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वकीलों और लेखपालों के बीच बवाल, एसडीएम के साथ हाथापाई का प्रयास
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रायबरेली। सदर तहसील में मंगलवार को वकीलों और लेखपालों के बीच बवाल हो गया। दोनों तरफ से मारपीट की गई। मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर जीतलाल सैनी से भी हाथापाई का प्रयास किया गया।
गुस्साए राजस्व कर्मियों ने तहसील के दफ्तरों में ताला जड़ दिया और घरों को चले गए। एसडीएम भी मौके से चले गए। अधिवक्ताओं ने तहसील पहुंचकर एसडीएम और प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए मारपीट करने वाले लेखपालों पर कार्रवाई की मांग की। हालांकि देर शाम तक प्रकरण में किसी तरह की कोई तहरीर नहीं दी गई थी।
सदर तहसील में दो लेखपाल और एक अधिवक्ता के बीच धान बिक्री के लिए सत्यापन कराने को लेकर कहासुनी होने लगी। बात इतनी बढ़ी कि मारपीट शुरू हो गई।
जानकारी पर एसडीएम सदर पहुंचे तो उनके साथ हाथापाई का प्रयास किया गया। बवाल बढ़ते देख एसडीएम गाड़ी पर बैठे और वहां से चले गए। इसकी जानकारी हुई तो भारी संख्या में अधिवक्ता पहुंच गए। इधर, लेखपाल व राजस्व कर्मियों ने तहसील के सभी कक्षों में ताला लगा दिया और कामकाज ठप करते हुए घरों को चले गए।
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वकील तहसील पहुंचकर एसडीएम और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई की मांग करने लगे। इसके बाद अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंच गए।
जानकारी होते ही एडीएम प्रशासन अमित कुमार, सीओ सदर वंदना सिंह के अलावा कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। पूरा कलेक्ट्रेट छावनी में तब्दील हो गया। करीब चार घंटे तक विरोध प्रदर्शन चलता रहा। बाद में किसी तरह मामला शांत कराया गया, लेकिन किसी भी पक्ष से कोई तहरीर नहीं दी गई। इसको लेकर दोनों पक्षों में नाराजगी रही।
खतौनी मिली नहीं, वापस लौट गए किसान
किसान खतौनी लेने की उम्मीद लेकर तहसील पहुंचे, लेकिन बवाल के चलते उन्हें निराशा हाथ लगी। खतौनी न मिलने पर किसान मायूस होकर घरों को लौट गए।
किसान धर्मेंद्र यादव, गिरजेश पासवान ने बताया कि खतौनी की जरूरत थी। आधा घंटे पहले तहसील आया था, लेकिन विवाद के चलते खतौनी कक्ष में ताला बंद कर दिया गया। इससे खतौनी नहीं मिल पाई। इसी तरह अन्य किसानों को खतौनी न मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़े।
कुछ देर में ही पसर गया सन्नाटा, दिखे सिर्फ ताले
वकीलों और लेखपालों के बीच हुए बवाल के बाद कुछ देर में ही सदर तहसील में सन्नाटा पसर गया। तहसील के कक्षों में लगे सिर्फ ताले दिख रहे थे। बवाल से सबसे ज्यादा समस्या आम लोगों को झेलनी पड़ी, जो किसी न किसी काम से सदर तहसील आए थे। उनका कहना था कि दोनों पक्षों को ऐसा नहीं करना था, जिससे कि हम लोगों को परेशानी हो।
दो लेखपालों के सत्यापन कार्य पर रोक
एडीएम प्रशासन अमित कुमार ने बताया कि दोनों पक्षों के विवाद के बाद लेखपाल कमल कुमार, राजकुमार मौर्या को धान सत्यापन कार्य करने से रोक दिया गया है। अब इनके स्थान पर दूसरे लेखपाल संबंधित क्षेत्र के गांवों में जाकर धान सत्यापन का कार्य करेंगे। हालांकि दोनों लेखपाल निर्वाचन का काम करते रहेंगे।
जांच के लिए टीम गठित
वकीलों और लेखपालों के बीच हुए बवाल की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई है। टीम में एडीएम प्रशासन व अपर पुलिस अधीक्षक को शामिल किया गया है। दोनों अधिकारियों से जांच करके जल्द रिपोर्ट मांगी गई है।
वकीलों और लेखपालों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। बाद में दोनों पक्षों से बातचीत करके मामला शांत करा दिया गया है। अब स्थिति पूरी तरह से सामान्य है।
विश्वजीत श्रीवास्तव, अपर पुलिस अधीक्षक
