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सोनिया के क्षेत्र में अव्यवस्थाओं से जूझ रहे रेल यात्री
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2016 11:27 PM IST
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में ही रेल यात्रियों को हर दिन अव्यवस्थाओं से जूझकर सफर तय करना पड़ रहा है। शहर या फिर देहात क्षेत्र के रेलवे स्टेशन बदहाली का दंश झेल रहे हैं।
स्टेशनों पर सफाई व्यवस्था बदतर है। पानी तक के लिए यात्रियों को मारामारी करनी पड़ती है। रायबरेली रेलवे स्टेशन से होकर 39 ट्रेनों का संचालन होता है।
प्रतिदिन 20 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। सफाई व्यवस्था पहले से ठीक हुई है, लेकिन इसमें अभी और तेजी दिखाए जाने की जरूरत है। पानी की टोटियां आए दिन खराब रहती हैं।
जिससे यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। नया टिकट घर शोपीस बन गया है। ऐसे में पहले से बने दो टिकट काउंटरों पर टिकट के लिए यात्रियों को मारामारी करनी पड़ती है।
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खासकर देहात क्षेत्रों के रेलवे स्टेशन का हाल बहुत ही खराब है। डलमऊ रेलवे स्टेशन पर वाटर कूलर खराब पड़ा है। हर तरफ गंदगी का अंबार है। यहां से प्रतिदिन पांच हजार से अधिक लोग ट्रेनों से सफर करते हैं।
इसके अलावा ऊंचाहार, दरियापुर, हरचंदपुर, बछरावां, कुंदनगंज समेत अन्य स्टेशनों पर भी अव्यवस्था व्याप्त है। पिछले साल के रेल बजट में जिले को कुछ नहीं मिला था।
अब देखना ये है कि इस बार के रेल बजट में ठप चल रही योजनाओं में तेजी लाए जाने के लिए कदम बढ़ाए जाते हैं या फिर इसकी उपेक्षा की जाती है।
2 दिसंबर 2013 में सांसद सोनिया गांधी ने महराजगंज कस्बे में 226 करोड़ की लागत से बनने वाली 46.9 किमी लंबी रायबरेली-महाराजगंज-अकबरगंज रेल लाइन का शिलान्यास किया था।
होते-करते लंबा समय बीत गया, लेकिन अभी तक रेल पटरी बिछाने का कार्य शुरू नहीं हो सका है। इसी तरह 26 नवंबर 2013 में अमेठी सांसद राहुल गांधी ने सलोन कस्बे में 380 करोड़ की लागत से बनने वाली 66.17 किमी लंबी ऊंचाहार-सलोन-अमेठी रेल लाइन का शिलान्यास किया था।
पर अभी अभी तक रेल लाइन बिछाने का कार्य शुरू नहीं हो सका है। रायबरेली-उतरेटिया तक रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य तेजी से नहीं चल पा रहा है।
यह हाल तब है, जब करोड़ों की लागत से किए जा रहे दोहरीकरण का कार्य को तीन साल से अधिक हो गए हैं। आधा कार्य भी अभी तक नहीं हो सका है।
इस समय कार्य बंद चल रहा है। रेलवे स्टेशन रायबरेली में 26 डिब्बे वाली वॉशिंग लाइन का कार्य ठप चल रहा है। यही नहीं रेलवे स्टेशन पर चार नंबर प्लेट फॉर्म बनने का प्रस्ताव पास हुआ था, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हो सका है।
यात्री वीरेंद्र सिंह, शुभम पांडेय, अमिताभ कुमार, राम निवास सोनकर, मो. युसुफ, शशांक त्रिपाठी का कहना है कि स्टेशनों की बदहाली पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
टिकट काउंटर नहीं बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे टिकट लेने में ही परेशानी हो रही है। शहर के रेलवे स्टेशन पर तो साफ-सफाई पहले से बेहतर हुई है, लेकिन पानी की समस्या अभी भी व्याप्त है।
आए दिन पानी की टोटियां खराब रहती हैं, जिसे ठीक कराने की जरूरत है। रेलवे के सहायक मंडल अभियंता राहुल सब्बरवाल ने बताया कि रेलवे स्टेशनों पर पानी से लेकर साफ-सफाई व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है।
जो कमियां हैं, उसे दुरुस्त करने के लिए प्रयास भी किए जा रहे हैं। रेलवे की जो भी योजनाएं ठप चल रही हैं, उसकी बाबत उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
