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कच्चे तेल के आयात में कमी लाना बड़ी चुनौती
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
Updated Fri, 24 Mar 2017 11:58 PM IST
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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर दीप प्रज्जवलित करते आईएनएचए विश्वविद्यालय कोरिया के प्रो. बी. चोन।
- फोटो : अमर उजाला
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राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजीआईपीटी) जायस के पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग की ओर से शुक्रवार को प्रथम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन में कई देशों के वैज्ञानिक और शोधकर्ता समेत 150 से अधिक लोग शामिल हुए।
मुख्य अतिथि ओएनजीसी के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुधीर वासुदेवा ने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने कच्चे तेल के आयात में 2050 तक 10 प्रतिशत तक की कमी लाना है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की पहचान कर किफायत तरीके से ऊर्जा उत्पन्न करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति शोध के माध्यम से तकनीकी गुणवत्ता बढ़ाकर और तेल उत्पादन के नए क्षेत्रों की पहचान करके की जा सकती है।
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इससे पहले मुख्य अतिथि के साथ आईएनएचए विश्वविद्यालय कोरिया के प्रो. बी. चोन, आरजीआईपीटी के निदेशक प्रो. पीके भट्टाचार्या व पेट्रोलियम विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक सिंह ने दीप प्रज्जवलित किया। अलग-अलग देश से आए शोधकर्ताओं ने एडवांसेज इन पेट्रोलियम, केमिकल व एनर्जी चैलेंजेज विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
कैलसेप दुबई के प्रधान परामर्शदाता एवं क्षेत्रीय प्रबंधक जावेद अजीम, कुनसान यूनिवर्सिटी ताइवान के प्रो. चांग-रेन चेन, आईएनएचए विश्वविद्यालय कोरिया के प्रो. बी. चोन, हैलिबर्टन के एसआरके जंडेलिया ने पेट्रोलियम उत्पादन और आयात पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
साथ ही भारत में पेट्रोलियम की उपयोगिता बढ़ने पर भी चर्चा की। कहा कि डिमांड बढ़ने से ऊर्जा के क्षेत्र में चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। पेट्रोलियम के वैकल्पिक श्रोत की तलाश बेहद जरूरी है। आरजीआईपीटी के निदेशक प्रो. भट्टाचार्या ने कहा कि यह प्रथम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ऊर्जा समस्याओं के समाधान के लिए प्राध्यापकों व शोध करने वालों को एक नई दिशा प्रदान करेगी।
दुनियाभर में उत्पन्न ऊर्जा चुनौतियों का सामना करने के उद्देश्य से अकादमिक व उद्योगजगत के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए वातावरण तैयार करना है। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादन एवं शोधन के क्षेत्र में हुए नवीन खोजों को साझा करने के लिए मंच तैयार करना है।
इसमें दुबई, ताईवान, कोरिया समेत कई देशों के शोधकर्ता के साथ पेट्रोलियम संस्थान और कंपनियों के अधिकारी भी शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. तुषार शर्मा और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिवांजलि शर्मा ने दिया।
इस मौके पर प्रो. दीपक कुंजरू, सुनील सक्सेना, डॉ. डीके तुली, प्रो. गार्गी दास, आरके विज, डॉ. जितेंद्र संगवानी, प्रो. एमओ गर्ग, प्रो. केडीपी निगम मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि ओएनजीसी के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुधीर वासुदेवा ने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने कच्चे तेल के आयात में 2050 तक 10 प्रतिशत तक की कमी लाना है।
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उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की पहचान कर किफायत तरीके से ऊर्जा उत्पन्न करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति शोध के माध्यम से तकनीकी गुणवत्ता बढ़ाकर और तेल उत्पादन के नए क्षेत्रों की पहचान करके की जा सकती है।
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इससे पहले मुख्य अतिथि के साथ आईएनएचए विश्वविद्यालय कोरिया के प्रो. बी. चोन, आरजीआईपीटी के निदेशक प्रो. पीके भट्टाचार्या व पेट्रोलियम विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक सिंह ने दीप प्रज्जवलित किया। अलग-अलग देश से आए शोधकर्ताओं ने एडवांसेज इन पेट्रोलियम, केमिकल व एनर्जी चैलेंजेज विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
कैलसेप दुबई के प्रधान परामर्शदाता एवं क्षेत्रीय प्रबंधक जावेद अजीम, कुनसान यूनिवर्सिटी ताइवान के प्रो. चांग-रेन चेन, आईएनएचए विश्वविद्यालय कोरिया के प्रो. बी. चोन, हैलिबर्टन के एसआरके जंडेलिया ने पेट्रोलियम उत्पादन और आयात पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
साथ ही भारत में पेट्रोलियम की उपयोगिता बढ़ने पर भी चर्चा की। कहा कि डिमांड बढ़ने से ऊर्जा के क्षेत्र में चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। पेट्रोलियम के वैकल्पिक श्रोत की तलाश बेहद जरूरी है। आरजीआईपीटी के निदेशक प्रो. भट्टाचार्या ने कहा कि यह प्रथम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ऊर्जा समस्याओं के समाधान के लिए प्राध्यापकों व शोध करने वालों को एक नई दिशा प्रदान करेगी।
दुनियाभर में उत्पन्न ऊर्जा चुनौतियों का सामना करने के उद्देश्य से अकादमिक व उद्योगजगत के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए वातावरण तैयार करना है। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादन एवं शोधन के क्षेत्र में हुए नवीन खोजों को साझा करने के लिए मंच तैयार करना है।
इसमें दुबई, ताईवान, कोरिया समेत कई देशों के शोधकर्ता के साथ पेट्रोलियम संस्थान और कंपनियों के अधिकारी भी शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. तुषार शर्मा और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिवांजलि शर्मा ने दिया।
इस मौके पर प्रो. दीपक कुंजरू, सुनील सक्सेना, डॉ. डीके तुली, प्रो. गार्गी दास, आरके विज, डॉ. जितेंद्र संगवानी, प्रो. एमओ गर्ग, प्रो. केडीपी निगम मौजूद रहे।