वकीलों और लेखपालों के बीच धान सत्यापन कराने को लेकर विवाद हुुआ था। जानकारी होने पर पहुंचकर दोनों पक्षों से बात करके मामला शांत करा दिया गया है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है।
अमित कुमार, एडीएम प्रशासन
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गुस्साए राजस्व कर्मियों ने तहसील के दफ्तरों में ताला जड़ दिया और घरों को चले गए। एसडीएम भी मौके से चले गए। अधिवक्ताओं ने तहसील पहुंचकर एसडीएम और प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए मारपीट करने वाले लेखपालों पर कार्रवाई की मांग की। हालांकि देर शाम तक प्रकरण में किसी तरह की कोई तहरीर नहीं दी गई थी।
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सदर तहसील में दो लेखपाल और एक अधिवक्ता के बीच धान बिक्री के लिए सत्यापन कराने को लेकर कहासुनी होने लगी। बात इतनी बढ़ी कि मारपीट शुरू हो गई।
जानकारी पर एसडीएम सदर पहुंचे तो उनके साथ हाथापाई का प्रयास किया गया। बवाल बढ़ते देख एसडीएम गाड़ी पर बैठे और वहां से चले गए। इसकी जानकारी हुई तो भारी संख्या में अधिवक्ता पहुंच गए। इधर, लेखपाल व राजस्व कर्मियों ने तहसील के सभी कक्षों में ताला लगा दिया और कामकाज ठप करते हुए घरों को चले गए।
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वकील तहसील पहुंचकर एसडीएम और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई की मांग करने लगे। इसके बाद अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंच गए।
जानकारी होते ही एडीएम प्रशासन अमित कुमार, सीओ सदर वंदना सिंह के अलावा कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। पूरा कलेक्ट्रेट छावनी में तब्दील हो गया। करीब चार घंटे तक विरोध प्रदर्शन चलता रहा। बाद में किसी तरह मामला शांत कराया गया, लेकिन किसी भी पक्ष से कोई तहरीर नहीं दी गई। इसको लेकर दोनों पक्षों में नाराजगी रही।
खतौनी मिली नहीं, वापस लौट गए किसान
किसान खतौनी लेने की उम्मीद लेकर तहसील पहुंचे, लेकिन बवाल के चलते उन्हें निराशा हाथ लगी। खतौनी न मिलने पर किसान मायूस होकर घरों को लौट गए।
किसान धर्मेंद्र यादव, गिरजेश पासवान ने बताया कि खतौनी की जरूरत थी। आधा घंटे पहले तहसील आया था, लेकिन विवाद के चलते खतौनी कक्ष में ताला बंद कर दिया गया। इससे खतौनी नहीं मिल पाई। इसी तरह अन्य किसानों को खतौनी न मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़े।
कुछ देर में ही पसर गया सन्नाटा, दिखे सिर्फ ताले
वकीलों और लेखपालों के बीच हुए बवाल के बाद कुछ देर में ही सदर तहसील में सन्नाटा पसर गया। तहसील के कक्षों में लगे सिर्फ ताले दिख रहे थे। बवाल से सबसे ज्यादा समस्या आम लोगों को झेलनी पड़ी, जो किसी न किसी काम से सदर तहसील आए थे। उनका कहना था कि दोनों पक्षों को ऐसा नहीं करना था, जिससे कि हम लोगों को परेशानी हो।
दो लेखपालों के सत्यापन कार्य पर रोक
एडीएम प्रशासन अमित कुमार ने बताया कि दोनों पक्षों के विवाद के बाद लेखपाल कमल कुमार, राजकुमार मौर्या को धान सत्यापन कार्य करने से रोक दिया गया है। अब इनके स्थान पर दूसरे लेखपाल संबंधित क्षेत्र के गांवों में जाकर धान सत्यापन का कार्य करेंगे। हालांकि दोनों लेखपाल निर्वाचन का काम करते रहेंगे।
जांच के लिए टीम गठित
वकीलों और लेखपालों के बीच हुए बवाल की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई है। टीम में एडीएम प्रशासन व अपर पुलिस अधीक्षक को शामिल किया गया है। दोनों अधिकारियों से जांच करके जल्द रिपोर्ट मांगी गई है।
वकीलों और लेखपालों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। बाद में दोनों पक्षों से बातचीत करके मामला शांत करा दिया गया है। अब स्थिति पूरी तरह से सामान्य है।
विश्वजीत श्रीवास्तव, अपर पुलिस अधीक्षक
वकीलों और लेखपालों के बीच धान सत्यापन कराने को लेकर विवाद हुुआ था। जानकारी होने पर पहुंचकर दोनों पक्षों से बात करके मामला शांत करा दिया गया है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है।
अमित कुमार, एडीएम प्रशासन