना जांच व सुबूत के किसी को बदनाम नहीं करना चाहिए।
पिता ने जताई खुशी, बोला बेटे का कर रहा हूं इंतजार
जमील के छूटने की खबर जब उसके परिवार वालों को पता चली तो सभी के चेहरे खिल गए। उसके पिता साबिर शेख ने खुदा को निर्दोष बेटे को बचाने के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन देर शाम तक उसके घर न पहुंचने का मलाल भी रहा। पूरा परिवार दरवाजे पर गांव में आने वाले रास्तों को टकटकी लगाए देख रहा था। सबके चेहरे पर उसके छूटने की खुशी तो थी।

पिता का कहना है कि हमने देर रात टीवी पर उसके छूटने की खबर देखी थी। सुबह ‘अमर उजाला’ अखबार भी पढ़ा तो दिल को तसल्ली हुई, लेकिन किसी अधिकारी ने इसकी कोई सूचना नहीं दी। बेटा छूट गया लेकिन गांव पर लगा दाग कैसे धुलेगा। गुरुवार सुबह से उसके घर आने का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन वह अब तक घर नहीं पहुंचा।
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