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मुख्यमंत्री का आदेश ठेंगे पर, सीएमओ-एसीएमओ ने बंद की ओपीडी
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रायबरेली। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के आगे मुख्यमंत्री का आदेश बेअसर हो गया है। सीएमओ, एसीएमओ समेत स्वास्थ्य विभाग के 11 प्रशासनिक अफसरों ने ओपीडी बंद कर दी है।
सीएचसी में काम कर रहे प्रशासनिक अफसर औपचारिकता निभा रहे हैं, लेकिन जिले स्तर के अधिकारी ओपीडी नहीं कर रहे हैं। इससे रोगियों को सहूलियत देने की मुख्यमंत्री की मंशा तार-तार हो गई है।
इसका खामियाजा मरीजों को भोगना पड़ रहा है। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व्यवस्था को दुरुस्त करने में नकारा साबित हो रहे हैं।
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कोरोना के संक्रमण के साथ ही जिले में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए पिछले जून महीने में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक पद पर काम करने वाले डॉक्टरों को भी सप्ताह में तीन-तीन दिन ओपीडी करने के आदेश दिए थे।
मुख्यमंत्री के आदेश पर सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने 11 प्रशासनिक पदों पर काम करने वाले डॉक्टरों की ओपीडी का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया था। सीएमओ को जिला अस्पताल में प्रत्येक सप्ताह मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को ओपीडी करना था। एक-एक दिन ओपीडी करने के बाद सीएमओ समेत अन्य अफसर भी सीएम के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं। एसीएमओ व डिप्टी सीएमओ भी ओपीडी करने के लिए अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं।
अफसरों का ये हाल
एसीएमओ डॉ. खालिद रिजवान को जिला अस्पताल में ओपीडी करने के आदेश हैं, लेकिन वे अब तक ओपीडी करने नहीं पहुंचे हैं। एसीएमओ डॉ. कृष्णा सोनकर पहले सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को लालगंज, दूसरे में खीरों और तीसरे सप्ताह में बछरावां में ओपीडी के आदेश हैं।
इसके अलावा एसीएमओ डॉ. एके चौधरी, डॉ. अंशुमान सिंह, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. आरबी यादव आदि डॉक्टरों को भी सप्ताह में तीन-तीन ओपीडी करने के आदेश हैं, लेकिन कोई भी अफसर मरीजों का इलाज करने के लिए नहीं पहुंच रहा है। सीएम के आदेश का पालन भले ही न हो रहा है, लेकिन इसमें कई ऐसे डॉक्टर हैं, जो निजी प्रैक्टिस करने के लिए जरूर समय निकाल रहे हैं।
सीएम के आदेश पर प्रशासनिक पदों पर काम करने वाले डॉक्टरों को सप्ताह में तीन-तीन दिन ओपीडी करने का पत्र जारी किया गया था। व्यस्तता अधिक होने के कारण ओपीडी में नहीं पहुंच पा रहे हैं। कुछ चिकित्सक ओपीडी करने के लिए पहुंच रहे हैं। सीएम के आदेशों की अवहेलना नहीं की जा रही है।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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सीएचसी में काम कर रहे प्रशासनिक अफसर औपचारिकता निभा रहे हैं, लेकिन जिले स्तर के अधिकारी ओपीडी नहीं कर रहे हैं। इससे रोगियों को सहूलियत देने की मुख्यमंत्री की मंशा तार-तार हो गई है।
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इसका खामियाजा मरीजों को भोगना पड़ रहा है। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व्यवस्था को दुरुस्त करने में नकारा साबित हो रहे हैं।
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कोरोना के संक्रमण के साथ ही जिले में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए पिछले जून महीने में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक पद पर काम करने वाले डॉक्टरों को भी सप्ताह में तीन-तीन दिन ओपीडी करने के आदेश दिए थे।
मुख्यमंत्री के आदेश पर सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने 11 प्रशासनिक पदों पर काम करने वाले डॉक्टरों की ओपीडी का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया था। सीएमओ को जिला अस्पताल में प्रत्येक सप्ताह मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को ओपीडी करना था। एक-एक दिन ओपीडी करने के बाद सीएमओ समेत अन्य अफसर भी सीएम के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं। एसीएमओ व डिप्टी सीएमओ भी ओपीडी करने के लिए अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं।
अफसरों का ये हाल
एसीएमओ डॉ. खालिद रिजवान को जिला अस्पताल में ओपीडी करने के आदेश हैं, लेकिन वे अब तक ओपीडी करने नहीं पहुंचे हैं। एसीएमओ डॉ. कृष्णा सोनकर पहले सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को लालगंज, दूसरे में खीरों और तीसरे सप्ताह में बछरावां में ओपीडी के आदेश हैं।
इसके अलावा एसीएमओ डॉ. एके चौधरी, डॉ. अंशुमान सिंह, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. आरबी यादव आदि डॉक्टरों को भी सप्ताह में तीन-तीन ओपीडी करने के आदेश हैं, लेकिन कोई भी अफसर मरीजों का इलाज करने के लिए नहीं पहुंच रहा है। सीएम के आदेश का पालन भले ही न हो रहा है, लेकिन इसमें कई ऐसे डॉक्टर हैं, जो निजी प्रैक्टिस करने के लिए जरूर समय निकाल रहे हैं।
सीएम के आदेश पर प्रशासनिक पदों पर काम करने वाले डॉक्टरों को सप्ताह में तीन-तीन दिन ओपीडी करने का पत्र जारी किया गया था। व्यस्तता अधिक होने के कारण ओपीडी में नहीं पहुंच पा रहे हैं। कुछ चिकित्सक ओपीडी करने के लिए पहुंच रहे हैं। सीएम के आदेशों की अवहेलना नहीं की जा रही है।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