जल्द इस पर कोई निर्णय लिया जाएगा। अपने स्तर से पूरा प्रयास है कि रेल योजनाओं का कार्य जल्द पूरा है, ताकि जनता को इसका लाभ मिल सके।
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स्टेशनों पर सफाई व्यवस्था बदतर है। पानी तक के लिए यात्रियों को मारामारी करनी पड़ती है। रायबरेली रेलवे स्टेशन से होकर 39 ट्रेनों का संचालन होता है।
प्रतिदिन 20 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। सफाई व्यवस्था पहले से ठीक हुई है, लेकिन इसमें अभी और तेजी दिखाए जाने की जरूरत है। पानी की टोटियां आए दिन खराब रहती हैं।
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जिससे यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। नया टिकट घर शोपीस बन गया है। ऐसे में पहले से बने दो टिकट काउंटरों पर टिकट के लिए यात्रियों को मारामारी करनी पड़ती है।
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खासकर देहात क्षेत्रों के रेलवे स्टेशन का हाल बहुत ही खराब है। डलमऊ रेलवे स्टेशन पर वाटर कूलर खराब पड़ा है। हर तरफ गंदगी का अंबार है। यहां से प्रतिदिन पांच हजार से अधिक लोग ट्रेनों से सफर करते हैं।
इसके अलावा ऊंचाहार, दरियापुर, हरचंदपुर, बछरावां, कुंदनगंज समेत अन्य स्टेशनों पर भी अव्यवस्था व्याप्त है। पिछले साल के रेल बजट में जिले को कुछ नहीं मिला था।
अब देखना ये है कि इस बार के रेल बजट में ठप चल रही योजनाओं में तेजी लाए जाने के लिए कदम बढ़ाए जाते हैं या फिर इसकी उपेक्षा की जाती है।
2 दिसंबर 2013 में सांसद सोनिया गांधी ने महराजगंज कस्बे में 226 करोड़ की लागत से बनने वाली 46.9 किमी लंबी रायबरेली-महाराजगंज-अकबरगंज रेल लाइन का शिलान्यास किया था।
होते-करते लंबा समय बीत गया, लेकिन अभी तक रेल पटरी बिछाने का कार्य शुरू नहीं हो सका है। इसी तरह 26 नवंबर 2013 में अमेठी सांसद राहुल गांधी ने सलोन कस्बे में 380 करोड़ की लागत से बनने वाली 66.17 किमी लंबी ऊंचाहार-सलोन-अमेठी रेल लाइन का शिलान्यास किया था।
पर अभी अभी तक रेल लाइन बिछाने का कार्य शुरू नहीं हो सका है। रायबरेली-उतरेटिया तक रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य तेजी से नहीं चल पा रहा है।
यह हाल तब है, जब करोड़ों की लागत से किए जा रहे दोहरीकरण का कार्य को तीन साल से अधिक हो गए हैं। आधा कार्य भी अभी तक नहीं हो सका है।
इस समय कार्य बंद चल रहा है। रेलवे स्टेशन रायबरेली में 26 डिब्बे वाली वॉशिंग लाइन का कार्य ठप चल रहा है। यही नहीं रेलवे स्टेशन पर चार नंबर प्लेट फॉर्म बनने का प्रस्ताव पास हुआ था, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हो सका है।
यात्री वीरेंद्र सिंह, शुभम पांडेय, अमिताभ कुमार, राम निवास सोनकर, मो. युसुफ, शशांक त्रिपाठी का कहना है कि स्टेशनों की बदहाली पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
टिकट काउंटर नहीं बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे टिकट लेने में ही परेशानी हो रही है। शहर के रेलवे स्टेशन पर तो साफ-सफाई पहले से बेहतर हुई है, लेकिन पानी की समस्या अभी भी व्याप्त है।
आए दिन पानी की टोटियां खराब रहती हैं, जिसे ठीक कराने की जरूरत है। रेलवे के सहायक मंडल अभियंता राहुल सब्बरवाल ने बताया कि रेलवे स्टेशनों पर पानी से लेकर साफ-सफाई व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है।
जो कमियां हैं, उसे दुरुस्त करने के लिए प्रयास भी किए जा रहे हैं। रेलवे की जो भी योजनाएं ठप चल रही हैं, उसकी बाबत उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
जल्द इस पर कोई निर्णय लिया जाएगा। अपने स्तर से पूरा प्रयास है कि रेल योजनाओं का कार्य जल्द पूरा है, ताकि जनता को इसका लाभ मिल सके।